यूपी पंचायत चुनाव पर बड़ा संकट! क्या फिर बढ़ेगा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल, जानें ताजा अपडेट
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के तय समय पर होने को लेकर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपने में संभावित देरी और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव फिलहाल टल सकते हैं।
स्थिति यह बन रही है कि प्रशासक के रूप में कार्यरत मौजूदा ग्राम प्रधानों को छह महीने का एक और कार्यकाल मिल सकता है, जिससे उनका कार्यकाल और आगे बढ़ सकता है।
आयोग की रिपोर्ट में देरी और जिलों का शेष दौरा
नियम के मुताबिक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल 2026 में होने थे, लेकिन समय पर चुनाव संपन्न न होने के कारण 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने पर पंचायतीराज विभाग ने उन्हें ही छह महीने के लिए प्रशासक नियुक्त कर दिया था। यह अवधि इसी साल नवंबर में पूरी हो रही है। दूसरी तरफ, पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के लिए मई में गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करनी है।
आयोग के सूत्रों के अनुसार, सभी 75 जिलों में सर्वे और भ्रमण पूरा करने में अभी कम से कम छह महीने का वक्त और लगेगा। 17 अगस्त तक केवल 22 जिलों का ही दौरा पूरा हो पाया है, जबकि 50 से अधिक जिलों में सर्वे का काम अभी बाकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को नवंबर या दिसंबर तक ही सौंप पाएगा।
विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनावों का पेच
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट भी इन देरी की एक बड़ी वजह है। मुख्य चुनाव आयुक्त पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यूपी में विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही होंगे क्योंकि यह एक संवैधानिक बाध्यता है।
इसके तहत दिसंबर के बाद राज्य में चुनाव आचार संहिता और चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी जो अप्रैल-मई तक चलेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक विधानसभा चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का होना लगभग असंभव है और इसके जून-जुलाई 2027 से पहले होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।