अजय देवगन की 'दृश्यम 3' भी नहीं हिला पाई 'हनुमान अंश' का जलवा
भारतीय सिनेमाघरों में इस समय बॉक्स ऑफिस का घमासान एक बेहद रोमांचक और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के पावन और लंबे छुट्टी वाले weekend का पूरा फायदा उठाने के लिए कई बड़ी और बहुप्रतीक्षित फिल्में आपस में टकरा रही हैं। सिनेमाप्रेमियों के बीच इस बात को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई थी कि गांधी जयंती के इस खास मौके पर कौन सी फिल्म दर्शकों के दिलों पर राज करेगी और कौन सी फिल्म बॉक्स ऑफिस की रेस में पिछड़ जाएगी। हाल ही में सामने आए बॉक्स ऑफिस के शुरुआती आंकड़ों और रुझानों ने सभी को हैरान कर दिया है, क्योंकि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अजय देवगन की सस्पेंस-थ्रिलर फ्रेंचाइजी की बहुचर्चित फिल्म 'दृश्यम 3' (Drishyam 3) भी उस अभूतपूर्व और अजेय लहर को नहीं हिला पाई जो इन दिनों 'हनुमान अंश' नामक फिल्म के नाम से सिनेमाघरों में चल रही है। महान संत नीम करोली बाबा के आशीर्वाद और उनकी शिक्षाओं के आध्यात्मिक प्रभाव पर आधारित इस फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ इतनी मजबूत बना ली है कि बड़े-बड़े सितारों की फिल्में भी इसके आगे पानी भरती नजर आ रही हैं। दूसरी तरफ, साई-फाई या एक्शन शैली में बनाई गई नई फिल्म 'द वन' (The One) उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करने में असफल रही और दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाने के मामले में काफी पीछे फिसल गई। इस बॉक्स ऑफिस क्लैश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आज का भारतीय दर्शक केवल स्टार पावर या महंगे वीएफएक्स वाली मसाला फिल्मों के पीछे भागने के बजाय ऐसी कहानियों और आध्यात्मिक विषयों को सबसे ज्यादा पसंद कर रहा है जो उसकी आत्मा को छू सकें और उसे एक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर सकें।
'हनुमान अंश' की आंधी और नीम करोली बाबा की फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक जलवा
जब 'हनुमान अंश' नामक इस फिल्म ने सिनेमाघरों में अपनी दस्तक दी थी, तब किसी ने भी यह अनुमान नहीं लगाया था कि यह फिल्म गांधी जयंती के इस बड़े वीकेंड पर बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरणों को इस तरह से पलट कर रख देगी। नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक कृपा और हनुमान जी की अटूट भक्ति पर आधारित इस फिल्म की कहानी ने दर्शकों को इस कदर मंत्रमुग्ध कर दिया है कि सिनेमाघरों के बाहर हाउसफुल के बोर्ड और लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। फिल्म का निर्देशन, इसके संवाद और संगीत दर्शकों के दिलों में घर कर गए हैं, जिसके कारण माउथ पब्लिसिटी (Word of Mouth) इतनी जबरदस्त हो चुकी है कि टिकट खिड़की पर इसकी कमाई दिन-प्रतिदिन लगातार बढ़ती जा रही है। समीक्षकों का यह मानना है कि जब किसी फिल्म के साथ लोगों की गहरी आस्था और शुद्ध भावनाएं जुड़ जाती हैं, तो बड़े से बड़े बजट की फिल्में और स्टार्स भी उसके आगे कमजोर पड़ने लगते हैं। 'हनुमान अंश' ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में भारतीय दर्शक साफ-सुथरी, पारिवारिक और प्रेरणादायक कहानियों को देखने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक रहते हैं, और यही इस फिल्म की अप्रत्याशित सफलता का सबसे बड़ा मुख्य आधार बन चुका है।
'दृश्यम 3' की कड़ी टक्कर और अजय देवगन की फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर स्थिति
