पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में गरमाया माहौल, मौलाना फजलुर रहमान का फूटा गुस्सा
पड़ोसी देश पाकिस्तान की सियासत में इस समय एक ऐसा भयंकर राजनीतिक भूचाल आया है, जिसने वहां की शक्तिशाली सेना और मौजूदा सरकार की नींद उड़ा दी है। जमीयत उलेमा-ए-Islam (F) के प्रमुख और 'मौलाना डीजल' के नाम से मशहूर वरिष्ठ पाकिस्तानी राजनेता मौलाना फजलुर रहमान ने देश के मौजूदा हालात पर ऐसा विस्फोटक बयान दिया है, जिसकी गूंज इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक साफ सुनाई दे रही है। मौलाना ने खुलेआम पाकिस्तान के हुक्मरानों और देश की सेना के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करते हुए यह दोटूक ऐलान किया है कि पाकिस्तान के भीतर लगातार पैर पसार रहा खौफनाक आतंकवाद किसी बाहरी ताकत की देन नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तानी सेना की गलत नीतियों और राजनीतिक साजिशों का परिणाम है। उनके इस तीखे और बेबाक हमले ने पाकिस्तानी सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है।
सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और शहबाज शरीफ पर बोला सीधा हमला
मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि देश की जनता को झूठे वादों और दमनकारी नीतियों के सहारे लंबे समय तक गुमराह नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुल्क में कानून का जनाजा निकल चुका है और आम नागरिक महंगाई, भुखमरी के साथ-साथ आतंकवाद की आग में सुलग रहा है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए केवल प्रोपेगंडा कर रहे हैं। मौलाना ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों के कंधों पर देश की सरहदों और नागरिकों की हिफाजत करने की जिम्मेदारी है, वे सत्ता के गलियारों में बैठकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त हैं। जब देश का मुख्य नेतृत्व ही अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने लगे, तो आतंकवाद का राक्षस तो विकराल रूप धारण करेगा ही।
दशकों से चली आ रही गुप्त रणनीतियों और छद्म युद्ध की खुली पोल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौलाना फजलुर रहमान का यह बयान पाकिस्तान के इतिहास में बेहद दुर्लभ और साहसी माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर वहां की मुख्यधारा के राजनेता सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना की गुप्त नीतियों या उसके आतंकवाद समर्थक रवैये पर बोलने से बचते हैं। मौलाना ने अपने भाषण और बयानों में इस बात की ओर भी स्पष्ट इशारा किया है कि कैसे दशकों से रणनीतिक गहराई (Strategic Depth) के नाम पर आतंकवादियों को पालने-पोसने का जो खेल खेला गया था, आज वही नासूर बनकर खुद पाकिस्तान के सीने पर मूंग दल रहा है। देश के उत्तर-पश्चिम हिस्से यानी खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के इलाकों में जो हालात पैदा हो गए हैं, वे इस बात का सबूत हैं कि पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी जनता को सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल साबित हो चुके हैं।
पाकिस्तान के भविष्य पर मंडराता गहरा संकट और इस बयान का कूटनीतिक असर
मौलाना फजलुर रहमान के इस बयान के बाद पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में एक नया दंगल शुरू हो गया है। एक तरफ जहां विपक्षी दल और आम जनता उनके इस सुर में सुर मिला रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी गठबंधन और सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर अंदरखाने भारी तनाव पैदा हो गया है। पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज के बोझ, भीषण आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में देश के भीतर से ही सेना और सरकार के खिलाफ इस तरह के बयानों का आना यह साबित करता है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान का आंतरिक संकट और अधिक गहराने वाला है। दुनिया भर के रणनीतिकार अब यह मान रहे हैं कि पाकिस्तान का यह आंतरिक विरोधाभास और आतंकवाद के खिलाफ उसकी दोहरी नीति अब उसके अपने ही वजूद के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।