भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन के पड़ोस पहुंचे

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन के पड़ोस पहुंचे

चीन के लगातार आक्रामक रुख और दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बड़ा और रणनीतिक दांव चला है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन के पड़ोसी और दक्षिणपूर्वी एशियाई देश वियतनाम के दौरे पर हनोई पहुंचे हैं। इस यात्रा का मुख्य मकसद हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में रक्षा संबंधों को नया आयाम देना और दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी और विस्तारवादी नीतियों पर प्रभावी अंकुश लगाना है। वियतनाम और भारत के बीच बढ़ते सामरिक जुड़ाव को चीन के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है।

दक्षिण चीन सागर में भारत और वियतनाम का मजबूत होता रक्षा गठबंधन

दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते एकाधिकार और समुद्री दावों ने इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल रखा है। वियतनाम इस क्षेत्र में एक फ्रंटलाइन राष्ट्र के रूप में भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है। अजीत डोभाल की हनोई यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष रक्षा और सुरक्षा अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की गई। इस वार्ता में लॉजिस्टिक्स सपोर्ट समझौते और समुद्री गश्त को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों देशों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का पालन होना चाहिए, ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के सुरक्षित रहे।

मेक इन इंडिया और ब्रह्मोस मिसाइल डील पर तेजी से आगे बढ़ता कदम

भारत और वियतनाम के बीच विजन 2030 के तहत रक्षा साझेदारी को एक नया आयाम दिया जा रहा है। भारत 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत वियतनाम की सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। रणनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, वियतनाम भारत की उन्नत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली को हासिल करने की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ा रहा है। यदि यह मिसाइल सौदा अमलीजामा पहनता है, तो दक्षिण चीन सागर में वियतनाम की तटीय सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी और चीन के आक्रामक जहाजों पर सीधा अंकुश लगेगा। इसके अतिरिक्त, भारत ने वियतनाम के रक्षा बुनियादी ढांचे के लिए 500 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन भी प्रदान की हुई है।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी और लॉजिस्टिक समझौते का बढ़ता दायरा

भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का वियतनाम एक प्रमुख केंद्र स्तंभ है। दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौते के तहत भारतीय और वियतनामी नौसेनाएं एक-दूसरे के बंदरगाहों और रीफ्यूलिंग सुविधाओं का उपयोग कर सकती हैं। यह समझौता भारत को दक्षिण चीन सागर के मुहाने पर सीधी सैन्य मौजूदगी का रणनीतिक लाभ प्रदान करता है। द्विपक्षीय व्यापार भी तेजी से बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके हैं। रक्षा और आर्थिक पहलों का यह अनूठा संगम चीन की एकतरफा भू-राजनीतिक चालों को प्रभावी ढंग से काउंटर करने की भारत की दूरदर्शी योजना का हिस्सा है।

क्षेत्रीय शांति और मुक्त हिंद-प्रशांत के लिए साझा रणनीतिक सोच

डोभाल के इस दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारों में किसी भी एकतरफा दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई यह बैठक न केवल द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई मजबूती देगी, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का यह कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और मुक्त नौवहन (Free Navigation) की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।