प्रधानमंत्री मोदी और मार्क कार्नी की ऐतिहासिक बातचीत
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतिक गलियारों से एक बेहद सकारात्मक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे तनावपूर्ण और ठंडे पड़े रिश्तों की बर्फ अब तेजी से पिघलती हुई दिखाई दे रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हाल ही में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत उच्चस्तरीय वार्ता संपन्न हुई है। इस द्विपक्षीय बातचीत के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने आपसी कूटनीतिक संबंधों को एक नई दिशा देने और पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर भविष्य की मजबूत साझेदारी की नींव रखने पर खुलकर चर्चा की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक परिपक्वता और ओटावा में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद यह संवाद दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खोलने वाला साबित हुआ है, जिससे ग्लोबल साउथ और पश्चिमी देशों के बीच एक नया संतुलन बनता हुआ नजर आ रहा है।
व्यापार, आर्थिक निवेश और मुक्त बाजार साझेदारी को बढ़ावा देने का संकल्प
इस उच्चस्तरीय शिखर वार्ता का सबसे अहम और व्यावहारिक पहलू दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को फिर से पटरी पर लाना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मार्क कार्नी के बीच हुई इस चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कैसे भारत और कनाडा के व्यापारिक घराने एक-दूसरे के बाजारों का अधिक से अधिक लाभ उठा सकते हैं। कनाडा की अर्थव्यवस्था में भारतीय पेशेवरों, तकनीकी विशेषज्ञों और छात्रों का बड़ा योगदान रहा है, वहीं कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक कृषि तकनीक की प्रचुरता है। दोनों नेताओं ने अटके हुए व्यापारिक समझौतों को गति देने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने और कनाडा के बड़े पेंशन फंड्स को भारत के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) तथा ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई है।
क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर चर्चा
कनाडा और भारत के बीच आपसी रिश्तों में पूर्व में आई कड़वाहट का एक बड़ा कारण वहां की धरती पर पनपने वाली भारत विरोधी गतिविधियां और चरमपंथी तत्व रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के साथ इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद स्पष्ट और दो टूक बात रखी है। वार्ता के दौरान इस बात पर गंभीर मंथन हुआ कि दोनों देश आपसी संप्रभुता का सम्मान करते हुए सीमा पार आतंकवाद, संगठित अपराध और आंतरिक सुरक्षा के खतरों से निपटने के लिए अपनी खुफिया एजेंसियों और पुलिस बलों के बीच संवाद को और अधिक मजबूत करेंगे। प्रधानमंत्री कार्नी की तरफ से भी यह सकारात्मक संकेत दिए गए हैं कि कनाडा अपनी धरती का इस्तेमाल किसी भी मित्र देश के खिलाफ होने से रोकने के लिए कानूनी ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास की एक नई नींव खड़ी हो सकेगी।
वैश्विक भू-राजनीति, जलवायु परिवर्तन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भविष्य
वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और कनाडा दोनों ही देश इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के पक्षधर हैं। मोदी और कार्नी की बातचीत में केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक ही सीमित नहीं रहा गया, बल्कि वैश्विक मंचों पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change), सतत विकास (Sustainable Development), ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी इनोवेशन जैसे गंभीर विषयों पर भी आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। भारत जिस प्रकार वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज बनकर उभर रहा है और कनाडा जी-7 समूह का एक महत्वपूर्ण सदस्य है, उन दोनों की यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बड़े फैसलों को प्रभावित करने का माद्दा रखती है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के मंत्रियों और उच्चाधिकारियों के बीच होने वाली बैठकों से इस नए कूटनीतिक समझौते को जमीन पर उतारने का काम तेजी से किया जाएगा।