ईरान के बढ़ते तनाव के बीच इराक से अमेरिकी सेना की विदाई

ईरान के बढ़ते तनाव के बीच इराक से अमेरिकी सेना की विदाई

मध्य पूर्व (Middle East) में एक बार फिर से भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और अमेरिकी सैन्य ताकत को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और आसन्न संघर्ष के बीच वाशिंगटन ने इराक से अपनी फौज को पूरी तरह से समेटने का फैसला कर लिया है। आज इराक में अमेरिकी सेना का आखिरी और सबसे सुरक्षित माना जाने वाला सैन्य ठिकाना भी पूरी तरह से खाली हो रहा है। जानकारों का मानना है कि इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बाद अब तेहरान यानी ईरान के लिए रणनीतिक रूप से एक खुला मैदान मिल गया है, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव कमजोर होगा और क्षेत्रीय ताकतों के बीच एक नया पावर गेम शुरू होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और अमेरिका तथा ईरान के बीच किसी भी वक्त बड़े सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है। इन तमाम भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने इराक की धरती से अपने सैनिकों की पूर्ण वापसी की प्रक्रिया को लगभग पूरा कर लिया है। कई वर्षों तक इराक में आतंकवाद के खिलाफ और रणनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए तैनात रहे अमेरिकी सैनिक अब अपने देश वापस लौट रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम केवल एक सामान्य सैन्य फेरबदल नहीं है, बल्कि यह पश्चिम एशिया में अमेरिका की विदेश नीति और रक्षा रणनीति में आए एक बहुत बड़े बदलाव का स्पष्ट संकेत देता है, जहां पेंटागन अब सीधे बड़े पैमाने पर जमीनी युद्ध में उलझने से बचना चाहता है।

इराक से अमेरिकी सेना के इस तरह अचानक पीछे हटने के पीछे कई बड़े भू-राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में इराकी मिलिशिया संगठनों और ईरान समर्थित प्रॉक्सी समूहों द्वारा लगातार अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जा रहा था, जिससे अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी। इसके अलावा, इराक सरकार की ओर से भी लगातार विदेशी सेनाओं की मौजूदगी पर सवाल उठाए जा रहे थे और देश की संप्रभुता का हवाला देकर अमेरिकी फौज की वापसी का दबाव बनाया जा रहा था। इन तमाम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबावों के चलते आखिरकार अमेरिका को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं और आज वह अपने आखिरी सैन्य ठिकाने को भी आधिकारिक तौर पर अलविदा कह रहा है।

अमेरिका के इस फैसले से ईरान को रणनीतिक रूप से एक बहुत बड़ा फायदा मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। तेहरान लंबे समय से यह मांग करता रहा है कि पश्चिम एशिया से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह से छुट्टी होनी चाहिए। अब जबकि इराक से अमेरिकी सेना का सफाया हो रहा है, तो माना जा रहा है कि पड़ोसी देश ईरान के लिए क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति में दखल देने के लिए एक खुला मैदान तैयार हो गया है। इराक के राजनीतिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि अमेरिकी सैनिकों की गैर-मौजूदगी का फायदा उठाकर शिया बहुल देश ईरान का प्रभाव इस क्षेत्र में और अधिक मजबूत हो सकता है, जिससे इजरायल और खाड़ी के अन्य देशों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

अमेरिकी सेना के जाने के बाद इराक के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी नए सवाल खड़े होने लगे हैं। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि हालांकि अमेरिकी सेना के हटने से इराक को अपनी आंतरिक संप्रभुता का अहसास होगा, लेकिन इसके साथ ही इस्लामिक स्टेट (ISIS) जैसे आतंकी संगठनों के फिर से सिर उठाने का खतरा भी पैदा हो सकता है। इराकी सेना के सामने अब अपने देश की सीमाओं की सुरक्षा और आंतरिक शांति बनाए रखने की एक बहुत बड़ी चुनौती होगी। दूसरी ओर, ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस रस्साकशी का असर आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिस पर वैश्विक निवेशकों और सुपरपावर देशों की पैनी नजर बनी हुई है।