ऑपरेशन सिंदूर' का खौफ: भारतीय एजेंसियों के एक्शन से सहमी ISI ने बदला पैंतरा
भारतीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की अटूट चौकसी तथा आक्रामक रणनीतियों के चलते पड़ोसी मुल्क की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी ISI के पैरों तले जमीन खिसक गई है। पिछले कुछ समय से सीमा पार से चलाए जा रहे राष्ट्रविरोधी और आतंकवादी अभियानों पर भारतीय सेना द्वारा कसे गए शिकंजे के बाद अब पाकिस्तानी षड्यंत्रकारियों ने अपनी रणनीति में एक बड़ा और खतरनाक बदलाव किया है। प्राप्त खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' और अन्य सफल सुरक्षा अभियानों के खौफ से बुरी तरह सहमी ISI ने अब पारंपरिक और वांटेड आतंकवादियों की भर्ती करने के बजाय अपने देश के प्रशिक्षित पूर्व सैनिकों, रिटायर्ड कमांडोज़ और सैन्य अनुभव रखने वाले लोगों को गुप्त अभियानों में झोंकना शुरू कर दिया है। सीमा पार की इस बदली हुई चाल ने भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों को और अधिक सतर्क कर दिया है, क्योंकि पेशेवर सैन्य ट्रेनिंग प्राप्त ये लोग सामान्य आतंकवादियों की तुलना में अधिक शातिर तरीके से खुफिया वारदातों को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं। इस सामरिक बदलाव के बाद से भारत की तीनों सेनाओं, बीएसएफ और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने बॉर्डर इलाकों से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक अपनी निगरानी को कई गुना बढ़ा दिया है, ताकि दुश्मन की किसी भी नापाक साजिश को उसके शुरुआती चरण में ही नेस्तनाबूद किया जा सके।
'ऑपरेशन सिंदूर' की मार और ISI की रणनीतिक बौखलाहट
भारतीय सुरक्षा तंत्र द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कड़े और निर्णायक कदमों ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को लगातार पानी फेरने का काम किया है। इसी कड़ी में चर्चा में आए 'ऑपरेशन सिंदूर' ने सीमा पार बैठे आतंकवाद के आकाओं और ISI के शीर्ष अधिकारियों के मन में ऐसा खौफ पैदा कर दिया है कि उन्हें अपने पुराने तौर-तरीके पूरी तरह बदलने पड़े हैं। अब तक यह देखा जाता रहा है कि ISI विभिन्न आतंकी संगठनों के जरिए भारत में युवाओं को बरगलाकर घुसपैठ कराने या छिटपुट हिंसा फैलाने की कोशिश करती थी, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों के आधुनिक सर्विलांस सिस्टम, एंटी-इन्फिल्ट्रेशन ग्रिड और सटीक खुफिया ऑपरेशनों के कारण आतंकियों का टिक पाना नामुमकिन हो गया है। आए दिन सीमा सुरक्षा बलों और भारतीय सेना की कार्रवाई में मारे जाने वाले आतंकियों के चलते पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। अपनी इन्हीं विफलताओं को छिपाने और भारत के खिलाफ छद्म युद्ध को एक नए और खतरनाक स्तर पर ले जाने के लिए ISI अब पेशेवर सैन्य पृष्ठभूमि वाले लोगों का इस्तेमाल करने की जुगत में लग गई है, ताकि वे आधुनिक हथियारों और सामरिक तकनीकों का इस्तेमाल कर सुरक्षा बलों को गच्चा दे सकें।
आतंकियों की जगह पूर्व सैनिकों की भर्ती का खतरनाक खेल
खुफिया एजेंसियों के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारियों के अनुसार, ISI ने अपनी रणनीति बदलते हुए पाकिस्तान की सेना से रिटायर हो चुके या किन्हीं कारणों से सेवा से हटाए गए ऐसे पूर्व सैनिकों को अपने गुप्त नेटवर्क में शामिल करना शुरू कर दिया है, जिन्हें युद्ध लड़ने, हथियार चलाने और जासूसी करने का लंबा अनुभव प्राप्त है। पारंपरिक आतंकवादियों के पास अक्सर आधुनिक तकनीकी उपकरणों, என்க्रिप्टेड कम्युनिकेशंस और गुप्त सूचनाओं को छिपाने का पेशेवर ज्ञान नहीं होता है, जिसके चलते वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर बहुत जल्दी आ जाते हैं। इस कमजोरी से पार पाने के लिए ही अब पाकिस्तानी एजेंसी उन लोगों को पैसों और अन्य प्रलोभनों का लालच देकर भर्ती कर रही है जो सैन्य अनुशासन और हथियारों के रखरखाव से अच्छी तरह वाकिफ हैं। हालांकि, भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे मोर्चे पर कोई साधारण आतंकवादी हो या फिर कोई प्रशिक्षित पूर्व सैनिक, देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाले हर एक शख्स का हस्र एक ही होने वाला है। भारतीय खुफिया एजेंसियां ISI के इस नए पैंतरे से पूरी तरह वाकिफ हैं और दुश्मन के हर एक मूव का कड़ा और मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठी हैं।
भारतीय सुरक्षा बलों की पैनी नजर और अचूक सुरक्षा चक्र
पड़ोसी मुल्क द्वारा अपनाए गए इस नए और कुटिल पैंतरे के बाद भारत के रक्षा मंत्रालय, थल सेना, खुफिया ब्यूरो (IB) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) ने अपनी कार्ययोजना को और अधिक धार दे दी है। देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और संवेदनशील इलाकों में तैनात सुरक्षा कर्मियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे सीमा पार से होने वाली हर एक संदेहास्पद गतिविधि पर बारीक नजर रखें। आधुनिक ड्रोन सर्विलांस, सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) और ह्यूमन इंटेलिजेंस का तालमेल बिठाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यदि कोई भी पूर्व सैनिक या गुप्त एजेंट भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करे, तो उसे तुरंत ढेर कर दिया जाए। इसके अलावा, देश के भीतर भी सक्रिय स्लीपर सेल और संदिग्धों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है, ताकि आंतरिक सुरक्षा को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचाई जा सके। 'ऑपरेशन सिंदूर' के डर से ISI भले ही अपने पैंतरे बदलती रहे, लेकिन भारतीय जवानों के अदम्य साहस और सतर्कता के आगे दुश्मन की कोई भी चाल कामयाब नहीं हो सकती है, और देश की सुरक्षा सर्वोपरि है।