'हां, मैं किम जोंग से मिलूंगा...' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, नॉर्थ कोरियाई तानाशाह की बहन बोलीं- मुझे कोई जानकारी नहीं
दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति [Donald Trump](cite: 1.1.1) ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए ऐलान किया है कि वे उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता [Kim Jong Un](cite: 1.1.1) से इस साल दोबारा मुलाकात करेंगे। ट्रंप के इस सनसनीखेज दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बहस छिड़ गई है, हालांकि इस पर उत्तर कोरिया की ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया सामने आई है। आइए जानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के क्या मायने हैं और किम जोंग उन की शक्तिशाली बहन ने इस पर क्या कहा है।
ट्रंप ने क्यों जताई किम जोंग उन से मिलने की इच्छा?
व्हाइट हाउस में एक नए हेलिपैड के दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति [Donald Trump](cite: 1.1.1) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह उत्तर कोरियाई नेता [Kim Jong Un](cite: 1.1.1) से मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं। [The Straits Times](cite: 1.1.1) की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान बने पुराने संबंधों को एक बार फिर से जीवित करना चाहते हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में परमाणु हथियारों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के पास वर्तमान में 57 बेहद ताकतवर परमाणु हथियार मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह स्थिति पहले नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन चूंकि अब उनके पास ये हथियार हैं, इसलिए उनके साथ अच्छे संबंध बनाए रखना और बातचीत करना जरूरी है ताकि क्षेत्र में शांति कायम रखी जा सके।
किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग का तीखा रिएक्शन
[The Straits Times](cite: 1.1.2) और [The Guardian](cite: 1.1.4) की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बड़े दावे पर उत्तर कोरिया के नेता की प्रभावशाली बहन किम यो-जोंग (Kim Yo-jong) की तरफ से भी बयान सामने आया है। उन्होंने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें हाल ही में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच हुई किसी भी तरह की गुप्त बातचीत या संपर्क के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
किम यो-जोंग ने स्पष्ट किया कि प्योंगयांग के लिए वाशिंगटन अभी भी एक विरोधी की तरह है, हालांकि उन्होंने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों को अब भी बेहतरीन बताया। जानकारों का मानना है कि उत्तर कोरिया की तरफ से आया यह बयान कूटनीतिक वार्ताओं से पहले मोलभाव करने का एक पुराना तरीका हो सकता है।
दक्षिण कोरियाई और एशियाई सहयोगियों की बढ़ी चिंताएं
ट्रंप द्वारा अचानक उत्तर कोरिया को लेकर दिखाए गए इस नरम रुख और अमेरिका-दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों (Joint Military Drills) के पैमाने को कम करने के फैसले ने एशियाई सहयोगियों की नींद उड़ा दी है। विश्लेषकों का कहना है कि एक तरफ जहां अमेरिका ईरान के साथ संघर्ष और उसकी परमाणु गतिविधियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया के मामले में इस तरह की नरमी से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर गहरा असर पड़ सकता है।