अमेरिकी हमलों से बौखलाया ईरान, एयरबेस पर दाग दी घातक मिसाइलें; धुआं-धुआं हुआ पूरा मिलिट्री बेस
पश्चिम एशिया में जारी भयंकर तनाव और खूनी संघर्ष के बीच अब यह जंग सीधे तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच आमने-सामने के टकराव में बदलती हुई साफ नजर आ रही है। अमेरिकी सेना द्वारा हाल ही में मध्य पूर्व के कई ठिकानों पर किए गए ताबड़तोड़ और विनाशकारी हवाई हमलों से पूरी तरह बौखलाए ईरान ने अब जवाबी कार्रवाई करते हुए सीधे पड़ोसी देश जॉर्डन में स्थित अमेरिकी वायु सेना के दो प्रमुख और संवेदनशील एयरबेसों को अपनी हाइपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है। इस अचानक हुए भीषण और खौफनाक हमले के बाद जॉर्डन के इन दोनों मिलिट्री बेस से आसमान में आग के गोले और काले धुएं के गुबार उठते हुए देखे गए, जिससे अमेरिकी सुरक्षा महकमे में भारी हड़कंप मच गया है। इस खतरनाक सैन्य कार्रवाई ने एक बार फिर से पूरे मिडिल ईस्ट को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां हर पल बदलती स्थिति दुनिया भर के देशों के लिए गहरी चिंता का बड़ा विषय बन चुकी है।
अमेरिकी हमलों का खतरनाक पलटवार: जॉर्डन के एयरबेस बने ईरान का नया निशाना
मध्य एशिया में पिछले कुछ हफ्तों से हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और वाशिंगटन तथा तेहरान के बीच चल रहा यह शीत युद्ध अब सीधे तौर पर मिसाइलों और रॉकेटों की बारिश में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन द्वारा ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों और सैन्य ठिकानों पर हाल ही में किए गए घातक हमलों के जवाब में तेहरान की ओर से यह सबसे आक्रामक सैन्य कदम उठाया गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन की सीमा के भीतर स्थित अमेरिकी एयरबेसों पर एक साथ कई अत्याधुनिक और मारक मिसाइलें दागकर यह साफ संदेश दे दिया है कि वह अमेरिकी आक्रामकता का चुपचाप तमाशा नहीं देखेगा। जॉर्डन जैसे सामरिक रूप से बेहद अहम देश के अंदर अमेरिका के सैन्य ठिकानों को इस तरह सीधे तौर पर निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय सुरक्षा के सारे समीकरण पूरी तरह से बिगड़ गए हैं और इस पूरे इलाके में तनाव अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच चुका है।
धुआं-धुआं हुआ मिलिट्री बेस: मिसाइल हमलों से अमेरिका को हुआ भारी रणनीतिक नुकसान
तेहरान की तरफ से दागी गई इन घातक और अचूक मिसाइलों ने जॉर्डन में अमेरिकी वायु सेना के दोनों एयरबेसों के अंदर बने रक्षक कवच, हैंगर और लॉजिस्टिक सप्लाई डिपो को बुरी तरह तबाह कर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती खुफिया उपग्रह से मिली तस्वीरों के अनुसार, हमले के ठीक बाद पूरे मिलिट्री बेस परिसर में भीषण आग लग गई और कई किलोमीटर दूर तक आसमान में सिर्फ काला धुआं ही धुआं दिखाई दे रहा था। इस हमले में अमेरिकी सेना के कई आधुनिक सैन्य उपकरणों, ईंधन भंडारण टैंकों और कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचने की प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है। हालांकि अमेरिकी रक्षा सूत्रों ने अभी तक अपने सैनिकों के हताहत होने के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन जिस पैमाने पर यह मिसाइल हमला किया गया है, उससे यह स्पष्ट है कि अमेरिकी सैन्य ढांचे को इस बार बहुत गहरी और गंभीर चोट पहुंची है।
पश्चिम एशिया में क्यों भड़की यह नई आग? अमेरिका और ईरान के बीच का पुराना भू-राजनीतिक संघर्ष
