ऑनलाइन गेमिंग में पैसे हारने के बाद 17 साल के छात्र ने दी जान, मरने से पहले लिखा इमोशनल लेटर

ऑनलाइन गेमिंग में पैसे हारने के बाद 17 साल के छात्र ने दी जान, मरने से पहले लिखा इमोशनल लेटर

आज के आधुनिक दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट बच्चों की पढ़ाई और मनोरंजन का एक बड़ा साधन बन चुके हैं, लेकिन यही तकनीक कई बार परिवारों के लिए अभिशाप साबित होती है। ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी का ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां महज 17 साल के एक नौवीं कक्षा के छात्र ने अपनी जिंदगी इसलिए खत्म कर ली क्योंकि वह ऑनलाइन गेमिंग में भारी मात्रा में पैसे हार चुका था। मरने से पहले इस होनहार छात्र ने एक बेहद मर्मस्पर्शी और इमोशनल सुसाइड नोट छोड़ा, जिसकी एक-एक लाइन पढ़कर किसी भी माता-पिता का कलेजा कांप जाएगा। अपने सुसाइड नोट में उसने अपनी बहन को संबोधित करते हुए लिखा, 'मम्मी-पापा का ध्यान रखना दीदी... मैं अपनी गलती की सजा भुगत रहा हूं।' इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर समाज के सामने उस गंभीर खतरे को ला खड़ा किया है जो चुपचाप हमारे घरों में घुसकर बच्चों की जिंदगियों को लील रहा है। डिजिटल युग के इस दौर में ऑनलाइन गेमिंग की लत किस तरह हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ रही है, इस पर अब गहराई से सोचने और कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है।

आज के समय में युवाओं और कम उम्र के स्कूली बच्चों के बीच ऑनलाइन वीडियो गेम्स और मोबाइल पर खेले जाने वाले सट्टेबाजी वाले गेम्स का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। शुरुआत में यह गेम्स बच्चों के लिए महज मनोरंजन या टाइम पास का जरिया लगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह एक ऐसी खतरनाक लत बन जाते हैं जिससे बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में भी 17 वर्षीय छात्र ऑनलाइन गेमिंग के इस दलदल में इस कदर फंस चुका था कि उसने गेम जीतने और अपने हारे हुए पैसे को वापस पाने की चाह में धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर कर्ज और उधारी ले ली। जब आर्थिक दबाव हद से ज्यादा बढ़ गया और उसे यह समझ आ गया कि वह इस जाल से कभी बाहर नहीं निकल पाएगा, तो अवसाद के इस दौर में उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स में इस तरह के मनोवैज्ञानिक एल्गोरिदम डिजाइन किए जाते हैं जो बच्चों और युवाओं को बार-बार खेलने के लिए उकसाते हैं और उन्हें वित्तीय नुकसान के दलदल में धकेल देते हैं।

घटना के बाद जब पुलिस ने मृतक छात्र के कमरे की तलाशी ली, तो वहां से एक ऐसा खत बरामद हुआ जिसने मौके पर मौजूद हर एक पुलिसकर्मी और परिवार के सदस्यों की आंखें नम कर दीं। अपने हाथ से लिखे गए इस आखिरी पत्र में उस नाबालिग छात्र ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि वह अपनी गलतियों के कारण इस परिस्थिति में पहुंचा है और अब उसके पास जीने का कोई रास्ता नहीं बचा है। उसने अपनी बड़ी बहन को पुकारते हुए लिखा कि अब वही उसके माता-पिता का सहारा बनेगी और उनका ख्याल रखेगी। यह सुसाइड नोट इस बात का जीता-जागता सबूत है कि कैसे मानसिक तनाव और अकेलापन बच्चों को मौत के मुंह में धकेल देता है। बच्चों के मन में चल रहे इस उथल-पुथल और उनकी डिजिटल गतिविधियों पर अगर समय रहते परिवार के बुजुर्गों या अभिभावकों की नजर पड़ जाती, तो शायद आज एक घर का चिराग इस तरह से नहीं बुझता। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि हमें अपने बच्चों के साथ संवाद को मजबूत करना होगा ताकि वे किसी भी मानसिक दबाव में ऐसा खौफनाक कदम उठाने से पहले अपनों से बात कर सकें।

इस दुखद हादसे ने देश भर के माता-पिता और शिक्षाविदों के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपने बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने में पूरी तरह विफल हो रहे हैं? आज के समय में हर हाथ में स्मार्टफोन और इंटरनेट की आसान पहुंच ने बच्चों को डिजिटल अखाड़े में अकेला छोड़ दिया है, जहां वे माता-पिता की नजरों से दूर ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के जाल में फंसते चले जाते हैं। सरकार और कानून-प्रशासन द्वारा ऐसे कई ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, इसके बावजूद नए-नए नामों से यह जाल बच्चों तक पहुंच ही जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि स्कूल स्तर से लेकर घरों तक बच्चों को डिजिटल एडिक्शन के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जाए। माता-पिता को अपने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल की आदतों, उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों और वित्तीय लेन-देन पर पैनी नजर रखनी होगी ताकि किसी भी युवा को ऑनलाइन गेमिंग जैसे शैतानी जाल का शिकार होने से समय रहते बचाया जा सके।