अंडे से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का डर छोड़ें... रोज सुबह बस 2 अंडे खाने से शरीर में दिखेंगे ये 5 जादुई बदलाव
सुपरफूड की फेहरिस्त में अंडे को हमेशा से ही एक बेहद खास स्थान हासिल रहा है। इसके बावजूद कई सालों तक अंडों को लेकर आम जनता और फिटनेस प्रेमियों के मन में एक बड़ी उलझन बनी रही। कभी इसे प्रोटीन का सबसे सस्ता और बेहतरीन स्रोत बताया गया, तो कभी इसके पीले हिस्से (यॉक) को बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का मुख्य विलेन मान लिया गया। लेकिन अब आधुनिक मेडिकल रिसर्च और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स की राय ने इस भ्रम को पूरी तरह साफ कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर आपकी बाकी डाइट संतुलित है, तो अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए रोजाना दो अंडे खाना सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आइए विस्तार से जानते हैं कि रोजाना 2 अंडे अपनी डाइट में शामिल करने से आपके शरीर में क्या-क्या बड़े और सकारात्मक बदलाव आते हैं।
पोषक तत्वों का पावरहाउस है एक सिंगल अंडा, जानिए क्या-क्या मिलता है इससे
अंडे को प्रकृति का सबसे संपूर्ण आहार माना जाता है। एक बड़े आकार के उबले हुए अंडे में महज 70 से 72 कैलोरी होती है, लेकिन इसके भीतर लगभग 6 ग्राम हाई-क्वालिटी प्रोटीन छुपा होता है। इसके अलावा, अंडा कोलीन (Choline), बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन्स, ल्यूटिन (Lutein) और जीएक्सैंथिन (Zeaxanthin) जैसे दुर्लभ और आवश्यक पोषक तत्वों से समृद्ध होता है। ये सभी तत्व हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, आंखों की रोशनी और नर्वस सिस्टम को दुरुस्त रखने के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। हार्वर्ड हेल्थ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोटीन और गुड फैट्स से भरपूर होने के कारण अंडा खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे अनहेल्दी फूड खाने की इच्छा अपने आप कम हो जाती है।
पहले ही हफ्ते में दिखेगा बड़ा असर: भूख पर लगेगा लगाम और एनर्जी होगी बूस्ट
यदि आप हर रोज सुबह के नाश्ते में दो अंडे खाना शुरू करते हैं, तो इसके चमत्कारी फायदे आपको शुरुआती एक हफ्ते के भीतर ही अपनी भूख और एनर्जी लेवल में महसूस होने लगेंगे। चूंकि अंडे में मौजूद प्रोटीन और फैट धीरे-धीरे पचते हैं, इसलिए यह शरीर को लंबे समय तक निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है। इससे आपको दिन के समय बार-बार स्नैकिंग या जंक फूड खाने की जरूरत महसूस नहीं होगी। सबसे बड़ा फायदा तब होता है जब आप अपने सुबह के नाश्ते से मीठे सीरियल्स, पेस्ट्री, मैदा या सफेद ब्रेड को हटाकर उसकी जगह अंडों को शामिल करते हैं; इससे दोपहर तक होने वाली शुगर क्रेविंग्स पर पूरी तरह लगाम लग जाती है।
क्या वाकई डेली अंडा खाने से दिल को खतरा है? जानिए मायो क्लिनिक की रिपोर्ट
नियमित रूप से अंडे खाने के दूसरे और तीसरे हफ्ते तक शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी स्थिर होने लगता है। प्रोसेस्ड और भारी ब्रेकफास्ट की जगह उबले अंडे लेने से सुस्ती और पेट का भारीपन पूरी तरह गायब हो जाता है और आप पूरे दिन खुद को एक्टिव महसूस करते हैं। कोलेस्ट्रॉल के डर पर दुनिया की मशहूर स्वास्थ्य संस्था 'मायो क्लिनिक' (Mayo Clinic) का कहना है कि अंडे में पाया जाने वाला डाइटरी कोलेस्ट्रॉल, हमारे शरीर को उतना नुकसान नहीं पहुंचाता जितना कि प्रोसेस्ड मीट में मौजूद ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट पहुंचाते हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, अंडा खुद नुकसानदेह नहीं है, बल्कि इस बात से फर्क पड़ता है कि आप अंडे को किस चीज के साथ पकाकर खा रहे हैं।
अंडे के साथ क्या है बेस्ट और वर्स्ट कॉम्बिनेशन? भूलकर भी न करें ये गलती
अंडे के फायदों को लेकर असल चिंता का विषय अंडा नहीं, बल्कि उसके साथ खाई जाने वाली अन्य अनहेल्दी चीजें होती हैं। अक्सर लोग अंडों के साथ बेकन, सॉसेज, रिफाइंड ब्रेड, बहुत ज्यादा चीज या अत्यधिक मक्खन का इस्तेमाल करते हैं, जो असल में हार्ट रिस्क और मोटापे को बढ़ाने के मुख्य जिम्मेदार होते हैं। मायो क्लिनिक के अनुसार, अगर आप अंडों को हरी सब्जियों, ओट्स, होल ग्रेन टोस्ट, उबले हुए बीन्स या एवोकाडो जैसी फाइबर युक्त चीजों के साथ कॉम्बिनेशन बनाकर खाते हैं, तो यह दुनिया का सबसे संतुलित, पौष्टिक और हार्ट-फ्रेंडली मील बन जाता है।
इन लोगों को रोजाना 2 अंडे खाने से पहले बरतनी चाहिए थोड़ी सावधानी
भले ही रोज दो अंडे खाना एक बेहद स्वस्थ आदत है, लेकिन सेहत के नियम हर व्यक्ति पर एक समान लागू नहीं होते। न्यूट्रिशनिस्ट्स के मुताबिक, जिन लोगों को गंभीर डायबिटीज (मधुमेह) है, जिनका एलडीएल (LDL) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर पहले से ही बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है या जिनके परिवार में हार्ट अटैक व दिल की बीमारियों की पुरानी फैमिली हिस्ट्री रही है, उन्हें रोजाना दो अंडे खाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। कुछ क्लीनिकल रिसर्च में यह देखा गया है कि गंभीर डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में अत्यधिक अंडे का सेवन करने और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के जोखिम के बीच एक बारीक संबंध हो सकता है, इसलिए ऐसे संवेदनशील मामलों में ब्लड रिपोर्ट के आधार पर ही अंडों की संख्या तय करना समझदारी है।