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही यह खूनी तनातनी कोई नई नहीं है, बल्कि इसके पीछे दशकों पुराना भू-राजनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय वर्चस्व का इतिहास रहा है। पिछले कुछ महीनों में गाजा संकट, लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों और सीरिया-इराक में अमेरिकी सैनिकों पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के बाद से अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा था। वाशिंगटन ने हाल ही में ईरान समर्थित गुटों के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को और अधिक तेज कर दिया था, जिसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि तेहरान कभी भी कोई बड़ा और आक्रामक पलटवार कर सकता है। जॉर्डन के एयरबेसों पर हुआ यह ताजा हमला उसी बदले की रणनीति का एक बेहद खौफनाक और सीधा परिणाम है, जो यह साबित करता है कि ईरान अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को मध्य पूर्व में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
मिडिल ईस्ट की बदलती भू-राजनीति और क्षेत्रीय देशों की बढ़ती चिंताएं
जॉर्डन जैसे शांत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश की धरती पर इस प्रकार के भीषण मिसाइल हमले होने से पूरे अरब जगत और खाड़ी देशों में भारी खलबली मच गई है। जॉर्डन की सरकार और वहां की सेना के लिए यह स्थिति बेहद असहज करने वाली है क्योंकि अपनी संप्रभुता के बीच इस तरह के बाहरी देशों के युद्ध का मैदान बनना वहां की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और मिस्र जैसे अन्य क्षेत्रीय देश भी इस बढ़ते टकराव को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं और वे नहीं चाहते कि यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले ले। यदि अमेरिका इस हमले के जवाब में ईरान के मुख्य भूमि पर कोई बड़ा और प्रत्यक्ष सैन्य हमला करता है, तो इसका परिणाम न केवल तेल की कीमतों में बेकाबू उछाल के रूप में सामने आएगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी गहरे संकट में फंस जाएगी।
वैश्विक कूटनीति पर संकट के बादल: क्या इस महाविनाश को रोक पाएगा संयुक्त राष्ट्र?
इस घटना के बाद एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और वैश्विक शांति के तमाम मंचों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई प्रमुख देश अमेरिका और ईरान दोनों से ही अधिकतम संयम बरतने की लगातार अपील कर रहे हैं ताकि इस संघर्ष को एक पूर्णव्यापी और विनाशकारी युद्ध में बदलने से रोका जा सके। यूरोपीय संघ और अन्य प्रमुख वैश्विक ताकतें इस समय बैकचैनल कूटनीति के जरिए तनाव को कम करने की पुरजोर कोशिश में जुटी हुई हैं, ताकि किसी भी तरह से दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाया जा सके। हालांकि, वर्तमान जमीनी हालात को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा है कि दोनों में से कोई भी देश फिलहाल पीछे हटने को तैयार है, क्योंकि अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का रौब बनाए रखना चाहता है तो वहीं ईरान अपनी क्षेत्रीय साख बचाने के लिए हर हद पार करने को आमादा है।
निष्कर्ष: क्या अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ने वाला है एक पूर्ण और भयानक युद्ध?
जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेसों पर हुए इन घातक मिसाइल हमलों ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया का यह बारूद का ढेर अब किसी भी समय एक बहुत बड़े विस्फोट में बदल सकता है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान द्वारा उठाया गया यह आक्रामक कदम इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि तेहरान अब वाशिंगटन के हर सैन्य एक्शन का ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए पूरी तरह तैयार बैठा है। आने वाले कुछ दिन पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि अमेरिका इस सीधे हमले पर क्या और कितनी कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया देता है। यदि वाशिंगटन ने इस बार कोई बहुत बड़ा पलटवार किया, तो यह संघर्ष केवल जॉर्डन या खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरी दुनिया को अपनी आगोश में ले सकता है। वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए यह दौर आधुनिक इतिहास के सबसे संवेदनशील और खतरनाक दौर में से एक बन चुका है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी महाविनाश की आग भड़का सकती है।