8 महीने में 3 बार 'घायल', फिर भी KKR के खिलाड़ी पर क्यों भरोसा

8 महीने में 3 बार 'घायल', फिर भी KKR के खिलाड़ी पर क्यों भरोसा

भारतीय क्रिकेट टीम का चयन हमेशा से ही रोमांच, उम्मीदों और कई बार हैरान करने वाले फैसलों का एक अनूठा मिश्रण रहा है। जब भी टीम इंडिया किसी बड़ी सीरीज या विदेशी दौरे के लिए अपने स्क्वाड का ऐलान करती है, तो क्रिकेट गलियारों में बहस छिड़ना लाजिमी होता है। इन दिनों भारतीय क्रिकेट हलकों में एक ऐसा ही सबसे बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर एक ऐसा खिलाड़ी जो पिछले मात्र 8 महीनों के भीतर अलग-अलग मुकाबलों और ट्रेनिंग के दौरान तीन बार गंभीर रूप से घायल हो चुका है, उसे टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं द्वारा लगातार क्यों प्राथमिकता दी जा रही है। न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टेस्ट और वनडे सीरीज (NZ vs IND) के मद्देनजर जब इस खिलाड़ी का नाम संभावितों की सूची में सबसे आगे चल रहा है, तो फैंस से लेकर क्रिकेट पंडित तक हैरान हैं कि आखिर इस खिलाड़ी में ऐसी कौन सी जादुई खूबी है, जिसके आगे इसकी फिटनेस की बार-बार टूटती दीवारें बेमानी साबित हो रही हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खेमे से जुड़े इस खिलाड़ी की इस कमबैक कहानी के पीछे की वजहें हर किसी को चौंका रही हैं।

फिटनेस के मोर्चे पर लगातार संघर्ष, फिर भी चयनकर्ताओं की पहली पसंद क्यों?

आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जहां फिटनेस को किसी भी खिलाड़ी के चयन का सबसे पहला और अनिवार्य पैमाना माना जाता है, वहां किसी खिलाड़ी का 8 महीने के छोटे से अंतराल में तीन बार चोटिल होना उसके करियर के लिए खतरे की घंटी माना जाता है। कभी नेट प्रैक्टिस के दौरान गेंद का हेट-ट्रिक शिकार होना, तो कभी मैच के बीच में हैमस्ट्रिंग या कंधे की चोट के कारण स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर जाना—इस खिलाड़ी ने पिछले कुछ समय में अस्पताल के चक्कर काटने से ज्यादा समय मैदान पर बिताने की कोशिश की है। इसके बावजूद जब मुख्य चयनकर्ता और कोच इस खिलाड़ी को वाइट-बॉल और रेड-बॉल दोनों प्रारूपों के लिए अननोन रिस्क लेने को तैयार दिखते हैं, तो यह बात हर किसी के गले नहीं उतरती। जानकारों का मानना है कि मैनेजमेंट इस खिलाड़ी की तकनीकी क्षमता और मैच जिताऊ काबिलियत को उसकी फिटनेस से ऊपर आ रहा है, क्योंकि जब यह खिलाड़ी पूरी तरह रिदम में होता है, तो अकेले दम पर मैच का नक्शा बदल सकता है।

KKR के इस चैंपियन खिलाड़ी का घरेलू और आईपीएल का शानदार रिकॉर्ड

इस खिलाड़ी की साख और टीम में बने रहने की सबसे बड़ी वजह उसका फ्रेंचाइजी क्रिकेट यानी आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए किया गया वह लाजवाब प्रदर्शन है, जिसने उसे रातों-रात स्टार बना दिया था। केकेआर (KKR) की पर्पल जर्सी पहनकर इस खिलाड़ी ने जब दबाव के क्षणों में अपनी टीम को कई हारी हुई बाजी जिताई, तो चयनकर्ताओं की नजरों में उसकी एक अलग और मजबूत छवि बन गई। घरेलू क्रिकेट में भी जब-जब उसे अपनी फिटनेस साबित करने का मौका मिला, उसने अपनी तकनीक और क्लास का लोहा मनवाया। विरोधी टीमों के बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ उसकी शांतचित्त बल्लेबाजी और विषम परिस्थितियों में पारी को संभालने की कला ही वह मुख्य वजह है कि टीम मैनेजमेंट उसके बार-बार चोटिल होने के जोखिम को उठाने के लिए तैयार बैठा है।

न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे और टेस्ट सीरीज में बड़ी भूमिका की तैयारी

रोहित शर्मा और गौतम गंभीर की अगुवाई वाली नई भारतीय चयन और कोचिंग यूनिट आने वाले समय में टीम का एक ऐसा ब्लूप्रिंट तैयार कर रही है जहां अनुभव और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल हो। न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी कठिन श्रृंखला के लिए टीम को मिडिल ऑर्डर या ऊपरी क्रम में एक ऐसे भरोसेमंद बल्लेबाज की सख्त जरूरत है जो पुरानी ड्यूक्स या कूकाबुरा गेंद को स्विंग के विपरीत जाकर संभाल सके। भले ही यह खिलाड़ी अपनी चोटों से जूझ रहा हो, लेकिन बीसीसीआई की मेडिकल टीम और नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) के विशेषज्ञों की निगरानी में इस पर विशेष काम किया जा रहा है ताकि इसे शत-प्रतिशत फिट करके मैदान पर उतारा जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट की कड़ियों को जोड़ने के लिए यह खिलाड़ी एक अहम कड़ी साबित हो सकता है।

क्या चयनकर्ताओं का यह दांव साबित होगा मास्टरस्ट्रोक या पड़ेगा टीम पर भारी?

किसी भी खिलाड़ी पर उसकी चोट की हिस्ट्री को नजरअंदाज करके भरोसा जताना एक बहुत बड़ा जुआ होता है, और भारतीय क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जहां यह रणनीति सफल भी हुई है और कई बार भारी भी पड़ी है। यदि यह खिलाड़ी न्यूजीलैंड के खिलाफ मैदान पर उतरकर अपने पुराने अंदाज में रन बरसाने में कामयाब हो जाता है, तो चयनकर्ताओं के इस फैसले को एक दूरदर्शी मास्टरस्ट्रोक करार दिया जाएगा। लेकिन इसके विपरीत यदि वह मैदान पर उतरते ही फिर से किसी चोट का शिकार हो जाता है, तो टीम मैनेजमेंट और बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होना तय है। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जब आधिकारिक स्क्वाड का ऐलान होगा, तो क्या इस जुझारू और बदकिस्मत खिलाड़ी को प्लेइंग इलेवन में जगह मिलती है या नहीं, क्योंकि उसका क्रिकेट करियर इस वक्त एक बेहद नाजुक और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।