सरकारी बस से धक्का देकर उतारी गईं 8 आदिवासी छात्राएं, आक्रोशित परिजनों ने किया चक्का जाम
तमिलनाडु के पुडुकोट्टई जिले से एक बेहद संवेदनशील और आक्रोश पैदा करने वाली घटना सामने आई है। कीरनूर क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली आदिवासी समुदाय की आठ छात्राओं को बुधवार को एक सरकारी बस से कथित तौर पर धक्का देकर नीचे उतार दिया गया।
अचानक नीचे गिराए जाने के कारण सभी छात्राएं चोटिल हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों और स्थानीय आदिवासी समुदाय में भारी रोष फैल गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम कर बस चालक और परिचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
भीड़भाड़ का हवाला देकर जबरन नीचे गिराने का आरोप
पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुडुकोट्टई जिले के रंगम्माल सत्रम के समीप कीरनूर इलाके में रहने वाली ये आठ छात्राएं रोज की तरह स्कूल जाने के लिए पुडुकोट्टई रूट की सरकारी बस का इंतजार कर रही थीं।
जैसे ही बस स्टॉप पर रुकी, छात्राओं ने उसमें सवार होने का प्रयास किया। बस में पहले से ही मुसाफिरों की भारी भीड़ थी। आरोप है कि बस के परिचालक (कंडक्टर) ने पहले तो छात्राओं को बस में दाखिल होने से रोका और फिर कथित तौर पर उन्हें जबरन धक्का देकर नीचे गिरा दिया। अचानक सड़क पर गिरने की वजह से छात्राओं के हाथ, पैर और घुटनों में चोटें आईं।
सड़क पर उतरे परिजन, हंगामे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस
छात्राओं के साथ हुए इस दुर्व्यवहार की खबर जब उनके गांव तक पहुंची, तो बड़ी संख्या में परिजन और आदिवासी समाज के लोग मौके पर जुट गए। आक्रोशित लोगों ने बस चालक और परिचालक को घेरकर तीखा विरोध जताया। इसके बाद परिजनों ने मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्का जाम कर दिया, जिससे पूरे इलाके में वाहनों की लंबी कतार लग गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर कानून व्यवस्था संभाली। आपातकालीन एंबुलेंस बुलाकर घायल सभी आठ छात्राओं को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी सरकारी अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
'बदलाव की ओर बढ़ रहे कदम, फिर ऐसा अपमान क्यों?'
इस अप्रिय घटना ने आदिवासी समुदाय के आत्मसम्मान और उनकी संघर्ष यात्रा को गहरी चोट पहुंचाई है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके समाज में लंबे समय तक अशिक्षा का अंधकार रहा और पिछली पीढ़ियों को पढ़ाई-लिखाई का अवसर तक नहीं मिला। अब जाकर नई पीढ़ी के लड़के और लड़कियां रूढ़ियों को तोड़कर सरकारी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। ग्रामीणों ने गर्व के साथ बताया कि हाल ही में उनके समुदाय की एक बेटी ने नर्सिंग की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की थी, जिसकी खुशी पूरे समाज ने उत्सव की तरह मनाई थी।
सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
समुदाय के बुजुर्गों और अभिभावकों ने कहा कि जब उनके बच्चे शिक्षा हासिल कर एक बेहतर और स्वाभिमानी भविष्य गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, उस समय सार्वजनिक परिवहन और प्रशासनिक तंत्र से संवेदनशीलता व सहयोग की उम्मीद की जाती है। इस प्रकार का अमानवीय बर्ताव पढ़ने जा रही बच्चियों के भीतर गहरे मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना को जन्म देता है। परिजनों ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लापरवाह बस कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छात्राओं और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।