पाकिस्तान के साथ डिफेंस डील के बाद भारत के साथ कुवैत की बड़ी बैठक, क्या है पूरा रणनीतिक खेल

पाकिस्तान के साथ डिफेंस डील के बाद भारत के साथ कुवैत की बड़ी बैठक, क्या है पूरा रणनीतिक खेल

पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) के भू-राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा कूटनीतिक मोड़ देखने को मिला है। पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के ठीक अगले ही दिन कुवैत ने इस्लामाबाद को बड़ा कूटनीतिक संदेश देते हुए अपने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को भारत भेजा।

नई दिल्ली में भारत और कुवैत के बीच पहली 'संयुक्त रक्षा समिति' (Joint Defence Committee - JDC) की ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई, जिसका सीधा मकसद सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त युद्धाभ्यास, रक्षा उद्योग और अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) में द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

पीएम मोदी के 2024 दौरे के रक्षा विजन को मिला नया धरातल

क्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित इस उद्घाटन बैठक ने दोनों देशों के रक्षा संबंधों को औपचारिक और व्यावहारिक स्वरूप प्रदान किया है। यह कदम दिसंबर 2024 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत तय किए गए रणनीतिक लक्ष्यों को जमीन पर उतारने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

1962 से कायम ऐतिहासिक रिश्ते और विशाल भारतीय समुदाय की ताकत

भारत और कुवैत के बीच द्विपक्षीय संबंधों का आधार छह दशक से अधिक पुराना और अटूट रहा है। वर्ष 1962 में दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। तभी से दोनों देश आर्थिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से एक-दूसरे के करीब रहे हैं। कुवैत में मौजूद विशाल भारतीय प्रवासी समुदाय और भौगोलिक निकटता ने इस साझेदारी को हर दौर में मजबूत बनाया है, जिसे दिसंबर 2024 की उच्चस्तरीय यात्रा के बाद नई रफ्तार मिली।

सैन्य युद्धाभ्यास, उन्नत ट्रेनिंग और 'मेक इन इंडिया' रक्षा उपकरणों पर बनी सहमति

संयुक्त रक्षा समिति (JDC) की पहली बैठक में दोनों देशों के रणनीतिक हितों से जुड़े प्रमुख पहलुओं पर गहन मंथन हुआ। दोनों देशों के सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं (Operational Capabilities) और कौशल को निखारने के लिए विशेष सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा खींची गई। थल, जल और नभ—तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए नियमित संयुक्त युद्धाभ्यासों के आयोजन और भारत के बढ़ते रक्षा उत्पादन सामर्थ्य को देखते हुए रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन व औद्योगिक साझेदारी पर पूर्ण सहमति व्यक्त की गई।

डीआरडीओ और तीनों सेनाओं के शीर्ष अधिकारी रहे मौजूद

इस उच्चस्तरीय वार्ता में कुवैती प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के रक्षा मंत्रालय के ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसक्रान के साथ आए 5 सदस्यीय आधिकारिक दल ने किया। वहीं भारतीय पक्ष की अगुवाई रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद ने की। इस अहम बैठक में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना के वरिष्ठ अफसरों समेत रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय (MEA) के शीर्ष अधिकारी शामिल रहे, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत कुवैत के साथ रक्षा संबंधों को व्यापक ढांचा प्रदान कर रहा है।