17 अक्टूबर को तुला संक्रांति, 5 घंटे 43 मिनट पुण्य काल, नोट कर लें स्नान का मुहूर्त
सनातन पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव अपनी सिंह और कन्या राशि की यात्रा को पूरा करते हुए तुला राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे 'तुला संक्रांति' (Tula Sankranti) के नाम से जाना जाता है। दक्षिण भारत, विशेष रूप से ओडिशा, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में इस पर्व को महा विषुव संक्रांति या स्थानीय परंपराओं के साथ अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष 2026 में तुला संक्रांति का यह पवित्र पर्व 17 अक्टूबर को पड़ रहा है। इस दिन सूर्य देव का राशि परिवर्तन देश भर के जातकों के जीवन, करियर और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संक्रांति के इस पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। आइए एक ग्राउंड रिपोर्टर और ज्योतिषीय विश्लेषक की नजर से जानते हैं कि इस साल तुला संक्रांति का महा-पुण्य काल कितने बजे से कितने बजे तक है और इस दिन किन विशेष वस्तुओं का दान करना सबसे फलदायी माना गया है।
तुला संक्रांति 2026 की सटीक तिथि और 5 घंटे 43 मिनट का दुर्लभ पुण्य काल मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 17 अक्टूबर 2026 को सूर्य देव तुला राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति के दिन दान-पुण्य और अनुष्ठान करने के लिए एक विशेष मुहूर्त निर्धारित होता है जिसे 'पुण्य काल' कहा जाता है। इस बार तुला संक्रांति का महा-पुण्य काल कुल 5 घंटे 43 मिनट की अवधि का होगा। इस दौरान स्नान और दान करने से सूर्य भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। जानकारों के अनुसार, साधक इस तयशुदा समयावधि के भीतर किसी भी समय पवित्र नदी के जल से स्नान कर सकते हैं या घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्नान कर सूर्य उपासना कर सकते हैं। संक्रांति के क्षण से शुरू होने वाले इस पुण्य काल में किया गया जप, तप और दान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है, इसलिए समय का यह चक्र हर श्रद्धालु के लिए बेहद खास माना गया है।
तुला संक्रांति के दिन स्नान का महत्व और सूर्य देव को अर्घ्य देने की विधि
तुला संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि किसी पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना, कावेरी या गोदावरी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और कुछ बूंदें गुलाब जल की मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय मन में पवित्र भाव रखें और सूर्य मंत्र का उच्चारण करें। स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें लाल रोली, अक्षत (चावल), लाल फूल या गुड़ डालकर उगते हुए सूर्य देव को 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जाप करते हुए अर्घ्य दें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है, नेत्र ज्योति तेज होती है और करियर में आ रही तमाम बाधाएं दूर होती हैं।
तुला संक्रांति पर इन विशेष वस्तुओं का दान करने से बरसती है मां लक्ष्मी की कृपा
दान का सनातन संस्कृति में बहुत बड़ा महत्व बताया गया है और जब बात संक्रांति जैसे महापर्व की हो, तो दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। तुला संक्रांति के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए। इस दिन विशेष रूप से तांबे के बर्तन, गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र, मसूर की दाल, स्वर्ण या सोने से जुड़ी वस्तुएं और मौसमी फलों का दान करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। चूंकि तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, इसलिए इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, चावल, चीनी या दूध का दान करने से शुक्र ग्रह भी मजबूत होते हैं और जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। आपके द्वारा किया गया छोटा सा दान भी आपके जीवन के बड़े से बड़े कष्टों को दूर करने की क्षमता रखता है।
तुला संक्रांति के दिन क्या करें और किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
तुला संक्रांति के दिन केवल पूजा-पाठ और दान ही काफी नहीं है, बल्कि इस दिन कुछ नियमों का पालन करना भी बहुत जरूरी है। इस दिन सुबह देर तक सोने से बचना चाहिए और ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने दिन की शुरुआत ईश्वर के स्मरण के साथ करनी चाहिए। इस दिन अपने माता-पिता, बुजुर्गों और गुरुजनों का आशीर्वाद अवश्य लें, क्योंकि सूर्य देव को पिता और आत्मबल का कारक माना गया है। घर के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करने से सूर्य प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा, इस पवित्र दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन के सेवन से पूरी तरह दूर रहना चाहिए तथा सात्विक जीवन शैली अपनानी चाहिए। यदि आप इन सभी नियमों का पालन करते हुए सच्ची श्रद्धा के साथ तुला संक्रांति का यह पर्व मनाते हैं, तो आपके घर-परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास हमेशा बना रहेगा।