सऊदी अरब की धरती से बोले ओसामा के फैन पाकिस्तानी मौलाना ताहिर अशरफी
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मध्य पूर्व के घटनाक्रम में इन दिनों सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच का संघर्ष चरम पर पहुंच चुका है। इसी गहमागहमी के बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के प्रमुख हाफिज़ मुहम्मद ताहिर अशरफी ने एक ऐसा आक्रामक और सनसनीखेज बयान दिया है जिसने भू-राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। कभी दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन की खुलकर तारीफ करने और उसे 'योद्धा' बताने वाले पाकिस्तानी मौलाना ताहिर अशरफी ने इस बार हूती विद्रोहियों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने मंच से दो टूक शब्दों में कहा कि हूती विद्रोही असल में मुसलमान हैं ही नहीं और उनका इस्लाम धर्म या इसकी मूल विचारधारा से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। उनके इस तीखे और विवादास्पद बयान ने इस्लामिक देशों के बीच वैचारिक और कूटनीतिक बहसों को एक बार फिर से हवा दे दी है।
हूतियों को बताया आतंकवादी और इस्लाम विरोधी
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मौलाना ताहिर अशरफी ने हूती गुट को सीधे तौर पर एक खतरनाक आतंकवादी संगठन करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यमन के ये विद्रोही क्षेत्रीय शांति को भंग करने की साजिश रच रहे हैं और उनके पीछे काम करने वाली ताकतें सीधे तौर पर मुस्लिम जगत यानी उम्माह (Ummah) की दुश्मन हैं। अशरफी ने अपने भाषण में इस बात पर विशेष जोर दिया कि सऊदी अरब की सुरक्षा और संप्रभुता पाकिस्तान के लिए एक 'रेड लाइन' की तरह है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की सरकार, उसकी शक्तिशाली सेना, देश के तमाम उलेमा और आम जनता पूरी मजबूती के साथ सऊदी नेतृत्व के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल एक धार्मिक उपदेश नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी रणनीतिक और राजनीतिक कूटनीति छिपी हुई है, जो खाड़ी देशों के साथ पाकिस्तान के मजबूत होते सैन्य और वैचारिक गठजोड़ को दर्शाती है।
पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की का नया रक्षा समझौता
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ताहिर अशरफी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में तीनों देशों के बीच हुए रणनीतिक समझौतों और सैन्य बैठकों के बाद से इस क्षेत्र में समीकरण तेजी से बदले हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी पहले यह बयान दिया था कि सऊदी अरब का दुश्मन सीधे तौर पर पाकिस्तान का दुश्मन माना जाएगा। ऐसे में एक प्रमुख पाकिस्तानी मौलाना द्वारा हूतियों को गैर-मुस्लिम और आतंकवादी बताना इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान आधिकारिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर सऊदी अरब के सुरक्षा हितों की ढाल बनने के लिए पूरी तरह तैयार बैठा है। हालांकि, अतीत में ओसामा बिन लादेन की पैरवी करने वाले मौलाना के मुंह से आतंकवाद और इस्लाम को लेकर आई यह नसीहत अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर एक बड़े उपहास और तीखी चर्चा का विषय बन चुकी है।