ब्रेस्ट कैंसर क्या है और डॉक्टर किस तरह तय करते हैं इसका सटीक इलाज
स्तन कैंसर यानी ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) महिलाओं में होने वाली सबसे आम लेकिन गंभीर बीमारियों में से एक है, हालांकि सही समय पर पहचान होने पर इसका पूरी तरह से इलाज संभव है। जब डॉक्टर किसी मरीज में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि करते हैं, तो सबसे पहले वे बीमारी के चरण (Stage), कैंसर सेल्स के प्रकार और मरीज की ओवरऑल हेल्थ का गहन अध्ययन करते हैं। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज किसी एक तरीके से नहीं, बल्कि कई अत्याधुनिक तकनीकों और चिकित्सा पद्धतियों के संयोजन (Combined Therapy) से किया जाता है। मुख्य रूप से इसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, हार्मोनल थेरेपी और टारगेटेड थेरेपी शामिल होती हैं। ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) की टीम मरीज की रिपोर्ट जैसे बायोप्सी, मैमोग्राफी और पेट स्कैन (PET Scan) के आधार पर ही यह तय करती है कि पहले सर्जरी की जाएगी या फिर कीमोथेरेपी देकर ट्यूमर के आकार को छोटा किया जाएगा, ताकि इलाज ज्यादा से ज्यादा प्रभावी हो सके।
कितनी लंबी चलती है कीमोथेरेपी और क्या होती है इसके साइकिल्स की पूरी प्रक्रिया?
ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के मन में सबसे बड़ा सवाल कीमोथेरेपी (Chemotherapy) की अवधि को लेकर होता है। कीमोथेरेपी में दवाइयों के जरिए कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर में कीमोथेरेपी का इलाज 3 महीने से लेकर 6 महीने तक चल सकता है, जो मरीज की बीमारी के स्टेज पर निर्भर करता है। कीमोथेरेपी एक बार में लगातार नहीं दी जाती, बल्कि इसे साइकिल्स (Cycles) में बांटा जाता है। आमतौर पर एक साइकिल के बाद मरीज के शरीर को रिकवर होने के लिए 2 से 3 हफ्ते का समय दिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि मरीज को 4 या 8 साइकिल्स की जरूरत है, तो हर साइकिल के बीच 14 से 21 दिनों का गैप रखा जाता है। एडजुवेंट कीमोथेरेपी (सर्जरी के बाद दी जाने वाली) शरीर में बचे-खुचे कैंसर सेल्स को खत्म करती है, जबकि नियो-एडजुवेंट कीमोथेरेपी सर्जरी से पहले ट्यूमर का साइज कम करने के लिए दी जाती है।
सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी: ब्रेस्ट कैंसर को शरीर से उखाड़ फेंकने के दो मुख्य हथियार
कीमोथेरेपी के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy) की बहुत बड़ी भूमिका होती है। सर्जरी दो प्रकार की होती है—पहली 'लम्पेक्टमी' (Lumpectomy), जिसमें केवल कैंसर वाले ट्यूमर और उसके आसपास के थोड़े से हिस्से को निकाला जाता है ताकि ब्रेस्ट को बचाया जा सके; और दूसरी 'मैस्टेक्टमी' (Mastectomy), जिसमें पूरे स्तन को हटा दिया जाता है। सर्जरी के बाद, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कैंसर दोबारा न लौटे, मरीज को रेडिएशन थेरेपी दी जाती है। रेडिएशन में हाई-एनर्जी एक्स-रे किरणों की मदद से बचे हुए कैंसर सेल्स को नष्ट किया जाता है। रेडिएशन का सेशन आमतौर पर हफ्ते में 5 दिन होता है और यह प्रक्रिया 3 से 6 हफ्तों तक चलती है, जो बिल्कुल दर्द रहित होती है।
टारगेटेड थेरेपी, हार्मोनल बदलाव और इलाज के बाद की रिकवरी लाइफस्टाइल
आधुनिक मेडिकल साइंस के विकास के साथ अब ब्रेस्ट कैंसर का इलाज पहले से कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित हो गया है। जिन महिलाओं में हार्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव कैंसर पाया जाता है, उन्हें कई सालों (5 से 10 साल) तक हार्मोनल थेरेपी की गोलियां दी जाती हैं ताकि कैंसर के दोबारा पनपने की संभावना शून्य हो सके। इसके अलावा HER2 पॉजिटिव कैंसर के लिए टारगेटेड दवाइयां दी जाती हैं जो केवल कैंसर सेल्स पर हमला करती हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचातीं। हालांकि कीमोथेरेपी के दौरान बाल झड़ना, थकान, उल्टी और कमजोरी जैसे साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं, लेकिन इलाज खत्म होने के कुछ हफ्तों बाद बाल वापस आ जाते हैं और मरीज सामान्य जीवन जीने लगता है। सही खानपान, सकारात्मक सोच, नियमित फॉलो-अप और शुरुआती जांच ही ब्रेस्ट कैंसर से पूरी तरह से जीतने की सबसे बड़ी कुंजी है।