मुसलमानों पर ठीकरा नहीं फोड़ सकते..': अल्बानिया में विद्रोह, समर्थन में कूदी कांग्रेस
दक्षिण-पूर्वी यूरोपीय देश अल्बानिया में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के बहुचर्चित और विवादास्पद $1.4 बिलियन के लग्जरी टूरिज्म प्रोजेक्ट को लेकर शुरू हुआ जन-आंदोलन अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघकर भारत की राजनीति में भी गरमाने लगा है। पिछले कई दिनों से अल्बानिया की राजधानी तिराना समेत विभिन्न तटीय इलाकों में प्रधानमंत्री एदी रामा (Edi Rama) की सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां आम नागरिक, पर्यावरणविद और विपक्षी दल इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय धरोहर की लूट और तटीय पर्यावरण का विनाश बताकर सड़कों पर उतरे हुए हैं। इस वैश्विक घटनाक्रम के बीच अब भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी अल्बानियाई जनता के पक्ष में कूद पड़ी है। कांग्रेस प्रवक्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अल्बानिया के नागरिकों के लोकतांत्रिक और पर्यावरणीय अधिकारों का पुरजोर समर्थन किया है, साथ ही इस वैश्विक संकट को धार्मिक रंग देने की कोशिशों की कड़ी निंदा की है।
दक्षिणपंथी ताकतों पर कांग्रेस का करारा प्रहार: जन-आंदोलन को सांप्रदायिक रूप देने की साजिश का पर्दाफाश
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अल्बानिया की स्थिति पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि यूरोप में हो रहे इस जन-विद्रोह की असली वजह कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार, पर्यावरण का विनाश और सत्ता का गलत इस्तेमाल है। कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सोशल मीडिया और वैश्विक मंचों पर कुछ खास विचारधारा के लोग और दक्षिणपंथी तंत्र इस विरोध प्रदर्शन को एक बार फिर मुस्लिम समुदाय से जोड़कर दुष्प्रचार फैलाने में जुट गए हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि अल्बानिया की जनता अपने ऐतिहासिक द्वीपों और संरक्षित प्राकृतिक अभयारण्यों को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, न कि किसी धार्मिक एजेंडे के तहत। नेताओं ने कहा कि हर वैश्विक असंतोष का ठीकरा मुसलमानों पर फोड़ने की आदत अब बंद होनी चाहिए, क्योंकि यह लड़ाई पूरी तरह से आम नागरिकों बनाम विदेशी पूंजीपतियों के बीच की जंग बन चुकी है।
जेरेड कुशनर के प्रोजेक्ट और क्रोनी कैपिटलिज्म पर उठाए सवाल: वैश्विक पर्यावरण कानूनों की अनदेखी का आरोप
अल्बानिया के साज़ान द्वीप (Sazan Island) और ज़्वर्नेक क्षेत्र में बन रहे इस अल्ट्रा-लग्जरी रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के पीछे अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर का निवेश समूह (Affinity Partners) शामिल है। कांग्रेस ने इस मामले को रेखांकित करते हुए आरोप लगाया कि दुनिया भर में शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़े पूंजीपति अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके विकासशील और छोटे देशों के नियमों को तोड़ रहे हैं। अल्बानियाई प्रधानमंत्री एदी रामा पर तंज कसते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनता के विरोध के बावजूद पूंजीपतियों के वित्तीय हितों को प्राथमिकता देना लोकतंत्र के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। पार्टी ने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और यूरोपीय संघ (EU) को तुरंत हस्तक्षेप करके इस प्रोजेक्ट की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत पर प्रभाव: कांग्रेस की प्रतिक्रिया के क्या हैं राजनीतिक मायने?
अल्बानिया के घरेलू राजनीतिक संकट पर भारतीय कांग्रेस पार्टी द्वारा दिया गया यह आक्रामक बयान केवल अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति का विषय नहीं है, बल्कि इसके गहरे घरेलू राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। भारतीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए क्रोनी कैपिटलिज्म (गठजोड़ पूंजीवाद), पर्यावरण संरक्षण और अल्पसंख्यकों के खिलाफ फैलाए जाने वाले नैरेटिव पर एक साथ सत्ता पक्ष को घेरने की रणनीति अपना रही है। यूरोप के एक छोटे से देश में भड़की यह राजनीतिक आग अब जिस तरह से वैश्विक और भारतीय राजनीति में गूंज रही है, उसने यह साफ कर दिया है कि कॉरपोरेट सौदों और जन-आंदोलनों से जुड़े मुद्दे अब किसी एक देश तक सीमित नहीं रहे। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस मामले पर अन्य राजनीतिक दल और कूटनीतिक विशेषज्ञ क्या रुख अपनाते हैं।