'ऑपरेशन सिंदूर' का डर या पानी की तंगी? स्वतंत्रता दिवस पर भी अपनी हताशा छिपा नहीं पाया पाकिस्तान

'ऑपरेशन सिंदूर' का डर या पानी की तंगी? स्वतंत्रता दिवस पर भी अपनी हताशा छिपा नहीं पाया पाकिस्तान

14 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस के जश्न में भी पाकिस्तानी नेतृत्व अपनी हताशा छिपा नहीं पाया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' की रणनीतिक चोट का असर इस्लामाबाद में अब भी साफ दिख रहा है।

सिंधु जल समझौते पर भारत के हालिया कड़े फैसले ने पड़ोसी देश की चिंताएं इस कदर बढ़ा दी हैं कि वहां के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सीधे तौर पर सैन्य टकराव की चेतावनी दे डाली है।

पानी पर घबराहट और 'रेड लाइन' की चेतावनी

जल संसाधन को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी उसके शीर्ष नेतृत्व के बयानों में साफ झलक रही है। शहबाज शरीफ ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को एकतरफा रोकने के कदम पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने पानी की हर एक बूंद को अपने मुल्क के लिए 'रेड लाइन' करार दिया। उनका कहना था कि यदि इस मामले में भारत ने अपना रास्ता नहीं बदला तो वे इसका कड़ा जवाब देंगे। यह बयान बुनियादी तौर पर पाकिस्तान के गहराते जल संकट के डर को दर्शाता है।

'यादगार-ए-फतह' का अनावरण और सैन्य जमावड़ा

यह पूरा घटनाक्रम गुरुवार रात राजधानी इस्लामाबाद में हुआ। मौका था पाकिस्तान की आजादी के 80वें साल की शुरुआत पर 'यादगार-ए-फतह' नाम के नए स्मारक के उद्घाटन का। इस कार्यक्रम में देश का पूरा शीर्ष सैन्य और राजनीतिक तंत्र मौजूद था। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिधू और नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ ने भी इसमें हिस्सा लिया। सरकार के मुताबिक यह निर्माण 'मरका-ए-हक' और शहीद सैनिकों की याद में किया गया है।

शांति का मुखौटा और पुरानी हार की टीस

एक तरफ पाकिस्तानी पीएम अपने देश को विश्व शांति का पैरोकार बताते रहे वहीं दूसरी तरफ उन्होंने खुलेआम धमकियां भी दीं। अपने भाषण में शरीफ ने मई 2025 की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा को खतरा होने पर वे पिछली बार से भी ज्यादा भयानक पलटवार करेंगे। 'ऑपरेशन सिंदूर' में मिली हार का दर्द इस संबोधन में साफ महसूस किया जा सकता था जो यह साबित करता है कि पाकिस्तान अब कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर पूरी तरह से दबाव में है।