दूसरी तरफ, बॉलीवुड के अजय देवगन की सस्पेंस-थ्रिलर मास्टरपीस फ्रेंचाइजी का तीसरा भाग यानी 'दृश्यम 3' भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' की अपार सफलता के बाद से ही दर्शकों के मन में इस तीसरे भाग को लेकर एक अलग ही क्रेज और अपेक्षाएं थीं, और फिल्म ने रिलीज के साथ ही अच्छी खासी ओपनिंग भी हासिल की थी। हालांकि, गांधी जयंती के इस लंबे अवकाश के दौरान जब 'हनुमान अंश' की सुनामी सिनेमाघरों में आई, तो 'दृश्यम 3' को अपने कलेक्शन की रफ्तार बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके बावजूद, अजय देवगन के अभिनय के कायल दर्शक और थ्रिलर फिल्मों के शौकीन लोग आज भी सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं, जिससे यह फिल्म बॉक्स ऑफिस की रेस से बाहर होने के बजाय एक मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में टिकी हुई है। ट्रेड एनालिस्ट्स का यह कहना है कि 'दृश्यम 3' का कंटेंट बहुत मजबूत है और यह लंबी रेस का घोड़ा साबित होगी, भले ही शुरुआती छुट्टियों के दिनों में इसे आध्यात्मिक फिल्मों के भारी क्रेज के कारण कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा हो।
फिल्म 'द वन' का पिछड़ना और दर्शकों की बदलती पसंद का नया ट्रेंड
इस त्रिकोणीय मुकाबले में जहां एक तरफ 'हनुमान अंश' और 'दृश्यम 3' के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ नई शैली में बनी फिल्म 'द वन' बॉक्स ऑफिस की इस रेस में काफी पिछड़ती हुई और फिसलती नजर आ रही है। फिल्म से जुड़े जानकारों का मानना है कि 'द वन' का प्रमोशन और इसकी कहानी दर्शकों के साथ उस स्तर पर कनेक्ट नहीं हो पाई जिसकी मेकर्स ने उम्मीद की थी। आज का भारतीय दर्शक बहुत समझदार हो चुका है और वह टिकट खरीदने से पहले फिल्म की पटकथा, उसकी कसावट और उसके प्रभाव की पूरी पड़ताल करता है। जब सिनेमाघरों में एक तरफ नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से जुड़ी 'हनुमान अंश' जैसी भावनात्मक फिल्म चल रही हो और दूसरी तरफ 'दृश्यम 3' जैसा हाई-वोल्टेज थ्रिलर मौजूद हो, तो औसत दर्जे की कहानियों वाली फिल्मों के लिए टिक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि 'द वन' के शोज़ कई जगहों पर कम किए जा रहे हैं और दर्शक सिनेमाघरों में अन्य विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
गांधी जयंती वीकेंड के आंकड़े और भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का भविष्य का परिदृश्य
गांधी जयंती के इस लंबे और महत्वपूर्ण वीकेंड ने एक बार फिर से यह दिखा दिया है कि भारतीय बॉक्स ऑफिस का मिजाज किस तेजी से बदल रहा है। अब केवल बड़े बैनर या करोड़ों रुपए के विज्ञापनों से किसी फिल्म को सुपरहिट नहीं बनाया जा सकता, बल्कि दर्शक केवल और केवल बेहतरीन कंटेंट, मजबूत संदेश और दिल को छू लेने वाली कहानियों को ही सलाम करते हैं। 'हनुमान अंश' की यह शानदार सफलता और 'दृश्यम 3' का बॉक्स ऑफिस पर डटे रहना इस बात का प्रमाण है कि फिल्म इंडस्ट्री में विविधता का होना कितना जरूरी है। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि क्या 'हनुमान अंश' इसी गति से अपनी बादशाहत बनाए रखती है या फिर 'दृश्यम 3' अपनी मजबूत ग्रिप के जरिए बॉक्स ऑफिस के सिंहासन पर कब्जा करने में कामयाब होती है। तब तक के लिए देश भर के सिनेमाघरों में दर्शकों का यह उत्साह और फिल्मों के बीच की यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय मनोरंजन जगत के सुनहरे भविष्य की एक बहुत ही सुंदर और स्पष्ट तस्वीर पेश कर रही है।