अमेरिकी राष्ट्रपति का मेलोनी पर नया तीखा हमला, बोले— 'लोकप्रियता के लिए अब दोबारा दोस्त नहीं बन सकते, नो थैंक्स'

अमेरिकी राष्ट्रपति का मेलोनी पर नया तीखा हमला, बोले— 'लोकप्रियता के लिए अब दोबारा दोस्त नहीं बन सकते, नो थैंक्स'

फ्रांस में आयोजित हुए हाई-प्रोफाइल जी-7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) के खत्म होने के बाद भी वैश्विक नेताओं के बीच की राजनीतिक रार थमने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच शुरू हुआ जुबानी जंग अब एक बेहद गंभीर और व्यक्तिगत स्तर पर पहुंच चुका है। ट्रंप ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर मेलोनी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दावा किया है कि मेलोनी अपनी गिरती राजनीतिक लोकप्रियता को बचाने के लिए अब उनसे दोबारा दोस्ती करना चाहती हैं, लेकिन ट्रंप ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

फ्रांस की जी-7 समिट से शुरू हुआ था 'पिक्चर विवाद'

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय विवाद की पृष्ठभूमि फ्रांस में आयोजित जी-7 समिट के दौरान तैयार हुई थी, जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दुनिया के कई दिग्गज नेता जुटे थे। समिट के समापन के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ एक फ्रेम में फोटो खिंचवाने के लिए बकायदा मिन्नतें की थीं। ट्रंप के इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार, 19 जून को सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक वीडियो संदेश जारी कर ट्रंप के दावों को झूठा बताया था। मेलोनी ने बेहद कड़े लहजे में कहा था— "न तो मैंने और न ही इटली ने अपने इतिहास में कभी किसी के सामने भीख मांगी है।"

ट्रंप का ट्रुथ सोशल पर पलटवार: 'मेलोनी ने बार-बार फोटो के लिए की थी गुजारिश'

मेलोनी के वीडियो वार के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक लंबी पोस्ट लिखकर मेलोनी के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। ट्रंप ने लिखा— "फ्रांस में हुई जी-7 बैठक के दौरान यह एक कड़वा सच है कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बार-बार मेरे साथ तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की थी, जिससे मैंने इनकार कर दिया था।" ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने मेलोनी की घरेलू राजनीति पर भी निशाना साधा।

ईरान नीति और नाटो पर घेरा: 'सुरक्षा हम दें और इटली हमें रनवे तक न दे'

ट्रंप ने मेलोनी पर इटली में गिरती लोकप्रियता का आरोप लगाते हुए इसके पीछे की वैश्विक वजहें भी गिनाईं। ट्रंप ने लिखा— "इटली में मेलोनी की लोकप्रियता का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है, शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि जब ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए कड़े अमेरिकी कदम की बात आई, तो उन्होंने वाशिंगटन का साथ देने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, नाटो (NATO) के अन्य देशों ने भी ऐसा ही डरपोक रवैया दिखाया था।"

अमेरिकी राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा— "मेलोनी सरकार ने संकट के समय अमेरिकी सेना को इटली के लैंडिंग स्ट्रिप्स या हवाई रनवे का इस्तेमाल तक नहीं करने दिया। इसके कारण हमारे सामने बहुत बड़ी लॉजिस्टिकल दिक्कत खड़ी हो गई थी। यह बर्ताव तब है जब अमेरिका इटली और दूसरे तथाकथित नाटो सहयोगियों की वैश्विक सुरक्षा के लिए हर साल अपनी जेब से अरबों डॉलर खर्च करता है।"

'अब अमेरिका ने ईरान को हरा दिया, तो मेलोनी को याद आई दोस्ती'

अपनी पोस्ट के आखिरी हिस्से में ट्रंप ने बेहद तीखा और कूटनीतिक रूप से आक्रामक रुख अपनाते हुए मेलोनी के दोस्ती के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ट्रंप ने लिखा— "अब, जब अमेरिका ने अपने दम पर ईरान को सैन्य रूप से पूरी तरह बैकफुट पर ला दिया है और उसे हरा दिया है, तो जॉर्जिया मेलोनी दुनिया के सामने अपनी राजनीतिक साख और लोकप्रियता बढ़ाने के लिए मुझसे फिर से दोस्ती की पींगें बढ़ाना चाहती हैं। लेकिन मेरा जवाब साफ है— नहीं, बहुत-बहुत शुक्रिया (No, Thank You)!" ट्रंप और मेलोनी के बीच बढ़े इस तनाव ने अमेरिका और इटली के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ नाटो गठबंधन के भीतर की आंतरिक दरारों को भी वैश्विक मंच पर उजागर कर दिया है।