गाजियाबाद: हाजी सलमान की मां और भाई की बढ़ी मुश्किलें

गाजियाबाद: हाजी सलमान की मां और भाई की बढ़ी मुश्किलें

उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिलों में शुमार गाजियाबाद से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज कानूनी खबर सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर चर्चित रहे हाजी सलमान के परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कोर्ट-कचहरी के गलियारों से आई ताजा जानकारी के अनुसार, विशेष एससी-एसटी कोर्ट (Special SC/ST Court) ने हाजी सलमान की मां और उनके भाई द्वारा दायर की गई अग्रिम जमानत याचिकाओं (Anticipatory Bail Applications) को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब आरोपियों की गिरफ्तारी पर मंडरा रहा खतरा और अधिक गहरा गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि स्थानीय राजनीति और सामाजिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

क्या है पूरा मामला और किन धाराओं के तहत दर्ज किया गया है मुकदमा?

यह पूरा कानूनी विवाद कुछ समय पहले गाजियाबाद के एक स्थानीय थाने में दर्ज कराए गए गंभीर संगीन मामलों और आपसी विवाद से जुड़ा हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वादी पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में कई गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसमें मारपीट, धमकी देने के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी-एसटी एक्ट की कड़क धाराएं भी शामिल हैं। इस मामले के सामने आने के बाद से ही पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही थी। गिरफ्तारी से बचने और कानूनी सुरक्षा पाने के लिए हाजी सलमान के भाई और उनकी मां की तरफ से सेशन कोर्ट से होते हुए विशेष एससी-एसटी कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए गुहार लगाई गई थी, ताकि उन्हें पुलिस हिरासत से तुरंत राहत मिल सके।

अदालत में वकीलों की लंबी दलीलें और जज द्वारा जमानत याचिका खारिज करने का मुख्य आधार

विशेष एससी-एसटी कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत के सामने यह दलील पेश की थी कि उनके मुवक्किलों को इस मामले में पूरी तरह से झूठा फंसाया गया है और उनका इस घटना से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी परिवार कानून का सहयोग करने के लिए तैयार है, इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। हालांकि, दूसरी ओर अभियोजन पक्ष (Prosecution) और वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपराध की गंभीरता, एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों और सबूतों का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश ने मामले की नजाकत और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए माना कि इस स्टेज पर आरोपियों को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा, जिसके बाद अदालत ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।

अब आगे क्या होगी पुलिस की कार्रवाई और परिवार के पास क्या हैं कानूनी विकल्प?

विशेष एससी-एसटी कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद अब गाजियाबाद पुलिस और एसआईटी (SIT) के सामने रास्ता साफ हो गया है। पुलिस कभी भी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनके ठिकानों पर छापेमारी कर सकती है। हालांकि, कानूनी जानकारों का यह भी कहना है कि आरोपी पक्ष के पास इस आदेश के खिलाफ उच्च अदालत यानी माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में अपील करने का विकल्प अभी भी खुला हुआ है। यदि वे चाहें तो हाई कोर्ट से राहत पाने के लिए नई याचिका दाखिल कर सकते हैं। लेकिन जब तक ऊपर की अदालत से कोई अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) नहीं मिल जाता, तब तक गिरफ्तारी की तलवार उनके सिर पर लगातार लटकती रहेगी। गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में इस हाई-प्रोफाइल कानूनी कार्रवाई को लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल को भी सतर्क कर दिया गया है।