'ईद की पार्टियों में और खौफनाक हो जाता था दरिंदगी का खेल...', ब्रिटिश संसद में रो पड़े सांसद, सुनाया पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स की बर्बरता का काला सच
यूनाइटेड किंगडम (UK) की संसद में इस वक्त एक ऐसा भूचाल आया हुआ है जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। ब्रिटेन में दशकों से समानांतर सत्ता चला रहे बदनाम 'ग्रूमिंग गैंग्स' और 'रेप गैंग्स' का घिनौना चेहरा एक बार फिर आधिकारिक तौर पर देश के सर्वोच्च सदन में बेनकाब हुआ है। ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लो (Rupert Lowe) ने संसद के पटल पर उन अभागी और लाचार पीड़ित लड़कियों की रोंगटे खड़े कर देने वाली गवाहियां पढ़ीं, जिन्हें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स सन्न रह गया। सांसद लो ने बेहद आक्रामक और भावुक लहजे में अन्य सांसदों से अपील की कि वे अब इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक बहस करना बंद करें और इन मासूमों को न्याय दिलाने के लिए सीधे कड़े कानून बनाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "हमारी स्वतंत्र रेप गैंग जांच रिपोर्ट आने वाले दिनों में सार्वजनिक की जाएगी, जो पूरे ब्रिटेन के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को हमेशा के लिए बदलकर रख देगी।"
13 साल की बच्ची और 700 बलात्कारी: रूह कंपा देगी मजहबी नफरत और वहशीपन की ये दास्तां
सांसद रूपर्ट लो द्वारा सदन में पेश किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में व्यवस्थागत यौन शोषण, हिंसा, ब्लैकमेलिंग और पीड़ितों को डराने-धमकाने के ऐसे विवरण हैं जो अमानवीयता की सारी हदें पार करते हैं। लो ने एक पीड़िता का बयान पढ़ा, जिसने बताया कि जब वह महज 12-13 साल की एक अबोध बच्ची थी, तब उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) करने के बाद दरिंदों ने एक खाली कांच की बोतल को उसके प्राइवेट पार्ट के अंदर जबरन ठूस दिया, जिससे वह कांच अंदर ही टूट गया। एक अन्य पीड़िता ने रोते हुए अपनी गवाही में लिखा, "यह नरक तब शुरू हुआ जब मैं 13 साल की थी। महज 3 सालों के भीतर लगभग 600 से 700 अलग-अलग पुरुषों द्वारा मेरा बेरहमी से बलात्कार किया गया।" पीड़िताओं ने यह भी संगीन आरोप लगाया कि ये अपराधी उनके ईसाई धर्म का सरेआम मजाक उड़ाते थे। आरोपी कहते थे कि श्वेत और ईसाई लड़कियों की समाज में कोई नैतिक वैल्यू नहीं होती। प्रताड़ना के दौरान लड़कियों के गले से धार्मिक क्रॉस (लॉकेट) छीनकर उनसे पूछा जाता था कि 'अब तुम्हारा भगवान कहां है? क्या उसने तुम्हें हमारे हवाले छोड़ दिया?'
'ईद की छुट्टियों में स सजती थीं हिंसक महफिलें...' पिंजरों में बंद की जाती थीं लड़कियां
संसद में पेश बयानों में एक बेहद चौंकाने वाला और घिनौना खुलासा यह हुआ कि ईद और अन्य त्योहारों की छुट्टियों के दौरान ये तथाकथित पार्टियां और ज्यादा बड़ी, हिंसक तथा बदतर हो जाती थीं। इन खास पार्टियों में बाहर से कई और छोटी लड़कियों को किडनैप कर या बहला-फुसलाकर शामिल किया जाता था। एक गवाही में पीड़ित महिला ने बताया कि कुछ लड़कियों को तो बाकायदा लोहे के पिंजरों में बंद करके रखा जाता था और उन पर हिंसक जानवरों के जरिए जानलेवा प्रताड़ना दी जाती थी। दरिंदे उन मासूमों के जिस्म पर सट्टे (शर्तें) लगाते थे और पूरी हैवानियत के बकायदा वीडियो बनाकर उसे डार्क वेब पर बेचते थे।
रक्षक ही बने भक्षक! पीड़िताओं का आरोप— 'जांच के नाम पर पुलिस अधिकारियों ने भी किया मेरा रेप'
सांसद लो द्वारा पेश की गई गवाहियों ने ब्रिटेन की सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य कर्मियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक पीड़िता ने सिस्टम पर सबसे बड़ा बम फोड़ते हुए दावा किया, "शोषण के इस लंबे और भयानक दौर में जब मैं मदद मांगने पुलिस के पास गई, तो देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने भी मेरे साथ बार-बार बलात्कार किया।" एक अन्य पीड़िता ने बताया कि जब वह 15 वर्ष की थी और गंभीर रूप से घायल व लहूलुहान हालत में अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंची, तो उसने खौफ के मारे डॉक्टरों से झूठ कह दिया कि उसकी ड्रिंक में किसी ने कुछ मिला दिया था। डॉक्टरों ने सच जानने के लिए उससे कोई क्रॉस-क्वेश्चन नहीं किया, बस पेनकिलर दवाइयां देकर उसे तुरंत डिस्चार्ज कर दिया ताकि वे किसी कानूनी लफड़े में न पड़ें।
क्या हैं ब्रिटेन के बदनाम 'ग्रूमिंग गैंग्स' और क्या है इनका 'पाकिस्तानी कनेक्शन'?
आपको बता दें कि ब्रिटेन में 'ग्रूमिंग गैंग्स' शब्द का इस्तेमाल उन संगठित आपराधिक नेटवर्कों के लिए किया जाता है जहां समाज के कमजोर, अनाथ या गरीब पृष्ठभूमि के बच्चों और किशोरों, विशेष रूप से 11 से 16 वर्ष की लड़कियों को टारगेट किया जाता है। इन्हें पहले नशीली दवाएं, महंगे गिफ्ट्स या शराब देकर जाल में फंसाया जाता है और फिर डरा-धमकाकर लंबे समय तक कई लोगों द्वारा सामूहिक यौन शोषण का शिकार बनाया जाता है। यह मुद्दा सबसे पहले साल 2002 में तब सुर्खियों में आया था जब तत्कालीन लेबर सांसद एन क्रायर ने इस संबंध में संसद को आगाह किया था। इसके बाद रोशडेल, रदरहैम, ओल्डहैम, टेलफोर्ड और ऑक्सफोर्ड जैसे कई ब्रिटिश शहरों में ऐसे संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ। सांसद रूपर्ट लो की निजी जांच रिपोर्ट के अनुसार, यूके के कम से कम 85 इलाकों में इस तरह के गैंग-आधारित बाल यौन शोषण की पुख्ता पहचान की गई है। सरकारी जांचों में यह कड़वा सच सामने आया है कि इन रेप गैंग्स में शामिल अधिकांश पुरुष मुख्य रूप से ब्रिटिश-पाकिस्तानी मूल के हैं, जो दशकों से सक्रिय थे और वोट बैंक व प्रशासनिक लापरवाही के कारण बचते रहे।