ट्रंप का संदेश लेकर पहुंचे मुनीर को ईरानी सिक्योरिटी चीफ की दो टूक

ट्रंप का संदेश लेकर पहुंचे मुनीर को ईरानी सिक्योरिटी चीफ की दो टूक

मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते रणनीतिक और सैन्य असंतुलन के बीच अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ताओं पर फिर से अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का महत्वपूर्ण संदेश लेकर तेहरान पहुंचे पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल असीम मुनीर की मध्यस्थता की कोशिशों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख और वरिष्ठ रणनीतिकार मोहसिन रजाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) का एक ग्राम भी देश की सीमाओं से बाहर नहीं भेजेगा। तेहरान के इस कड़े रुख ने वाशिंगटन और उसके सहयोगियों की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिनमें परमाणु सामग्री को तीसरे देश में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव शामिल था।

ट्रंप के संदेश पर भड़का तेहरान: सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई ने अमेरिका के सामने रखीं 7 सख्त शर्तें

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ और सुरक्षा प्रमुखों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच ठप पड़ी शांति वार्ता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर जारी संकट का समाधान निकालना था। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक वाशिंगटन ईरान की 7 प्रमुख शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत संभव नहीं है। इन शर्तों में ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी को तत्काल समाप्त करना, ईरान के तेल निर्यात पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना और क्षेत्र में जारी तमाम सैन्य कार्रवाइयों को पूर्ण विराम देना शामिल है।

60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम का मुद्दा: परमाणु क्षमता को आत्मसमर्पण करने से ईरान का साफ इनकार

पश्चिम के रक्षा विश्लेषकों का मानना था कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते के तहत तेहरान अपने 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को किसी तीसरे देश (जैसे रूस या कतर) में भेजने पर सहमत हो सकता है। लेकिन ईरानी नेतृत्व ने अपने सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई के रुख को दोहराते हुए कहा कि यह सामग्री ईरान की राष्ट्रीय संपत्ति और रणनीतिक संप्रभुता का हिस्सा है। तेहरान में आयोजित बैठकों के दौरान अधिकारियों ने कहा कि धमकी और सैन्य दबाव के बल पर रणनीतिक फैसलों को नहीं बदला जा सकता। यदि अमेरिका सच में शांति चाहता है, तो उसे पहले विश्वास बहाली के ठोस कदम उठाने होंगे और ईरान के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करना होगा।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका और वैश्विक भू-राजनीति पर पड़ता असर

पाकिस्तान लंबे समय से वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक कूटनीतिक पुल (Diplomatic Bridge) की भूमिका निभाता रहा है। जून में हुए अनंतिम समझौते से लेकर हालिया वार्ताओं तक जनरल असीम मुनीर ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संदेशों के आदान-प्रदान में बड़ी भूमिका निभाई है। लेकिन ईरान द्वारा अमेरिका की सभी मांगों को सिरे से खारिज करने और अपनी शर्तों पर अड़े रहने के कारण यह मध्यस्थता प्रयास भी गतिरोध में फंस गया है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियों के बीच तेहरान का यह सख्त संदेश यह दर्शाता है कि वह आने वाले किसी भी सैन्य या आर्थिक संकट का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

क्षेत्र में गहराता अनिश्चितता का माहौल: ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर संकट

ईरान द्वारा यूरेनियम बाहर भेजने से इनकार और होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी तनाव देखा जा रहा है। दुनिया भर के कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, और यदि अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार नहीं करता है, तो मध्य पूर्व में एक बड़े सैन्य टकराव का खतरा मंडराने लगा है। राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के पास अब केवल दो विकल्प बचे हैं—या तो वह ईरान के खिलाफ अपनी प्रतिबंध नीति को लचीला बनाए या फिर क्षेत्र में एक और लंबे युद्ध के लिए तैयार रहे। फिलहाल, तेहरान के रुख से यह साफ हो गया है कि वह किसी भी दबाव के सामने घुटने टेकने के मूड में बिल्कुल नहीं है।