सौरव दास-आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने पर भड़के अभिजीत दिपके

सौरव दास-आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने पर भड़के अभिजीत दिपके

राजधानी दिल्ली के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के युवा नेताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा अब अत्यंत गंभीर रूप ले चुका है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में लिए गए सीजेपी के वरिष्ठ नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट द्वारा दो अतिरिक्त दिनों के लिए फिर से न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। पांच दिनों की शुरुआती जेल अवधि समाप्त होने के बाद जब समर्थकों को उनकी रिहाई की उम्मीद थी, तब अदालत के इस फैसले ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आक्रोशित कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तीखा हमला बोलते हुए सत्ता पक्ष और पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।

कानूनी आधार खत्म फिर भी जेल में रखने की साजिश: अभिजीत दिपके का प्रशासन पर सीधा और तीखा हमला

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया और मीडिया माध्यमों के जरिए अपना गुस्सा जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के पास दोनों नेताओं को हिरासत में रखने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन अदालती प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं ताकि उनकी गैर-कानूनी गिरफ्तारी को लंबा खींचा जा सके। दिपके ने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या सरकार उन्हें जेल में बंद रखकर राजनीतिक रूप से और अधिक मजबूत बनाना चाहती है? उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े अपराध के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं को इस तरह जेल में रखना लोकतंत्र की मूल आत्मा पर आघात है।

कोर्ट में धमकी भरे संदेश का मामला और पुलिस की दलीलें: एसईएम अदालत में घंटों चली लंबी बहस

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत के समक्ष दलील दी कि यदि दोनों नेताओं को इस समय रिहा किया जाता है, तो वे दोबारा जंतर-मंतर या अन्य संवेदनशील स्थानों पर पहुंचकर कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं। वहीं, सुनवाई करने वाले एसईएम अधिकारी को एक धमकी भरा संदेश मिलने का मामला भी सामने आया, जिसके बाद संसद मार्ग थाने में गैर-संज्ञेय अपराध (NCR) के तहत केस दर्ज किया गया है। सीजेपी की लीगल टीम और वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट में पुलिस के इस दावे का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि रिहाई की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी थीं, लेकिन पुलिस जानबूझकर नए-नए बहाने बनाकर प्रक्रिया को अटका रही है।

जन-आंदोलन को दबाने की कोशिश या बढ़ता राजनीतिक संकट? सीजेपी ने दी देशव्यापी लड़ाई की चेतावनी

अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस और सरकार की इस प्रकार की दमनकारी कार्रवाइयों से उनकी पार्टी और कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद सीजेपी अपनी भावी कानूनी और राजनीतिक रणनीति का आधिकारिक ऐलान करेगी। पार्टी ने इस मुद्दे पर देश के शीर्ष कानून विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं से संपर्क साधने की बात कही है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को लंबे समय तक जेल में रखने का यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।