अमेरिकी हमलों के बाद अब ईरान का पलटवार, पश्चिम एशिया में बने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बरसाए मिसाइलें और ड्रोन

अमेरिकी हमलों के बाद अब ईरान का पलटवार, पश्चिम एशिया में बने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बरसाए मिसाइलें और ड्रोन

मध्य पूर्व यानी पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में इस समय खौफ और तबाही का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है, जहां अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ ईरान ने अब आर-पार की खुली जंग का ऐलान कर दिया है। अमेरिकी सेना द्वारा हाल ही में किए गए ताबड़तोड़ हवाई हमलों और 'टैंकर नीति' के जवाब में तेहरान ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़ा सैन्य पलटवार किया है। ईरानी सेना ने पश्चिम एशिया के विभिन्न रणनीतिक इलाकों में फैले अमेरिकी सैन्य अड्डों और छावनियों को निशाना बनाते हुए एक साथ दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलों और घातक सुसाइड ड्रोनों की बरसात कर दी है। इस भीषण गोलाबारी से न सिर्फ पूरे क्षेत्र में अफरातफरी मच गई है, बल्कि दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की सांसें भी थम गई हैं, क्योंकि यह सीधा सैन्य टकराव अब इस पूरे भू-भाग को एक पूर्णकालिक और विनाशकारी महायुद्ध के मुहाने पर ले आया है।

तेहरान का जोरदार पलटवार और अमेरिकी सैन्य अड्डों पर प्रहार

पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जुबानी जंग और गुप्त संघर्ष अब जमीन पर खुले युद्ध के रूप में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी हमलों में अपने रणनीतिक ठिकानों और तेल वाहक जहाजों को हुए भारी नुकसान का बदला लेने के लिए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों और नियमित सेना ने मिलकर पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों, रडार स्टेशनों और रसद केंद्रों पर एक के बाद एक कई मिसाइल और ड्रोन दागे। इन हमलों का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे को अपूरणीय क्षति पहुंचाना और वाशिंगटन को यह कड़ा संदेश देना है कि तेहरान हर उकसावे का जवाब दोगुने आक्रामक तरीके से देने की क्षमता रखता है।

पश्चिम एशिया में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां और वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय

ईरान के इस अचानक और भारी मिसाइल-ड्रोन हमले के बाद पश्चिम एशिया के कई देशों में అత్యंत गंभीर यानी हाई रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है। अमेरिका और उसके सहयोगियों की पैट्रियट और अन्य उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) को आसमान में मंडरा रहे ईरानी ड्रोनों और मिसाइलों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने के लिए पूरी क्षमता से सक्रिय कर दिया गया है। कई स्थानों पर धमाकों की गूंज से आसमान दहल उठा है, और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित बंकरों या घरों के भीतर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। इस संघर्ष के दायरे में आने वाले देशों की सरकारों ने अपने हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से बंद करना शुरू कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी व्यापक असर पड़ रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल की कीमतें और तीसरे विश्व युद्ध की आशंका

इस प्रत्यक्ष और भीषण सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ और राजनेता इस बात से डरे हुए हैं कि यदि इस संघर्ष को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह आग पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा यानी कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है। भारत और अन्य विकासशील देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं, इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। शेयर बाजारों में गिरावट और तेल के दामों में बेतहाशा उछाल आने की आशंका ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से तत्काल संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जिस तरह से जमीन पर मिसाइलें बरस रही हैं, उससे साफ है कि कूटनीति के रास्ते पीछे छूट चुके हैं और आने वाले दिन मानवता के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।