प्लेन के अंदर जब अचानक बिगड़ जाते हैं हालात,1 साल पहले पायलट ने बताई थी सच्चाई
आसमान की असीम ऊंचाइयों पर जब कोई विशालकाय विमान सैकड़ों यात्रियों को लेकर बादलों के बीच से गुजर रहा होता है, तब वह सफर जितना रोमांचक और सुहाना दिखाई देता है, उसके पीछे कॉकपिट में बैठे पायलटों और क्रू मेंबर्स की कड़ी मेहनत, अटूट अनुशासन और असाधारण जिम्मेदारी छिपी होती है। आम तौर पर जब यात्री अपनी सीट पर बैठकर यात्रा का आनंद ले रहे होते हैं, तो वे यह कभी नहीं सोचते कि यदि अचानक हवा में कोई गंभीर तकनीकी खराबी आ जाए, इंजन फेल हो जाए या कोई आपातकालीन संकट पैदा हो जाए, तो उन्हें बचाने के लिए कौन आगे आएगा। आज से ठीक एक साल पहले भारतीय वायुसेना और कमर्शियल विमानन जगत के एक बेहद अनुभवी और जांबाज भारतीय पायलट ने सार्वजनिक रूप से इस बात का खुलासा किया था कि संकट के उन क्षणों में यात्रियों की ढाल बनकर केवल कॉकपिट में बैठा पायलट ही खड़ा होता है। जब विमान के भीतर हालात तेजी से खराब होने लगते हैं और जमीन पर मौजूद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूटने की कगार पर आ जाता है, तब एक पायलट का सेकडों में लिया गया फैसला ही विमान और उसमें सवार हर एक इंसान की जिंदगी बचाता है। विमानन सुरक्षा और उड़ान के दौरान आने वाली आपातकालीन परिस्थितियों के पीछे के इन अनकहे सच को जानना हर उस यात्री के लिए बेहद जरूरी और आंखें खोल देने वाला अनुभव है जो अक्सर हवाई यात्रा करता है।
क्या होती है कॉकपिट के अंदर की वह असल सच्चाई जब अचानक आ जाती है कोई बड़ी तकनीकी या मानवीय आपातकालीन स्थिति
हवाई जहाज उड़ाना केवल एक तकनीकी काम नहीं है बल्कि यह हर सेकंड लिए जाने वाले मानसिक फैसलों, धैर्य और अदम्य साहस का एक ऐसा इम्तिहान है जिसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती है। उड़ान के दौरान जब मौसम अचानक बेहद खराब हो जाता है, टर्बुलेंस के कारण विमान हिलने लगता है या विमान के किसी मुख्य यंत्र में कोई खतरनाक खराबी आ जाती है, तब केबिन में बैठे यात्रियों के बीच डर का माहौल बनना स्वाभाविक होता है। उस बेहद तनावपूर्ण और खौफनाक घड़ी में केबिन क्रू यात्रियों को शांत रखने की कोशिश करता है, जबकि कॉकपिट के अंदर पायलट अपनी पूरी ट्रेनिंग और सूझबूझ का इस्तेमाल करके विमान को सुरक्षित रास्ते पर लाने के लिए संघर्ष कर रहा होता है। एक साल पहले उस भारतीय पायलट ने अपने अनुभव साझा करते हुए यह बताया था कि कैसे संकट के समय पायलट अपनी जान की परवाह न करते हुए सबसे पहले विमान और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। यही कारण है कि विमानन दुनिया में पायलट को किसी भी उड़ान का असली रक्षक और नायक माना जाता है जो हर विपरीत परिस्थिति का सामना करके मुसाफिरों को उनकी मंजिल तक सुरक्षित पहुंचाता है।
ट्रांसपोंडर कोड और इमरजेंसी प्रोटोकॉल की वह तकनीकी ताकत जिसके जरिए जमीन पर मिलती है तुरंत मदद
जब आसमान में विमान के भीतर हालात खराब होते हैं, तो पायलट केवल अपनी बुद्धि पर ही निर्भर नहीं रहता बल्कि विमान में लगे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी प्रोटोकॉल का सहारा लेता है। आपातकाल के समय पायलट ट्रांसपोंडर में विशेष स्क्वाक कोड जैसे 7700 या 7500 फीड कर देता है, जिससे जमीन पर बैठे एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सेकंडों में यह चेतावनी मिल जाती है कि विमान गंभीर संकट में है। इसके अलावा, कॉकपिट के अंदर आपातकालीन लैंडिंग के लिए तयशुदा चेकलिस्ट का पालन किया जाता है ताकि इंजन की विफलता, आग लगने या किसी चिकित्सा आपातकाल से तुरंत निपटा जा सके। उस भारतीय पायलट ने अपने खुलासे में इस बात पर भी जोर दिया था कि आधुनिक विमानों में जितनी भी तकनीक विकसित हो जाए, लेकिन अंत में उस मशीन को सुरक्षित जमीन पर उतारने का जिम्मा एक इंसान यानी पायलट के हाथों में ही होता है। यही वजह है कि पायलटों का प्रशिक्षण दुनिया का सबसे कठिन और कड़ा प्रशिक्षण माना जाता है ताकि वे आसमान के बीच आने वाली किसी भी अनहोनी का डटकर मुकाबला कर सकें।
आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे और सुरक्षित हो चुकी है आज की कमर्शियल उड़ानें
आज का यह आधुनिक दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल रडार, ऑटोपायलट सिस्टम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का दौर बन चुका है जहां हर एक उड़ान पर जमीन और आसमान दोनों तरफ से पैनी नजर रखी जाती है। आधुनिक विमानों में ऐसे कई स्वचालित सुरक्षा कवच और सेंसर लगे होते हैं जो किसी भी संभावित खतरे को होने से पहले ही भांप लेते हैं और पायलट को समय रहते चेतावनी दे देते हैं। एक साल पहले दिए गए उस प्रेरणादायक बयान और आज की उन्नत तकनीकों की तुलना करें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि विमानन सुरक्षा अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और पारदर्शी हो चुकी है। जब आज के युवा और यात्री इंटरनेट या विभिन्न सर्च इंजन के जरिए फ्लाइट सेफ्टी से जुड़ी जानकारियों को खंगालते हैं, तो उन्हें यह अहसास होता है कि आसमान की ऊंचाइयों पर सफर करना दुनिया के सबसे सुरक्षित परिवहन माध्यमों में क्यों गिना जाता है। तकनीक चाहे कितनी भी आगे बढ़ जाए, लेकिन संकट के समय एक प्रशिक्षित पायलट का साहस और सूझबूझ ही सबसे बड़ा हथियार साबित होता है, जो हर यात्री के विश्वास को हमेशा अटूट बनाए रखता है।