पुतिन ने की पीएम मोदी की शांति पहल की जोरदार तारीफ
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच से इस समय भारत के बढ़ते वैश्विक कद, मजबूत नेतृत्व और कूटनीतिक साख को लेकर दुनिया भर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर खुले तौर पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति और कूटनीति वाली पहल की अत्यधिक प्रशंसा की है, जिससे वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को एक नई और मजबूत दिशा मिली है। दूसरी ओर, देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मंच से इस बात पर गर्व व्यक्त किया है कि आज प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण भारत दुनिया की सबसे भरोसेमंद और सशक्त आवाज बनकर उभरा है। जब दुनिया के महाशक्तियां आपसी संघर्षों और तनाव के दौर से गुजर रही हैं, ऐसे में भारत की यह निष्पक्ष, संतुलित और शांति समर्थक नीति पूरी मानवता के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित हो रही है। इस कूटनीतिक घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि आज का नया भारत अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि दुनिया भर के देशों को जोड़ने वाला एक मजबूत और विश्वसनीय सूत्रधार बन चुका है। मास्को से लेकर नई दिल्ली तक गूंजती इन प्रशंसाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत का प्रभाव अब ऐतिहासिक रूप से सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा पीएम मोदी की शांति पहलों की सराहना के मायने
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति यह सकारात्मक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब यूरोप और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारी तनाव और कूटनीतिक दूरियां बनी हुई हैं। पुतिन ने कई मंचों पर इस बात को स्वीकार किया है कि भारत हमेशा से किसी भी युद्ध या अंतरराष्ट्रीय विवाद को सुलझाने के लिए बल प्रयोग के बजाय संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि "यह युद्ध का युग नहीं है," और उनकी इसी निष्पक्ष मध्यस्थता वाली सोच ने वैश्विक नेताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। जब भारत ने रूस और यूक्रेन दोनों देशों के साथ अपने पारंपरिक रूप से गहरे और संतुलित संबंधों को बनाए रखते हुए शांति की अपील की, तो दुनिया के तमाम देशों को यह समझ आ गया कि भारत किसी भी एक खेमे में बंधकर काम करने के बजाय वैश्विक शांति और स्थिरता के सार्वभौमिक सिद्धांतों को प्राथमिकता देता है। पुतिन द्वारा की गई यह सराहना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मॉस्को भी यह अच्छी तरह समझता है कि यदि दुनिया में कोई ऐसा देश है जो निष्पक्ष भाव से शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, तो वह केवल भारत ही है।
गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान: 'भारत बना दुनिया की सबसे भरोसेमंद आवाज'
देश के गृह मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान भारत की बदलती हुई वैश्विक स्थिति और कूटनीतिक सफलताओं का जिक्र करते हुए बहुत ही गर्व के साथ कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए एक भरोसेमंद वैश्विक आवाज बन चुका है। अमित शाह ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी आंतरिक नीतियों को मजबूत करने के साथ-साथ बाहरी दुनिया में भी अपनी एक ऐसी अमिट छाप छोड़ी है कि आज संकट के समय हर छोटा और बड़ा देश भारत की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखता है। चाहे वह कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया भर के देशों को वैक्सीन और दवाइयां पहुंचाना हो, या फिर ग्लोबल साउथ के देशों के हितों की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूरी ताकत से उठाना हो, भारत ने हमेशा वसुधैव कुटुंबकम की प्राचीन भारतीय संस्कृति के आदर्शों का पालन किया है। गृह मंत्री के इस बयान ने देश के करोड़ों नागरिकों के मन में यह विश्वास पैदा किया है कि आज भारत की कूटनीति केवल अपने राष्ट्रीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरी दुनिया में मानवता, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
वैश्विक कूटनीति का नया केंद्र और रणनीतिक स्वायत्तता की शानदार मिसाल
आज के दौर में जब दुनिया शीत युद्ध के बाद के सबसे बड़े भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है, भारत ने अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की नीति को जिस बेहतरीन तरीके से निभाया है, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जा रही है। एक तरफ जहां भारत ने अमेरिका, पश्चिमी देशों, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ क्वाड (QUAD) और अन्य मंचों पर अपनी सामरिक और आर्थिक साझेदारी को बेहद मजबूत किया है, वहीं दूसरी तरफ रूस के साथ अपने दशकों पुराने और भरोसेमंद ऊर्जा तथा रक्षा संबंधों को भी पूरी गरिमा के साथ कायम रखा है। कई विश्लेषकों का यह मानना था कि भारत पर पश्चिम देशों का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के अडिग नेतृत्व ने यह साबित कर दिया कि भारत अपनी विदेश नीति किसी अन्य देश के दबाव में तय नहीं करता, बल्कि वह केवल अपने 140 करोड़ देशवासियों के हितों और वैश्विक शांति को सर्वोपरि रखता है। यही कारण है कि आज रूस जैसे महाशक्तिशाली देश भी भारत की शांति पहल का सम्मान करते हैं और वैश्विक मंचों पर भारत की हर बात को बहुत ही गंभीरता और आदर के साथ सुना जाता है।
नए भारत का उदय और भविष्य की वैश्विक चुनौतियों में नेतृत्व की भूमिका
पुतिन द्वारा पीएम मोदी की शांति पहल की तारीफ और अमित शाह के इस दावे कि भारत दुनिया की भरोसेमंद आवाज बन चुका है, इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले भविष्य में वैश्विक राजनीति की धुरी एशिया और विशेषकर भारत के इर्द-गिर्द घूमने वाली है। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई, आर्थिक सुधार और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत ने जो नेतृत्व दिखाया है, उसने पूरी दुनिया के विकसित और विकासशील देशों को यह सिखाया है कि कैसे गरीबों और पिछड़ों के कल्याण के साथ-साथ तकनीकी विकास को आगे बढ़ाया जा सकता है। भारत की यह बढ़ती हुई कूटनीतिक ताकत न केवल देश के भीतर आर्थिक विकास और निवेश के नए रास्ते खोल रही है, बल्कि दुनिया के हर कोने में रह रहे भारतीयों के मान-सम्मान को भी कई गुना बढ़ा रही है। आने वाले समय में जब भी दुनिया किसी बड़े आर्थिक या राजनीतिक संकट का सामना करेगी, तो भारत की यह शांतिपूर्ण, संतुलित और मजबूत आवाज पूरी मानवता के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगी, और यही नए तथा शक्तिशाली भारत की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।