सीरिया अमेरिकी टेरर लिस्ट से बाहर, दमिश्क ने ट्रंप सरकार के फैसले का किया स्वागत

सीरिया अमेरिकी टेरर लिस्ट से बाहर, दमिश्क ने ट्रंप सरकार के फैसले का किया स्वागत

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ लेते हुए अमेरिका (USA) ने सीरिया को अपनी ‘स्टेट स्पॉन्सर्स ऑफ टेररिज्म’ (आतंकवाद प्रायोजक देश) की सूची से आधिकारिक तौर पर बाहर कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के प्रशासन द्वारा उठाया गया यह ऐतिहासिक कदम सीरिया में बशर अल-असद के शासन के पतन और नई सरकार के गठन के बाद उठाया गया है। इस फैसले के बाद सीरियाई नेतृत्व ने वॉशिंगटन के इस कदम का दिल से स्वागत किया है, जिसे देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

करीब पांच दशकों बाद आतंकवाद की सूची से मिली मुक्ति

अमेरिका ने साल 1979 से सीरिया को आतंकवाद के प्रायोजक देशों की सूची में डाल रखा था। इस लंबी अवधि के दौरान सीरिया पर अनगिनत आर्थिक प्रतिबंध, वित्तीय लेनदेन की पाबंदियां और रक्षा निर्यात से जुड़े कड़े शिकंजे कसे रहे थे। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस की 45-दिवसीय समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस प्रतिबंध को औपचारिक रूप से हटा दिया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक निर्णय से सीरिया के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में दोबारा शामिल होने और प्राइवेट सेक्टर के निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।

एचटीएस (HTS) संगठन को भी मिली ग्लोबल टेररिस्ट लिस्ट से राहत

इस बड़े कूटनीतिक बदलाव के तहत ट्रंप प्रशासन ने केवल देश को ही नहीं, बल्कि सीरिया के सशस्त्र विरोधी गुट 'हयात तहरीर अल-शाम' (HTS) और उसके नेता अहमद अल-शरा (जो अब सीरिया के राष्ट्रपति हैं) को भी 'स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट' की सूची से हटा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट (US Treasury Department) ने भी इससे संबंधित प्रतिबंधों में राहत की घोषणा कर दी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नई सीरियाई सरकार ने बीते कुछ समय में आईएसआईएस (ISIS), अल-कायदा और ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ प्रभावी और ठोस कदम उठाए हैं, जिसके चलते यह बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है।

दमिश्क सरकार ने ट्रंप प्रशासन के फैसले को सराहा

अमेरिका के इस कदम के बाद सीरियाई राजधानी दमिश्क (Damascus) में खुशी की लहर दौड़ गई है। सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शाइबानी ने वॉशिंगटन के इस कदम को एक "ऐतिहासिक मील का पत्थर" करार दिया है। इसके साथ ही, सीरिया के वित्त मंत्री मोहम्मद बार्निए ने इसे सीरियाई कूटनीति की बड़ी जीत बताया है। दमिश्क का मानना है कि इस प्रतिबंध के हटने से देश के पुनर्निर्माण, आधुनिक तकनीकों के आयात और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में वापसी के द्वार खुलेंगे, जिससे युद्ध की विभीषिका झेल चुकी सीरियाई जनता को राहत मिलेगी।

वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस फैसले से पश्चिम एशिया (Middle East) की भू-राजनीति में समीकरण तेजी से बदलेंगे। क्यूबा, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे गिने-चुने देशों के बीच अब सीरिया का नाम इस सूची से हटना इस बात का संकेत है कि अमेरिका कूटनीतिक वार्ताओं और क्षेत्रीय स्थिरता के आधार पर अपने पुराने रुख में बदलाव कर रहा है। सीरियाई सेंट्रल बैंक ने भी इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए देश की वित्तीय प्रणाली को आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है, ताकि वैश्विक निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।