ट्रंप का नया टैरिफ बम: विदेशी ड्रोनों और पुर्जों पर ठोका 100% टैक्स, अमेरिकी बाजार में मची खलबली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक व्यापारिक रुख से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस बार व्हाइट हाउस ने राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने का हवाला देते हुए विदेशी ड्रोनों और उनके महत्वपूर्ण उपकरणों के आयात पर भारी-भरकम 100% तक का टैरिफ लगाने का बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप प्रशासन का कतई साफ कहना है कि अमेरिका अब रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में विदेशी स्रोतों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो चुका है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस नए फरमान के बाद अमेरिकी बाजार में बाहर से आने वाले ड्रोन सीधे दोगुने दाम पर बिकेंगे, जिससे वैश्विक ड्रोन निर्माताओं और टेक कंपनियों में भारी हड़कंप मच गया है।
व्हाइट हाउस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह नया टैक्स कानून कुछ ही हफ्तों (करीब 21 दिनों) के भीतर प्रभावी हो जाएगा, जबकि कुछ खास और कम संवेदनशील उपकरणों के लिए 180 दिनों की मोहलत दी गई है। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी धरती पर ही ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देना और चीन समेत अन्य देशों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना है। हालांकि, इस नीति के दायरे में केवल एशियाई देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका के कई पारंपरिक सहयोगी देश भी आएंगे, जिन पर अलग-अलग स्लैब के तहत टैक्स लगाया गया है।
सहयोगियों पर भी गिरेगी गाज और अलग-अलग टैक्स स्लैब
ट्रंप प्रशासन के इस नए ट्रेड फरमान के तहत मित्र देशों पर भी शिकंजा कसा गया है। यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान जैसे प्रमुख देशों से अमेरिका आने वाले ड्रोनों और उनके कलपुर्जों पर 15% का शुल्क तय किया गया है, जबकि ब्रिटेन से आने वाले ड्रोनों पर 10% का टैरिफ लगाया जाएगा। पेंटागन और अमेरिकी वाणिज्य विभाग का मानना है कि वर्तमान ग्लोबल सप्लाई चेन में कई ऐसी विदेशी संस्थाएं सक्रिय हैं जो अमेरिकी सुरक्षा और गोपनीयता के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह टैक्स वसूलने का एक बेहद अनोखा और सख्त तरीका है, जिसके जरिए अमेरिका अप्रत्यक्ष रूप से अपने घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को मजबूत करना चाहता है। अमेरिका की इस आक्रामक टैरिफ नीति से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और आने वाले दिनों में अन्य देश भी इसके जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।
वैश्विक बाजार और टेक इंडस्ट्री पर पड़ेगा गहरा असर
डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से ग्लोबल ड्रोन इंडस्ट्री में भूचाल आ गया है। पिछले कुछ वर्षों में कमर्शियल, कृषि और सामरिक निगरानी के क्षेत्र में विदेशी ड्रोनों की मांग अमेरिकी बाजार में तेजी से बढ़ी थी। लेकिन 100% तक के इस भारी-भरकम आयात शुल्क के लगने से अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों को अब ड्रोन खरीदने के लिए कई गुना अधिक कीमत चुकानी होगी।
घरेलू स्तर पर अमेरिकी ड्रोन स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों के लिए तो यह एक बड़ा अवसर माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें विदेशी प्रतिस्पर्धा का सामना कम दामों पर नहीं करना पड़ेगा। इसके बावजूद, जानकारों का मानना है कि रातों-रात स्थानीय स्तर पर वैश्विक मांग के बराबर उच्च गुणवत्ता वाले ड्रोन और उनके पुर्जे तैयार करना आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर, ट्रंप का यह नया फरमान वैश्विक व्यापार युद्ध को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले आया है।