Knee Arthritis है तो क्या घुटने का ऑपरेशन जरूरी है? किन संकेतों से समझें सर्जरी जरूरी

Knee Arthritis है तो क्या घुटने का ऑपरेशन जरूरी है? किन संकेतों से समझें सर्जरी जरूरी

घुटनों का दर्द और आर्थराइटिस (Knee Arthritis) आज के समय में एक बेहद आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो न केवल बुजुर्गों बल्कि कम उम्र के लोगों को भी अपनी चपेट में ले रही है। जब किसी व्यक्ति को घुटने के जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, अकड़न या चलने-फिरने में कठिनाई महसूस होने लगती है, तो उसके मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या अब इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए घुटने का ऑपरेशन यानी ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचा है? मेडिकल साइंस और आर्थोपेडिक्स विशेषज्ञों का मानना है कि हर घुटने के दर्द या आर्थराइटिस के मरीज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। शुरुआती और मध्यम चरणों में इस समस्या का इलाज फिजियोथैरेपी, वजन नियंत्रण, जीवनशैली में बदलाव और दवाइयों के जरिए सफलतापूर्वक किया जा सकता है। हालांकि, कुछ खास चिकित्सीय संकेत और स्थितियां ऐसी होती हैं जहां ऑपरेशन करवाना मरीज के लिए अनिवार्य हो जाता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि घुटने के आर्थराइटिस में किन परिस्थितियों और संकेतों के आधार पर यह तय किया जाता है कि अब सर्जरी का समय आ गया है।

घुटने के आर्थराइटिस का शुरुआती दौर और गैर-सर्जिकल इलाज के विकल्प

जब किसी व्यक्ति को घुटने में आर्थराइटिस की शुरुआती शिकायत होती है, तो कार्टिलेज (कार्टिलेज वह कुशन होता है जो हड्डियों को आपस में रगड़ने से बचाता है) घिसना शुरू होता है। इस अवस्था में मरीजों को तुरंत सर्जरी के बारे में सोचने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। डॉक्टर सबसे पहले नॉन-सर्जिकल यानी कंजरवेटिव ट्रीटमेंट (Conservative Treatment) की सलाह देते हैं। इसमें मरीज के वजन को नियंत्रित करना सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है, क्योंकि अतिरिक्त वजन का सीधा दबाव घुटनों के जोड़ों पर पड़ता है। इसके अलावा, नियमित रूप से हल्की फिजियोथैरेपी करने, घुटने के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम करने, और डॉक्टर की सलाह से सूजन कम करने वाली दवाइयां या सप्लीमेंट्स लेने से मरीज को काफी राहत मिल जाती है। शुरुआती चरणों में यदि जीवनशैली को अनुशासित रखा जाए और खानपान पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो घुटने की घिसावट की गति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है और लंबे समय तक ऑपरेशन से बचा जा सकता है।

वे कौन से प्रमुख संकेत हैं जो बताते हैं कि अब सर्जरी अपरिहार्य हो चुकी है?

जैसे-जैसे आर्थराइटिस की बीमारी गंभीर (Advanced Stage) होती जाती है, घुटने की हड्डियां आपस में रगड़ने लगती हैं और जोड़ का गैप पूरी तरह खत्म हो जाता है। ऐसी स्थिति में गैर-सर्जिकल उपाय बेअसर साबित होने लगते हैं। आर्थोपेडिक सर्जन कुछ खास शारीरिक और चिकित्सीय संकेतों के आधार पर यह निर्णय लेते हैं कि अब मरीज को घुटने के ऑपरेशन की सख्त जरूरत है। सबसे पहला और मुख्य संकेत यह है कि यदि मरीज को आराम करते समय, यानी लेटे या बैठे रहने पर भी घुटने में तेज और असहनीय दर्द बना रहता है। दूसरा बड़ा संकेत यह है कि दवाइयां, पेनकिलर, इंजेक्शन या फिजियोथैरेपी कराने के बाद भी यदि दर्द से कोई राहत नहीं मिल रही है और दैनिकचर्या के सामान्य कार्य जैसे नहाना, कपड़े पहनना या घर के अंदर चलना-फिरना भी दूभर हो गया है, तो यह सर्जरी का स्पष्ट संकेत माना जाता है।

चलने-फिरنے में लाचारी और घुटने के आकार में बदलाव आने पर क्या करें?

घुटने के आर्थराइटिस के बढ़ने पर कई बार मरीज के पैरों के आकार में भी विकृति (Deformity) आने लगती है, जैसे पैर अंदर की तरफ मुड़ जाना या धनुषाकार हो जाना। यदि आपको सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में अत्यधिक पीड़ा होती है, आप बिना सहारे के सौ कदम भी ठीक से चल नहीं पाते हैं, या फिर घुटने से लगातार कट-कट की तेज आवाज के साथ सूजन बनी रहती है, तो आपको तुरंत किसी अच्छे जोइंट रिप्लेसमेंट सर्जन से परामर्श करना चाहिए। एक्स-रे रिपोर्ट में जब यह देखा जाता है कि घुटने की हड्डियां पूरी तरह घिस चुकी हैं और उनके बीच का स्पेस खत्म हो चुका है, तो डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। आधुनिक चिकित्सा तकनीक के आने से घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement Surgery) अब बेहद सुरक्षित और सफल हो गया है, जिससे मरीज कुछ ही दिनों में अपने पैरों पर सामान्य रूप से दोबारा खड़े होने में सक्षम हो जाते हैं और उन्हें दर्द से मुक्ति मिल जाती है।