होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों में भीषण धमाका और आग
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर बड़ा हादसा और तनाव पैदा हो गया है। खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल का परिवहन कर रहे दो विशाल तेल टैंकर अचानक समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) से टकरा गए, जिसके तुरंत बाद दोनों जहाजों में भीषण आग लग गई और धुएं का गुबार आसमान में छा गया। इस घटना की पुष्टि करते हुए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि ये टैंकर निर्धारित सुरक्षित समुद्री रास्तों का उल्लंघन कर रहे थे और जलक्षेत्र में बिछाई गई नेवल माइंस की चपेट में आ गए। इस अचानक हुए हादसे ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बार फिर से खतरे की घंटी बजा दी है।
अंतरराष्ट्रीय नौवहन चेतावनी की अनदेखी पड़ी भारी, नौसेना का बचाव अभियान जारी
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) और अंतरराष्ट्रीय नौवहन निगरानी संस्थाओं के अनुसार, हादसे की चपेट में आए दोनों जहाजों से आपातकालीन संकट संदेश (Distress Signal) जारी किए गए। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद तटरक्षक जहाजों और बचाव दलों को मौके के लिए रवाना किया गया। राहत कार्य चलाकर जहाजों के चालक दल (Crew Members) को सुरक्षित बाहर निकालने और आग पर काबू पाने की कोशिशें की जा रही हैं। ईरान की नौसेना ने स्पष्ट किया है कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद कई कमर्शियल वेसल्स उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों से होकर गुजर रहे हैं, जिससे इस तरह के जानलेवा हादसे घटित हो रहे हैं। इस घटना के बाद होर्मुज स्ट्रैट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।
वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर गहरा सकता है संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट है जहां से होकर वैश्विक कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों के बीच टैंकरों पर हुए इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को हिलाकर रख दिया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस रणनीतिक जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और समुद्री सुरंगों का खतरा इसी तरह बना रहा, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिल सकता है और वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट गहरा सकता है।
अमेरिका और पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया पर टिकीं पूरी दुनिया की निगाहें
इस घटना के सामने आने के बाद वाशिंगटन और उसके पश्चिमी सहयोगियों के सैन्य ठिकानों पर हलचल बढ़ गई है। अमेरिकी नौसेना और सेंट्रल कमांड (CENTCOM) इस बात की गहन जांच कर रहे हैं कि जहाजों पर माइंस टकराने का यह दावा ईरानी कार्रवाई का हिस्सा है या जलमार्ग में सुरक्षा में बड़ी चूक हुई है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य जमावड़े और एक के बाद एक हो रहे टैंकर हादसों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। आने वाले 48 घंटों में अगर कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ, तो यह घटना फारस की खाड़ी में एक नए और बड़े समुद्री संघर्ष को जन्म दे सकती है।