प्रदर्शनकारियों ने मुनीर और शहबाज को दी आर-पार की चुनौती
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय नागरिकों और वहां के हुक्मरानों के बीच तनातनी अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है। हाल ही में हुए व्यापक जन-आंदोलनों और प्रदर्शनों के दौरान उठी एक मांग ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी हुक्मरानों और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सीधी और कड़ी चुनौती देते हुए एलान किया है कि आने वाले समय में पाकिस्तानियों को PoK में दाखिल होने के लिए वीजा लेना पड़ेगा। इस तीखे तेवर और आर-पार की लड़ाई ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
विवाद की यह पूरी आग क्षेत्र में लंबे समय से स्थानीय संसाधनों के दोहन, बुनियादी अधिकारों की भारी कमी, भारी-भरकम बिजली बिलों और महंगाई के खिलाफ सुलग रही थी। पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की अवाम अब इस बात से बेहद नाराज है कि उनके जल विद्युत संसाधनों, पर्यटन और खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व का लाभ केवल रावलपिंडी और इस्लामाबाद के अधिकारी उठाते हैं जबकि स्थानीय जनता को सिर्फ लाठियां और बदहाली मिलती है। इसी दमनकारी नीति के विरोध में सड़कों पर उतरे अवाम ने पाकिस्तान के मुख्य भूभाग से आने वाले लोगों और अधिकारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का मन बना लिया है।
आंदोलनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि जिस प्रकार एक स्वतंत्र और संप्रभु क्षेत्र में जाने के लिए सीमा पार करने के नियम होते हैं, वही नीति अब PoK और पाकिस्तान के बीच भी लागू होनी चाहिए। स्थानीय नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने दो टूक शब्दों में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ललकारते हुए कहा है कि वे अपनी दमनकारी नीतियां बंद करें। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया और मानवाधिकारों का हनन जारी रहा, तो पाकिस्तानी नागरिकों और अधिकारियों के लिए PoK की सीमाएं पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी जाएंगी और उन्हें यहां आने के लिए वैध वीजा लेना अनिवार्य होगा।
इस बगावती तेवर ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और सैन्य तंत्र की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि PoK में पनप रहा यह जन-आक्रोश किसी साधारण स्थानीय विरोध से कहीं अधिक गंभीर है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पाकिस्तान की भौगोलिक अखंडता और प्रशासनिक नियंत्रण पर सवालिया निशान लगा रहा है। स्थानीय अवाम अब पाकिस्तान के कब्जे को मानसिक और वैचारिक रूप से भी अस्वीकार करने लगी है, जिससे इस्लामाबाद के लिए स्थिति को संभालना बेहद मुश्किल हो गया है। आने वाले दिनों में यह टकराव और गहरा सकता है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है।