फ्लाइट को क्रैश करने की कोशिश करने वाले पायलट को बताया बेचारा, दी बेहद शर्मनाक दलील
अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता, मीडिया नैतिकता और पड़ोसी मुल्क के प्रोपेगेंडा तंत्र से जुड़ी एक ऐसी हैरान करने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के मीडिया जगत को सन्न कर दिया है। हाल ही में एक गंभीर और संवेदनशील विमानन संकट के दौरान जब एक पायलट ने अपनी लापरवाह या नापाक हरकतों से नागरिक उड्डयन और फ्लाइट को क्रैश करने की खतरनाक कोशिश की, तो पूरी दुनिया के जिम्मेदार मीडिया संस्थानों ने उसकी कड़ी आलोचना की। लेकिन इसके विपरीत, पाकिस्तानी मीडिया ने अपनी पुरानी और पक्षपाती आदत से बाज न आते हुए सारी हदें पार कर दीं। पाकिस्तानी चैनलों और पोर्टल्स ने उस व्यक्ति को विलेन मानने के बजाय एक 'बेचारा' करार दिया और उसकी हरकतों को सही ठहराने के लिए बेहद घटिया तथा शर्मनाक दलीलें पेश करनी शुरू कर दीं। इस प्रकार की पत्रकारिता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पड़ोसी देश का मीडिया किस हद तक सच से मुंह मोड़कर अपने देश की संकीर्ण मानसिकता और झूठे नैरेटिव को बढ़ावा देने का काम करता है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थू-थू हो रही है।
पाकिस्तानी मीडिया का दोहरा चरित्र और झूठा प्रोपेगेंडा तंत्र
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, जिसका मुख्य कर्तव्य निष्पक्ष खबरें दिखाना और सच को दुनिया के सामने लाना होता है, लेकिन पाकिस्तान के मीडिया घरानों ने हमेशा से इसके विपरीत आचरण किया है। जब भी कोई ऐसा मामला सामने आता है जिसमें अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन होता है या किसी खतरे की स्थिति पैदा होती है, तो पाकिस्तानी मीडिया तुरंत अपनी विकृत मानसिकता के तहत तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने लगता है। इस ताजा मामले में भी जब एक उड़ान के दौरान विमान को गंभीर खतरे में डालने वाली घटना घटी, तो दुनिया भर की मीडिया ने सुरक्षा मानकों और पायलट की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए। इसके उलट, पाकिस्तानी मीडिया ने आरोपी को कटघरे में खड़ा करने के बजाय उसके समर्थन में कहानियां गढ़नी शुरू कर दीं। उन्होंने इस गंभीर कृत्य को एक मामूली गलती या राजनीतिक साजिश का रंग देने की कोशिश की, ताकि असली गुनहगारों को बचाया जा सके और जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
विमान सुरक्षा से खिलवाड़ और पायलट को बचाने की शर्मनाक कोशिश
किसी भी देश में विमानन सुरक्षा (Aviation Safety) से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इसमें सैकड़ों मासूम यात्रियों की जान दांव पर होती है। यदि कोई पायलट या क्रू मेंबर अपनी जिम्मेदारी के विपरीत ऐसा कदम उठाता है जिससे फ्लाइट क्रैश होने की नौबत आ जाए, तो उसे सबसे बड़ा अपराधी माना जाता है और कानूनी रूप से कड़ी सजा का प्रावधान होता है। लेकिन पाकिस्तानी मीडिया ने इस पूरी गंभीरता को दरकिनार करते हुए उस संदिग्ध व्यक्ति को पीड़ित और 'बेचारा' साबित करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने ऑन-एयर ऐसी बचकानी और आधारहीन दलीलें दीं जिन्हें सुनकर कोई भी समझदार इंसान अपना सिर पीट ले। पाकिस्तानी विश्लेषकों और एंकरों ने यह तक कहने से गुरेज नहीं किया कि उस व्यक्ति को जानबूझकर फंसाया जा रहा है, जबकि तकनीकी रिपोर्ट्स और शुरुआती जांच में उसके कारनामे पूरी तरह बेनकाब हो चुके थे। इस प्रकार की घटिया दलीलें देकर पाकिस्तानी मीडिया ने अपनी गिरती हुई साख और unprofessionalism का एक और नया उदाहरण पेश किया है।
वैश्विक मंच पर पाकिस्तानी मीडिया की किरकिरी और नैतिकता का पतन
पड़ोसी मुल्क के इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के बाद अब वैश्विक स्तर पर पाकिस्तानी मीडिया की जमकर आलोचना हो रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रेस संगठनों और उड्डयन विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई देश का मीडिया अपराधियों और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों का बचाव करने लगे, तो यह समझ लेना चाहिए कि उस देश में सच का गला घोंट दिया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी आम यूजर्स पाकिस्तानी मीडिया की इस बेशर्मी पर जमकर फब्तियां कस रहे हैं और वीडियो शेयर कर उनकी खिल्ली उड़ा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह की हरकतों से पाकिस्तान की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक धूमिल हो रही है, क्योंकि दुनिया अब उनके प्रोपेगेंडा को अच्छी तरह समझ चुकी है। एक तरफ जहां पेशेवर और जिम्मेदार मीडिया सच्चाई और सुरक्षा को सर्वोपरि रखता है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी मीडिया अपनी ओछी हरकतों और झूठी दलीलों के जरिए पूरी दुनिया के सामने एक बार फिर से उपहास का पात्र बन गया है।