क्या रसातल में पहुंची अप्रूवल रेटिंग और रिकॉर्ड महंगाई डोनाल्ड ट्रंप की नैया डुबो देगी
अमरीका में आगामी मिडटर्म इलेक्शन (US Midterm Elections 2026) का बिगुल बज चुका है और व्हाइट हाउस में बैठे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक राहें बेहद कठिन नजर आ रही हैं। हाल ही में सामने आए वॉशिंगटन पोस्ट, एबीसी न्यूज और रायटर्स/इप्सोस के राष्ट्रीय सर्वेक्षणों ने ट्रंप प्रशासन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमरीकी जनता के बीच राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर महज 33 से 34 प्रतिशत के अब तक के सबसे निचले स्तर (Record Low Approval Rating) पर पहुंच गई है। दो तिहाई से अधिक नागरिक उनके कामकाज और नीतियों से नाखुश हैं। संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए रिपब्लिकन पार्टी अब तक 400 मिलियन डॉलर से अधिक का चुनावी बजट झोंक चुकी है, लेकिन जमीनी धरातल पर मतदाताओं में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है।
चरम पर महंगाई और जीवन यापन की लागत: ट्रम्प का सबसे कमजोर मोर्चा
अमरीकी मतदाताओं के लिए इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी महंगाई और 'कॉस्ट ऑफ लिविंग' (Cost of Living Crisis) बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों और सर्वे के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत पंजीकृत मतदाता यह मानते हैं कि अर्थव्यवस्था और बढ़ती कीमतें चुनाव में उनके मतदान का मुख्य आधार होंगी। अमरीका में खाद्य पदार्थों, घरों के किराए और दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। अमरीकी जनता का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ और व्यापार नीतियों के नाम पर जो फैसले लिए, उनसे महंगाई घटने के बजाय और अधिक बेकाबू हो गई। लगभग 78 प्रतिशत अमरीकी ट्रंप की आर्थिक नीतियों और महंगाई से निपटने के तरीकों से बेहद निराश हैं। यहां तक कि रिपब्लिकन पार्टी के अपने पारंपरिक 'मागा' (MAGA) समर्थकों के बीच भी आर्थिक तंगी को लेकर असंतोष गहराने लगा है।
विदेश नीति और खींचता युद्ध: मध्य पूर्व के मोर्चे पर वादाखिलाफी से घिरी सरकार
चुनाव में असंतोष की दूसरी सबसे बड़ी वजह ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति और मध्य पूर्व (Iran Conflict) में बढ़ा तनाव है। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रंप ने दावा किया था कि वे अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को कुछ ही हफ्तों के भीतर समाप्त कर देंगे, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी वैश्विक स्थिरता बहाल नहीं हो सकी है। ईरान के साथ बढ़ते टकराव और ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने आम अमरीकियों की जेब पर सीधा असर डाला है। लगभग 69 प्रतिशत लोग सरकार के विदेश नीति प्रबंधन से असंतुष्ट हैं। युद्ध और सैन्य अभियानों में अमरीका के भारी वित्तीय खर्च से नाराज मतदाता अब इसे सरकार की बड़ी कूटनीतिक विफलता के रूप में देख रहे हैं, जिसका सीधा फायदा विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को मिलता दिख रहा है।
तीसरा बड़ा मुद्दा: राजनीतिक बदलाव की तीव्र इच्छा और डेमोक्रेट्स की जबरदस्त बढ़त
अमरीकी राजनीति में इस समय बदलाव की बयार बेहद तेज चल रही है। एपी-एनओआरसी (AP-NORC) के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, अमरीका के लगभग 80 प्रतिशत मतदाता वॉशिंगटन की शासन प्रणाली में बड़े या पूर्ण स्तर पर बदलाव (Upheal) की मांग कर रहे हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक इस बार रिपब्लिकन मतदाताओं की तुलना में कहीं अधिक उत्साहित और एकजुट नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 'जेनेरिक कांग्रेसनल बैलेट' में डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन पर दो अंकों की बढ़त बना रखी है। अमरीका का युवा वर्ग, महिला मतदाता और लातिनी (हिस्पैनिक) समुदाय ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में कटौती से नाराज होकर डेमोक्रेट्स के पक्ष में लामबंद हो रहा है