सोना गिरवी रख कर्ज चुकाना हुआ मुश्किल, 5 महीने में डबल हुए डिफॉल्ट
भारतीय घरों में सोने के प्रति लगाव और आपातकालीन समय में काम आने वाले गहनों का इतिहास बहुत पुराना रहा है जब भी किसी मध्यमवर्गीय परिवार या छोटे कारोबारी को अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) की तिजोरी में रखा पीला सोना सबसे बड़ा सहारा बनता है "सोना गिरवी रखो और तुरंत कैश ले जाओ" का यह फॉर्मूला जितना आसान और लोकप्रिय है, वर्तमान समय में इसके परिणाम उतने ही डराने लगे हैं ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की हालिया रिपोर्ट ने देश के वित्तीय बाजारों में एक नई चिंता को जन्म दे दिया है इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश में गोल्ड लोन का कुल बकाया बाजार बढ़कर रिकॉर्ड 22.5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े पर पहुंच गया है, जो महज तीन साल पहले लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये के आसपास हुआ करता था यानी यह बाजार पिछले कुछ वर्षों में लगभग तीन गुना बढ़ चुका है, लेकिन इसके साथ ही कर्ज न चुका पाने और डिफॉल्ट होने के मामलों में भी तेजी से उछाल आया है, जिससे आम आदमी से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक की टेंशन बढ़ गई है
सिर्फ पांच महीनों में दोगुना हुआ गोल्ड लोन डिफॉल्ट का आंकड़ा
गोल्ड लोन के इस बेतहाशा विस्तार के बीच सबसे डराने वाली बात यह सामने आई है कि लोग बैंक से सोना रखकर कर्ज तो आसानी से ले रहे हैं, लेकिन उसे समय पर छुड़ा नहीं पा रहे हैं सिबिल की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे लोन जिनका भुगतान 90 दिनों से ज्यादा समय से पेंडिंग यानी ओवरड्यू चल रहा है, उनका हिस्सा मार्च 2026 में कुल पोर्टफोलियो का 0.2 फीसदी था, जो महज पांच महीने बाद यानी अगस्त 2026 में बढ़कर 0.3 फीसदी पर पहुंच गया है आंकड़ों के लिहाज से यह भले ही एक छोटा प्रतिशत लगे, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से यह महज पांच महीनों में डिफॉल्ट दर का लगभग दोगुना होना है देश के कुल क्रेडिट एक्टिव उपभोक्ताओं में से लगभग 21 फीसदी यानी हर पांच में से एक व्यक्ति आज किसी न किसी रूप में गोल्ड लोन के बोझ के तले दबा हुआ है अगस्त 2026 तक देश भर में करीब 5.5 करोड़ लोग गोल्ड लोन चुकाने के संघर्ष में लगे हुए थे, जिनमें से कई लोगों के लिए बढ़ते ब्याज और वित्तीय दबाव के कारण अपने पारिवारिक गहनों को वापस पाना नामुमकिन सा होता जा रहा है
छोटे कर्ज से बड़े लोन की तरफ शिफ्ट हुआ भारतीय बाजार और Gen Z की एंट्री
भारतीय गोल्ड लोन मार्केट के पैटर्न में पिछले कुछ समय में एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान मंजूर किए गए कुल गोल्ड लोन की रकम सालाना आधार पर 12 फीसदी बढ़कर 8.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, लेकिन इसके विपरीत नए गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों की कुल संख्या में 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है इस तिमाही में लगभग 3.7 करोड़ नए लोन बांटे गए और कुल यूनिक कर्जदारों की संख्या करीब 2.4 करोड़ रही इसका सीधा सा मतलब यह है कि बाजार में भले ही नए कर्ज लेने वाले लोग कम आए हों, लेकिन जो लोग लोन ले रहे हैं, वे अब छोटी-मोटी रकम के बजाय बहुत बड़े अमाउंट का कर्ज उठा रहे हैं आंकड़ों के गवाह के मुताबिक 2.5 लाख रुपये से अधिक के बड़े गोल्ड लोन की संख्या में सालाना आधार पर 19 फीसदी की तेज बढ़ोतरी हुई है, जो यह साबित करती है कि अब लोग छोटी जरूरतों के साथ-साथ बड़ी व्यावसायिक और जीवनशैली की आवश्यकताओं के लिए भी सोने को गिरवी रख रहे हैं इसके साथ ही, इस दौड़ में देश की नई पीढ़ी यानी Gen Z (युवा वर्ग) भी पीछे नहीं है, जहां स्टार्टअप्स, फ्रीलांसिंग, महंगे गैजेट्स, उच्च शिक्षा और लाइफस्टाइल की जरूरतों को पूरा करने के लिए युवा बड़ी संख्या में आगे आ रहे हैं, जिससे उन पर वित्तीय जोखिम और अधिक बढ़ गया है
