मिलिट्री से हरा नहीं सका तो अब आर्थिक प्रतिबंधों का सहारा, US बोला- काट देंगे ईरान की वित्तीय जीवन रेखा; तेहरान का पलटवार

मिलिट्री से हरा नहीं सका तो अब आर्थिक प्रतिबंधों का सहारा, US बोला- काट देंगे ईरान की वित्तीय जीवन रेखा; तेहरान का पलटवार

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और पश्चिम एशिया के मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सैन्य मोर्चे पर अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद अब अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ ‘आर्थिक युद्ध’ का आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए अब तक के सबसे कड़े वित्तीय प्रतिबंधों का ऐलान किया है। वॉशिंगटन का साफ कहना है कि वह ईरान की हर उस वित्तीय जीवन रेखा को काट देगा, जिससे इस शासन को ऑक्सीजन मिलती है। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने भी इन धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए कड़ा पलटवार किया है।

'इकोनॉमिक डी-डे' और अमेरिकी वित्त मंत्री का कड़ा ऐलान

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक हमले की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए इसे "आर्थिक घुटन" (Economic Asphyxiation) करार दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने इसे 'इकोनॉमिक डी-डे' का नाम दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो देश या वित्तीय संस्थान ईरान के साथ अपने कारोबारी रिश्ते खत्म नहीं करेंगे, उन्हें भी वैश्विक वित्तीय प्रणाली और अमेरिकी डॉलर तंत्र से बाहर कर दिया जाएगा। अमेरिका ने मुख्य रूप से ईरान के पांच प्रमुख क्षेत्रों—डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, गोल्ड (सोना), एविएशन और शिपिंग को अपनी नई प्रतिबंध सूची के दायरे में खड़ा किया है।

रणनीतिक क्षेत्रों और वैश्विक नेटवर्क पर शिकंजा

वॉशिंगटन का यह नया चक्र सिर्फ ईरान के भीतर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में वे तमाम अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क, शेल कंपनियां और विदेशी बैंक भी आ गए हैं जो तेहरान के तेल निर्यात और वित्तीय लेनदेन में मदद करते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि सैन्य संघर्षों और क्षेत्रीय गतिरोध के बीच ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए इन गुप्त रास्तों का इस्तेमाल कर रहा था। अमेरिका ने दुनिया भर के देशों को साफ संदेश दे दिया है कि यदि कोई भी देश ईरान को आर्थिक मदद या व्यापारिक समर्थन जारी रखता है, तो उसे अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

तेहरान का तीखा पलटवार और होर्मुज जलडमरूमध्य की जंग

अमेरिका की इन धमकियों और आर्थिक घेराबंदी के बाद ईरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी नेतृत्व और वहां के नीति निर्माताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिका के यह 'हताशा भरे' कदम पूरी तरह नाकाम साबित होंगे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश दशकों से पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना करता आ रहा है, इसलिए इस प्रकार के नए दबाव उनकी नीतियों को नहीं बदल सकते। इसके साथ ही, ईरान ने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी अपनी पकड़ और सख्त कर दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की सप्लाई पर बड़ा संकट मंडराने लगा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा यह नया आर्थिक संघर्ष पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका ईरान को पूरी तरह अलग-थलग करने की कोशिश में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ इससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति, क्रूड ऑयल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गहरा असर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका की यह आर्थिक चाबुक ईरान को झुकाने में कामयाब होती है या फिर तेहरान इन पाबंदियों को धेंगा दिखाते हुए नए रास्तों से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाए रखता है।