शरीर के एक हिस्से में तेज दर्द और निकलने लगे पानी वाले दाने
स्वास्थ्य और मेडिकल साइंस के क्षेत्र से डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यदि आप या आपके परिवार में कोई भी व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित है, और उसे अचानक से शरीर के किसी एक हिस्से या एक तरफ की त्वचा पर असहनीय दर्द के साथ लाल चकत्ते और पानी से भरे छोटे-छोटे दाने या छाले (Blisters) दिखाई देने लगें, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज बिल्कुल न करें। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह लक्षण 'शिंगल्स' (Shingles) यानी हर्पीस जोस्टर (Herpes Zoster) नामक वायरल संक्रमण का हो सकता है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले डायबिटीज रोगियों में यह समस्या आम लोगों के मुकाबले काफी तेजी से और गंभीर रूप में उभरती है, जिससे समय रहते सतर्क होना बेहद जरूरी हो जाता है।
क्या होता है Shingles और डायबिटीज के मरीजों पर इसका सबसे ज्यादा असर क्यों पड़ता है?
शिंगल्स (Shingles) एक ऐसा वायरल संक्रमण है जो वही वैरीसेला-जोस्टर वायरस (Varicella-Zoster Virus) के कारण होता है, जिससे बचपन में चिकनपॉक्स (Chickenpox) यानी माता निकलती है। चिकनपॉक्स ठीक होने के बाद भी यह वायरस शरीर की नसों (Nerves) में सुप्त अवस्था में छिपा रहता है। जब किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर होती है, तो यह वायरस दोबारा सक्रिय हो जाता है और नसों के रास्ते त्वचा पर हमला बोल देता है। चूंकि डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल बढ़ने से उनकी इम्युनिटी प्राकृतिक रूप से कमजोर हो जाती है, इसलिए उनके शरीर में इस वायरस के जागने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि डायबिटिक न्यूरोपैथी से जूझ रहे लोगों में शिंगल्स का दर्द और भी अधिक कष्टदायक और लंबा साबित हो सकता है।
शुरुआती लक्षण: कैसे पहचानें कि आपको Shingles की समस्या हो रही है?
शिंगल्स के लक्षण आमतौर पर बहुत तेजी से सामने आते हैं। सबसे खास बात यह होती है कि यह संक्रमण शरीर के केवल एक तरफ (या तो दाहिनी या बाईं ओर) पसलियों, पीठ, चेहरे या पेट के हिस्से पर असर डालता है। संक्रमण शुरू होने से पहले उस खास हिस्से की त्वचा में तेज चुभन, जलन, सुन्नपन या असहनीय दर्द महसूस होता है। इसके कुछ ही दिनों बाद उस स्थान पर लाल चकत्ते उभर आते हैं, जो धीरे-धीरे पानी से भरे छालों का रूप ले लेते हैं। इन छालों में तेज खुजली और जलन होती है, जिससे मरीज को रात की नींद पूरी करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते डॉक्टर से परामर्श न किया जाए, तो यह दर्द छालों के सूखने के बाद भी महीनों तक न्यूरलgia (नसों के दर्द) के रूप में परेशान कर सकता है।
डायबिटीज कंट्रोल और समय पर इलाज है इस बीमारी से बचने का एकमात्र अचूक उपाय
यदि किसी डायबिटीज रोगी को इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तुरंत किसी अच्छे त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) या जनरल फिजीशियन से संपर्क करना चाहिए। शिंगल्स के इलाज के लिए डॉक्टर आमतौर पर एंटी-वायरल दवाइयों (Anti-viral medicines) और दर्द निवारक क्रीम या दवाओं का सुझाव देते हैं। इन दवाइयों को यदि छाले निकलने के शुरुआती 72 घंटों के भीतर शुरू कर दिया जाए, तो संक्रमण को तेजी से नियंत्रित किया जा सकता है और गंभीर दर्द से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही, डायबिटीज के मरीजों के लिए यह सबसे ज्यादा जरूरी है कि वे अपने ब्लड शुगर लेवल को सख्ती से कंट्रोल में रखें, क्योंकि बढ़ा हुआ ग्लूकोज लेवल घावों को भरने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है और इन्फेक्शन को और अधिक फैला सकता है।
सावधानी और बचाव: स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर रखें इम्युनिटी मजबूत
चूंकि शिंगल्स मुख्य रूप से कमजोर इम्युनिटी और तंत्रिका तंत्र की कमजोरी के कारण होता है, इसलिए इससे बचाव का सबसे बेहतर तरीका अपनी जीवनशैली में सुधार करना है। संतुलित और पौष्टिक आहार लें, नियमित रूप से योग और हल्का व्यायाम करें, और पर्याप्त मात्रा में नींद लें ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे। इसके अलावा, मेडिकल साइंस में अब शिंगल्स से बचाव के लिए टीके (Shingles Vaccine) भी उपलब्ध हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह पर विशेषकर बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों को लगवाया जा सकता है। शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाले असामान्य दर्द या पानी वाले दानों को कभी भी मामूली त्वचा की एलर्जी न समझें, बल्कि सतर्कता बरतें ताकि समय रहते किसी भी गंभीर खतरे से बचा जा सके।