ओसामा ने खाई थी अमेरिका को दहलाने की कसम, CIA का नया खुलासा- महाविनाश की खौफनाक चेतावनी

ओसामा ने खाई थी अमेरिका को दहलाने की कसम, CIA का नया खुलासा- महाविनाश की खौफनाक चेतावनी

दुनिया के इतिहास के सबसे काले और दहशतनाक अध्यायों में शुमार 9/11 के आतंकी हमलों को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) ने एक ऐसा चौंकाने वाला और सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा तंत्र की नींद उड़ा दी है। खुफिया दस्तावेजों और डिक्रिफाइड फाइलों से यह बात साफ हो गई है कि अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन अमेरिका को नेस्तनाबूद करने और उसे अंदर से दहलाने की खौफनाक कसम खा चुका था। पेंटागन और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर कहर बनकर टूटने वाले इस हमले से बहुत पहले ही ओसामा दुनिया के सबसे ताकतवर देश को उसकी औकात दिखाने और बर्बादी के मुहाने पर खड़ा करने की चेतावनी दे चुका था, जिसे अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया तंत्र उस समय शुरुआती दौर में हल्के में ले बैठे थे। सीआईए के हालिया दस्तावेजों के मुताबिक, ओसामा का केवल एक ही नापाक मकसद था कि अमेरिका को आर्थिक, सामरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से इतना गहरा आघात दिया जाए कि वह कभी संभल न सके और वैश्विक पटल पर उसकी बादशाहत को हमेशा के लिए धूल में मिला दिया जाए।

CIA की गोपनीय फाइलों से उठा पर्दा, ओसामा की सनक और अमेरिका को तबाह करने का ब्लूप्रिंट

खुफिया दस्तावेजों के विश्लेषण से यह हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है कि ओसामा बिन लादेन केवल खोखली धमकियां देने वाला सरगना नहीं था, बल्कि वह अमेरिका के खिलाफ एक बहुत ही खतरनाक और सुनियोजित ब्लूप्रिंट पर जमीन पर काम कर रहा था। सीआईए की रिपोर्ट बताती है कि ओसामा ने अपनी युवावस्था और जिहादी दौर की शुरुआत के साथ ही यह ठान लिया था कि वह अमेरिका की सरजमीं पर घुसकर ऐसा तांडव मचाएगा, जिसे दुनिया सदियों तक याद रखेगी। अल-कायदा के भीतर बैठकों का दौर चलता था, जहां अमेरिकी शहरों के नक्शे बिछाए जाते थे और कमर्शियल विमानों को मिसाइल की तरह इस्तेमाल करने के खौफनाक आइडिया पर महीनों चर्चा होती थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसी के इन दस्तावेजों में यह भी उल्लेख किया गया है कि ओसामा अपने गुर्गों के सामने अक्सर यह कसमें खाया करता था कि वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ देगा और व्हाइट हाउस से लेकर पेंटागन तक को उसकी साम्राज्यवादी नीतियों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। लादेन की यह सनक धीरे-धीरे एक ऐसे वैश्विक खतरे में तब्दील हो गई, जिसकी भनक दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक और जासूसी नेटवर्क रखने वाली सीआईए को भी तब लगी जब बहुत देर हो चुकी थी।

अमेरिकी खुफिया तंत्र की बड़ी चूक और 9/11 से पहले दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज करने का इतिहास

नाकामियों और भूल-सुधार के इतिहास पर अगर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि ओसामा बिन लादेन द्वारा दी गई चेतावनियों को अमेरिकी अधिकारियों और सुरक्षा नीति निर्माताओं ने किस हद तक हल्के में लिया था। 9/11 के हमलों से महीनों पहले विभिन्न गुप्त स्रोतों, इंटरसेप्टेड कॉल्स और पकड़े गए आतंकियों के बयानों के जरिए सीआईए और एफबीआई के पास ऐसे अनगिनत सुराग पहुंच चुके थे जो किसी बड़े आसन्न खतरे की तरफ साफ इशारा कर रहे थे। लेकिन अंतर-एजेंसी समन्वय की कमी, ब्यूरोक्रेसी का अड़ियल रवैया और इस अंधविश्वास ने कि कोई भी संगठन अमेरिका की मुख्य भूमि पर हमला करने की हिम्मत नहीं जुटा सकता, देश की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया। ओसामा की तरफ से लगातार मिल रहे संदेशों और चेतावनियों को केवल चरमपंथी प्रोपेगंडा मानकर खारिज कर दिया गया, जिसका खामियाजा अंततः ग्यारह सितंबर 2001 को हजारों निर्दोष अमेरिकियों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। सीआईए के इन नए खुलासों ने एक बार फिर उस दौर की प्रशासनिक लापरवाही और खुफिया तंत्र की उस भारी चूक पर से पर्दा उठा दिया है, जिसने दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले देश को अंदर से हिलाकर रख दिया था।

वैश्विक आतंकवाद का बदलता चेहरा और ओसामा के नापाक सपनों का अंत

ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका को दहलाने की जो खौफनाक कसम खाई थी, उसने भले ही अल्पकालिक तौर पर दुनिया को हिलाकर रख दिया हो, लेकिन उसके इन नापाक सपनों का अंत अंततः बेहद दर्दनाक और अपमानजनक तरीके से हुआ। 9/11 के बाद अमेरिका ने दुनिया भर में 'वार ऑन टेरर' का ऐलान किया और अपनी पूरी सैन्य तथा खुफिया ताकत ओसामा को ढूंढ निकालने में झोंक दी, जिसके परिणामस्वरुप वर्षों की लंबी तलाश के बाद एबटाबाद में अमेरिकी नेवी सील्स ने उसे ढेर कर दिया। हालांकि ओसामा तो मारा गया, लेकिन उसके द्वारा बोए गए आतंकवाद के बीज और उसकी धमकियों के निशान आज भी दुनिया की भू-राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं। सीआईए के ये नए खुलासे इस बात की ताकीद करते हैं कि आतंकवादी संगठनों की धमकियों और उनके मंसूबों को कभी भी कम करके नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि जब सनक और वैचारिक कट्टरता आपस में मिलती है, तो वह मानव सभ्यता के लिए एक लाइम लाइलाज नासूर बन जाती है। ओसामा की वह कसम और उसके द्वारा दी गई चेतावनी आज भी अमेरिकी खुफिया इतिहास के पन्नों में उस सबक के रूप में दर्ज है, जिसे कोई भी सुपरपावर कभी दोबारा भूलना नहीं चाहेगी।