शिक्षा का बाजारीकरण ! देवोलीना ने बीजेपी के सेवा संकल्प अभियान पर उठाए तीखे सवाल
भारतीय टेलीविजन की दुनिया में 'गोपी बहू' के रूप में घर-घर में अपनी खास पहचान बनाने वाली लोकप्रिय अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने इन दिनों अभिनय के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बेबाक राय रखनी शुरू कर दी है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' और सरकारी नीतियों पर देवोलीना ने एक तीखा और विचारोत्तेजक बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अभिनेत्री ने सीधे तौर पर यह सवाल उठाया है कि आज के समय में देश के भीतर शिक्षा पूरी तरह से एक महंगा व्यापार (Commercialization of Education) बन चुकी है, जहां गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा पाना असंभव सा होता जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दर्द बयां किया है कि आज देश में असली और योग्य मेरिट वाले युवा घर बैठने को मजबूर हैं, ऐसे में सरकार के इन दावों का क्या मतलब है कि देश का हर तरफ से चहुंमुखी उत्थान हो रहा है।
बीजेपी के 'सेवा संकल्प अभियान' और दावों पर सीधा सवालिया निशान
भारतीय जनता पार्टी द्वारा जनता के बीच अपनी योजनाओं को ले जाने और सामाजिक संपर्क बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न अभियान चलाए जाते हैं, जिनमें 'सेवा संकल्प अभियान' भी एक प्रमुख हिस्सा है। इस अभियान के जरिए पार्टी यह दावा करती है कि वह समाज के हर वर्ग तक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने इन दावों पर करारा कटाक्ष करते हुए कहा है कि जमीनी हकीकत इन कागजी और चुनावी वादों से काफी अलग है। जब तक आम जनता को बुनियादी जरूरतें जैसे कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के निष्पक्ष अवसर सुलभ नहीं कराए जाते, तब तक इस प्रकार के राजनीतिक अभियानों का वास्तविक धरातल पर कोई विशेष अर्थ नहीं रह जाता है।
शिक्षा का बढ़ता बाजारीकरण और आम आदमी की बढ़ती मुश्किलें
देवोलीना ने अपने बयान में सबसे बड़ा और गंभीर मुद्दा शिक्षा के क्षेत्र में फैल रहे अंधाधुंध कमर्शियलाइजेशन को लेकर उठाया है। आज के दौर में स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान शिक्षा देने के केंद्र कम और मुनाफा कमाने वाली बड़ी कंपनियां ज्यादा बन चुके हैं। महंगे एडमिशन फीस, डोनेशन और ट्यूशन के भारी-भरकम खर्चों के कारण आज गरीब मेधावी छात्र अच्छी शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। अभिनेत्री का कहना है कि जब शिक्षा जैसी पवित्र और बुनियादी चीज इतनी महंगी हो जाएगी, तो देश का आम नागरिक अपने बच्चों को कैसे आगे बढ़ा पाएगा। सरकार और शिक्षा नियामकों को इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि कैसे शिक्षा के इस गिरते और महंगे होते स्तर को नियंत्रित किया जाए ताकि हर होनहार बच्चे को पढ़ाई का समान अवसर मिल सके।
मेरिट की उपेक्षा और योग्य युवाओं के सामने बेरोजगारी का संकट
आज के इस दौर में देश के युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी और अवसरों की कमी बनी हुई है। देवोलीना ने अपने इस चर्चित बयान में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया है कि आज जिन युवाओं के पास शानदार डिग्रियां, उच्च प्रतिभा और वास्तविक मेरिट है, वे भी नौकरियों के अभाव में या तो घर बैठने को मजबूर हैं या फिर उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिल रहा है। जब टैलेंट और मेरिट की इज्जत सड़क पर होने लगे और सिफारिश या भाई-भतीजावाद को बढ़ावा मिलने लगे, तो देश का युवा वर्ग कुंठा का शिकार हो जाता है। अभिनेत्री का यह तीखा सवाल हर उस नागरिक के दिल को छू रहा है जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है, क्योंकि एक देश की असली ताकत उसकी युवा शक्ति और उनकी योग्यता होती है।
राजनीतिक बयानों और फिल्मी हस्तियों की सामाजिक जवाबदेही पर बहस
देवोलीना भट्टाचार्जी द्वारा उठाए गए इन सवालों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर एक बार फिर से यह बहस छिड़ गई है कि क्या फिल्मी हस्तियों और कलाकारों को इस तरह के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलना चाहिए या नहीं। एक वर्ग का मानना है कि कलाकारों को अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल आम जनता की आवाज उठाने के लिए करना चाहिए, वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक स्टंट भी करार देते हैं। बहरहाल, शिक्षा और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दे किसी एक पार्टी या व्यक्ति के नहीं बल्कि पूरे देश के भविष्य से जुड़े हुए हैं। देवोलीना के इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि एक सेलिब्रिटी जब आम इंसान के दर्द और व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाता है, तो वह समाज में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक वैचारिक मंथन पैदा कर देता है।