कैंसर के इलाज में ऐतिहासिक क्रांति! ओवेरियन कैंसर से जंग के लिए दुनिया की पहली मरीज को दी गई अनोखी सेल थेरेपी

कैंसर के इलाज में ऐतिहासिक क्रांति! ओवेरियन कैंसर से जंग के लिए दुनिया की पहली मरीज को दी गई अनोखी सेल थेरेपी

लंदन। मेडिकल साइंस के इतिहास में कैंसर के इलाज को लेकर एक बहुत बड़ी और अभूतपूर्व सफलता हाथ लगी है। एडवांस स्टेज (चौथी स्टेज) के ओवेरियन कैंसर से पीड़ित ब्रिटेन की एक 58 वर्षीय महिला दुनिया की पहली ऐसी मरीज बन गई हैं, जिन पर एक नई और बेहद अत्याधुनिक सेलुलर थेरेपी (Cell Therapy) का सफल परीक्षण किया गया है। मैनचेस्टर के 'द क्रिस्टी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट' में डॉक्टरों ने इस प्रायोगिक दवा 'ZI-MA4-1' की पहली डोज मरीज को देकर चिकित्सा जगत में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। यह परीक्षण ऐसे समय में उम्मीद की बड़ी किरण बनकर आया है, जब मरीज के पास जीवित रहने के लिए अन्य सभी पारंपरिक इलाज के विकल्प लगभग खत्म हो चुके थे।

जानिए कौन है दुनिया की पहली मरीज ट्रेसी टॉमलिंसन और उनकी दर्दभरी कहानी

इस ऐतिहासिक क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा बनने वाली 58 वर्षीय महिला का नाम ट्रेसी टॉमलिंसन (Tracy Tomlinson) है, जो ग्रेटर मैनचेस्टर की रहने वाली हैं। ट्रेसी को साल 2020 के अंत में स्टेज 3C ओवेरियन कैंसर का पता चला था। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह मामूली यूरिन इन्फेक्शन है, लेकिन जब एंटीबायोटिक्स से आराम नहीं मिला, तो जांच में कैंसर का खुलासा हुआ। पिछले पांच सालों में ट्रेसी ने कई जटिल सर्जरीज कराईं, कीमोथेरेपी के कई दौर झेले और मेंटेनेंस थेरेपी भी ली। कैंसर दो बार ठीक होने के बाद फिर से लौट आया और पूरे शरीर में फैलने लगा। इलाज के चलते उन्हें हाथ-पैरों की नसों में गंभीर क्षति (Nerve Damage) और लगातार मतली का सामना करना पड़ा। जब सारे रास्ते बंद हो गए, तो उन्होंने इस नए ट्रायल (ZIMA-101) के लिए हामी भरी।

दो महाशक्तियों का अनूठा मेल: क्या है यह ZI-MA4-1 थेरेपी और यह कैसे काम करती है?

नार्वे की प्रसिद्ध बायोटेक कंपनी 'जैलुना' (Zelluna) द्वारा विकसित की गई 'ZI-MA4-1' थेरेपी कैंसर से लड़ने के दो सबसे आधुनिक तरीकों का एक बेहतरीन और शक्तिशाली संयोजन है:

  • नेचुरल किलर (NK) सेल्स की ताकत: इस थेरेपी में मानव शरीर की प्राकृतिक रक्षक कोशिकाओं यानी 'नेचुरल किलर सेल्स' का उपयोग किया जाता है, जो शरीर में किसी भी प्रकार की असामान्य या कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को ढूंढकर नष्ट करने में माहिर होती हैं।

  • इंजीनियर्ड टी-सेल रिसेप्टर्स (TCR): इन एनके सेल्स के ऊपर विशेष रूप से डिजाइन किए गए टी-सेल रिसेप्टर्स लगाए जाते हैं। ये रिसेप्टर्स एक गाइड की तरह काम करते हैं और सीधे उन ट्यूमर कोशिकाओं पर हमला करते हैं जो 'Mage-A4' नाम के प्रोटीन का उत्पादन करती हैं। यह प्रोटीन ओवेरियन कैंसर के साथ-साथ फेफड़ों और सिर-गर्दन के कैंसर में भी पाया जाता है।

'ऑफ-द-शेल्फ' तकनीक से इलाज होगा बेहद तेज, आसान और काफी सस्ता

अब तक उपलब्ध ज़्यादातर एडवांस्ड सेल थेरेपी (जैसे CAR-T) व्यक्तिगत होती हैं, जिनमें मरीज के खुद के शरीर से कोशिकाएं निकालकर उन्हें लैब में मॉडिफाई किया जाता है, जिसमें काफी हफ्तों का समय और करोड़ों का खर्च आता है। लेकिन ZI-MA4-1 एक 'ऑफ-द-शेल्फ' (Ready-to-use) थेरेपी है। इसका मतलब है कि इसे स्वस्थ डोनर (दाता) की इम्यून कोशिकाओं से पहले से ही बनाकर फ्रीज कर लिया जाता है। एक ही बैच से सैकड़ों मरीजों के लिए खुराक तैयार हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि इस क्रांतिकारी दृष्टिकोण से आक्रामक कैंसर के मरीजों को बिना किसी इंतजार के तुरंत, बेहद सुरक्षित और बहुत ही किफायती दरों पर नया जीवनदान मिल सकेगा।