एक से ज्यादा लोन लेने वालों पर मंडरा रहा सबसे बड़ा वित्तीय खतरा
सिबिल की इस व्यापक रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि वित्तीय संकट का सामना कौन सा वर्ग सबसे ज्यादा कर रहा है जो कर्जदार एक साथ कई वित्तीय संस्थानों से जुड़े हैं और जिनके पास एक से ज्यादा गोल्ड लोन खाते सक्रिय हैं, उनमें भुगतान चूकने का यानी डिफॉल्ट होने का खतरा सबसे ज्यादा है जिन ग्राहकों के पास चार या उससे अधिक गोल्ड लोन अकाउंट्स हैं, उनके पोर्टफोलियो में डिफॉल्ट रेट बढ़कर 0.45 फीसदी तक पहुंच गया है, जो पूरे गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की औसत दर (0.30%) से लगभग डेढ़ गुना अधिक है हैरान करने वाली बात यह है कि ऐसे अत्यधिक कर्ज के जाल में फंसे लोगों की हिस्सेदारी कुल गोल्ड लोन के बकाया बाजार में करीब 27 फीसदी है जानकारों का मानना है कि जब कोई व्यक्ति एक लोन चुकाने के लिए दूसरा और दूसरे को चुकाने के लिए तीसरा लोन लेता है, तो वह धीरे-धीरे ऐसे चक्रव्यूह में फंस जाता है जहां से निकलना मुश्किल हो जाता है इसके अलावा, ग्रामीण और सेमी-अर्बन (अर्ध-शहरी) इलाकों की हिस्सेदारी इस अवधि में बांटे गए कुल गोल्ड लोन में लगभग दो-तिहाई रही है, जो यह दिखाता है कि भारत के छोटे शहरों और गांवों में भी वित्तीय असुरक्षा और नकदी की कमी के कारण सोने को गिरवी रखने का चलन किस कदर हावी हो चुका है
आरबीआई के नए नियम और ग्राहकों के लिए जरूरी सुरक्षा के उपाय
बढ़ते डिफॉल्ट मामलों और बाजार में मची भगदड़ के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कड़े और स्पष्ट नियम लागू कर दिए हैं 1 अप्रैल 2026 से सभी कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, कोऑपरेटिव बैंकों और एनबीएफसी के लिए एक नया और संशोधित फ्रेमवर्क पूरी तरह प्रभावी हो चुका है नए नियमों के अंतर्गत छोटे कर्जदारों को राहत देते हुए टियर-आधारित एलटीवी (LTV - Loan-to-Value) संरचना बनाई गई है, जिसके तहत 2.5 लाख रुपये तक के लोन के लिए अधिकतम एलटीवी सीमा को 75 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 85 फीसदी कर दिया गया है वहीं 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक के कर्ज पर 80 फीसदी और 5 लाख से अधिक के लोन पर 75 फीसदी एलटीवी तय की गई है हालांकि, 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के बड़े लोन के मामलों में बैंकों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे ग्राहक की वास्तविक रीपेमेंट क्षमता (चुकान क्षमता) का कड़ाई से मूल्यांकन करें, ताकि वे कागजी कीमत के आधार पर ओवर-लेंडिंग न कर सकें सोने के मूल्यांकन के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं अब बैंकों को केवल शुद्ध सोने के वजन और बाजार में पिछले 30 दिनों के औसत बंद भाव या पिछले दिन के बंद भाव (जो भी कम हो) के आधार पर ही कीमत तय करनी होगी, जिसमें किसी भी प्रकार के स्टोन, जेवरात के नग या मेकिंग चार्ज की वैल्यू को नहीं जोड़ा जाएगा इसके अलावा, यदि कोई वित्तीय संस्थान कर्ज चुकता होने के बाद 7 कार्य दिवसों के भीतर ग्राहक के गिरवी रखे गहने वापस नहीं करता है, तो उसे रोजाना 5,000 रुपये के हिसाब से हर्जाना देना होगा, जो ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है