लाहौर बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर: AQI 530 के पार
पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले लाहौर शहर पर जहरीले स्मॉग और वायु प्रदूषण का बेहद भयानक संकट मंडरा रहा है। वैश्विक स्तर पर हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने वाली संस्थाओं की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 530 के अति-खतरनाक आंकड़े को पार कर गया है। इस खतरनाक उछाल के साथ ही लाहौर एक बार फिर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पायदान पर पहुंच गया है। शहर के आसमान पर जहरीले धुएं और घने स्मॉग की मोटी परत जम गई है, जिससे पूरा लाहौर एक खुले गैस चेंबर जैसा महसूस हो रहा है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि सड़कों पर दृश्यता (Visibility) न के बराबर रह गई है और सांस लेने में आ रही भारी कठिनाई के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है। अस्पतालों में आंखों में जलन, गले में खराश, दमा और सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है।
#1. लाहौर में AQI 530 पार: विषैले कण PM2.5 का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक
लाहौर के विभिन्न इलाकों में स्थापित वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों द्वारा दर्ज किए गए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। शहर के कई घने और औद्योगिक क्षेत्रों में एक्यूआई का स्तर 500 से 535 के आंकड़े को पार कर गया, जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए 'अत्यंत घातक' श्रेणी में आता है। हवा में मौजूद अति-सूक्ष्म विषैले कणों यानी PM2.5 की सांद्रता (Concentration) 343 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक पाई गई है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय किए गए सुरक्षित दैनिक मानकों से दर्जनों गुना अधिक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों के गहराई तक जाकर सीधे रक्तप्रवाह में शामिल हो जाते हैं, जो न केवल फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे को भी कई गुना बढ़ा देते हैं।
#1. जहरीले स्मॉग के मुख्य कारण: वाहनों का धुआं, पराली दहन और औद्योगिक उत्सर्जन
लाहौर में हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ पैदा होने वाले इस गंभीर पर्यावरणीय संकट के पीछे कई भौगोलिक और मानवीय कारण जिम्मेदार हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार, शहर के वायु प्रदूषण में सर्वाधिक योगदान (लगभग 45-50 प्रतिशत) पुराने और अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों के परिवहन तंत्र का है। इसके बाद लगभग 28 फीसदी योगदान स्थानीय फैक्ट्रियों, स्टील मिलों और अनियंत्रित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले विषैले धुएं का है। इसके अलावा, खेतों में जलाई जाने वाली फसलों की पराली (Crop Residue Burning) का धुआं और पारंपरिक ईंट भट्ठों से निकलने वाली कालिज इस संकट को और अधिक भयावह बना देती है। सर्दियों में हवा की धीमी गति (Wind Speed) और कम तापमान के कारण यह विषैला धुआं वायुमंडल में ऊपर नहीं उठ पाता और धरातल के पास फंसकर घने जहरीले स्मॉग का रूप ले लेता है।
#1. हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात: अस्पतालों में मरीजों की कतारें और प्रशासन का अलर्ट
लाहौर में बने इस भयानक वायु संकट को देखते हुए स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन और मेडिकल एसोसिएशन ने इमरजेंसी अलर्ट जारी किया है। लाहौर के मेयो अस्पताल, जिन्ना अस्पताल औरServices Hospital सहित सभी प्रमुख चिकित्सा केंद्रों की इमरजेंसी में सांस फूलने, लगातार खांसी, सीने में दर्द और आंखों में संक्रमण की शिकायतों के साथ पहुंचने वाले मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। डॉक्टरों ने विशेष रूप से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों को बेहद सावधान रहने की सलाह दी है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे जब तक बहुत आवश्यक न हो, तब तक अपने घरों से बाहर न निकलें और बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाले N95 मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करें।
#1. सरकार की ओर से सख्त कदम: स्कूलों के समय में बदलाव और ग्रीन लॉकडाउन
पंजाब प्रांत की प्रांतीय सरकार और पर्यावरण संरक्षण विभाग (EPD) ने प्रदूषण के इस तांडव पर काबू पाने के लिए कई कड़े और आपातकालीन प्रतिबंध लागू किए हैं। प्रशासन ने शहर के अति-प्रदूषित हॉटस्पॉट्स में 'ग्रीन लॉकडाउन' लागू करने के आदेश दिए हैं। इसके तहत निर्माण गतिविधियों पर आंशिक रोक लगा दी गई है, बिना धुएं के फिल्टर चल रहे ईंट भट्ठों को बंद कराया जा रहा है और भारी वाणिज्यिक वाहनों के शहर में प्रवेश पर कड़े नियम लागू किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चों को सुबह के समय घने स्मॉग के सीधे संपर्क में आने से बचाने के लिए प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के समय (School Timings) में फेरबदल किया गया है तथा आउटडोर स्पोर्ट्स और असेंबली गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
#1. ग्रीन डिप्लोमेसी और स्थायी समाधान की मांग: क्षेत्रीय सहयोग की सख्त जरूरत
लाहौर में लगातार गहराते इस स्मॉग संकट ने अब एक बड़े राजनीतिक और कूटनीतिक मुद्दे का रूप ले लिया है। पाकिस्तानी पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार हवाओं के कारण दोनों देशों का पंजाब क्षेत्र एक ही 'एयर शेड' (Air Shed) साझा करता है। इसलिए केवल एक शहर या प्रांत में तात्कालिक कदम उठाने से इस वार्षिक विपदा का स्थायी हल संभव नहीं है। जब तक पड़ोसी क्षेत्रों के साथ मिलकर पराली दहन, औद्योगिक मानकों और हरित प्रौद्योगिकियों (Green Technologies) पर एक संयुक्त और दीर्घकालिक मास्टर प्लान नहीं तैयार किया जाता, तब तक लाहौर और आसपास के करोड़ों नागरिकों को हर साल इसी तरह इस जहरीले धुएं के चंगुल में घुटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।