बांग्लादेश में 40 साल की सबसे भीषण आर्थिक मंदी

बांग्लादेश में 40 साल की सबसे भीषण आर्थिक मंदी

पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय इतिहास के सबसे गंभीर और डरावने दौर से गुजर रहा है, जहां पिछले चार दशकों यानी करीब 40 सालों में देश की अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी मंदी की चपेट में आ चुकी है। हालात इतने ज्यादा बिगड़ चुके हैं कि देश के प्रमुख औद्योगिक hubs जैसे ढाका और गाजीपुर में लगभग 500 से अधिक गारमेंट और औद्योगिक फैक्ट्रियों पर अनिश्चितकालीन ताले लटक चुके हैं। इस भारी आर्थिक बदहाली और बेरोजगारी के कारण लाखों मजदूरों का सब्र टूट चुका है, जो सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं और चारों तरफ भारी बवाल मचा हुआ है। इस बीच देश की बागडोर संभाल रहे प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नीतियां और प्रशासनिक अमला इस संकट से निपटने में पूरी तरह नाकाम साबित होता नजर आ रहा है, जिससे आम जनता से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था पर मंडराया 40 साल का सबसे बड़ा मंदी का साया

बांग्लादेश की रीढ़ कहे जाने वाले वस्त्र और निर्यात उद्योग में जिस तरह का भूचाल आया है, उसने देश की वित्तीय स्थिरता को हिलाकर रख दिया है। पिछले कुछ महीनों से महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार से घटते ऑर्डर के कारण देश पिछले 4 दशक की सबसे बदतर आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही हाल रहा तो देश की जीडीपी ग्रोथ रेट रसातल में चली जाएगी और भुखमरी व बेकारी के हालात बेकाबू हो जाएंगे। सरकार तमाम दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर आर्थिक पहिए थम चुके हैं और वित्तीय संकट ने पूरे देश को अपनी आगोश में ले लिया है, जिससे निवेशकों का भरोसा पूरी तरह से उठ चुका है।

500 से ज्यादा फैक्ट्रियों पर लगे ताले, कामगारों की रोजी-रोटी पर संकट

आर्थिक बदहाली का सबसे बड़ा असर देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा है, जहां एक के बाद एक लगभग 529 गारमेंट फैक्ट्रियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करना पड़ गया है। इन कारखानों के बंद होने से करीब 10 लाख के आसपास श्रमिक सीधे तौर पर बेरोजगार हो गए हैं, जिनके सामने अपने परिवार का भरण-पोषण करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों (International Buyers) द्वारा समय पर शिपमेंट न मिलने के डर से ऑर्डर रद्द किए जा रहे हैं, जिसके चलते मिल मालिकों और कारोबारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कारखानों के शटर गिरने से पूरा इंडस्ट्रियल जोन वीरान हो गया है और फैक्ट्रियों के बाहर मालिकों के खिलाफ सन्नाटा पसरा हुआ है।

मजदूरों का फूटा गुस्सा, सड़कों पर उग्र प्रदर्शन और हिंसा

फैक्ट्रियों के बंद होने और न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर मजदूरों का गुस्सा इस कदर भड़का है कि ढाका और उसके आसपास के औद्योगिक इलाकों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। नाराज मजदूर न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 30,000 टका प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं, जो मौजूदा वेतन से दोगुने से भी ज्यादा है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई जगहों पर तीखी झड़पें हुई हैं, पुलिस की गाड़ियों और चौकियों को आग के हवाले कर दिया गया है। हालात को नियंत्रित करने के लिए मजबूरन देश की सीमा सुरक्षा बल (BGB) और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात करना पड़ा है, जिससे पूरे देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं।

प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नीतियां विफल, उठ रहे इस्तीफे की मांग के स्वर

इस अभूतपूर्व राष्ट्रीय संकट के बीच देश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रशासनिक अक्षमता खुलकर सामने आ रही है। हालांकि सरकार ने बढ़ते विरोध को देखते हुए एक नया वेतन समीक्षा बोर्ड (Wage Review Board) गठित करने की औपचारिकता पूरी की है, लेकिन श्रमिक संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों का साफ कहना है कि यह कदम बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया है। आलोचकों का आरोप है कि तारिक रहमान सरकार देश के उद्योगों को बचाने और महंगाई पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल रही है। विपक्षी दल और आम जनता अब सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की विफलता को रेखांकित कर रहे हैं, क्योंकि देश की अर्थव्यवथा को पटरी पर लाने के उनके सभी दावे कागजी साबित हुए हैं।

भविष्य की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर प्रभाव

इस संकट का असर केवल बांग्लादेश की घरेलू सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक होने के नाते, बांग्लादेश में उत्पादन ठप होने से वैश्विक ब्रांड्स को अपने कपड़ों की आपूर्ति के लिए दूसरे देशों का रुख करना पड़ रहा है। यदि आने वाले कुछ दिनों में सरकार ने मजदूरों और उद्योगपतियों के बीच कोई ठोस समझौता नहीं कराया, तो बांग्लादेश का निर्यात बाजार हमेशा के लिए तबाह हो सकता है। फिलहाल देश की जनता भय और अनिश्चितता के साए में जीने को मजबूर है, और हर तरफ बस यही चर्चा है कि क्या तारिक रहमान इस गहरे भंवर से देश को बाहर निकाल पाएंगे या फिर बांग्लादेश का यह आर्थिक पतन पूर्ण विनाश का रूप ले लेगा।