नवरात्र के पावन पर्व के बीच बागेश्वर के बदियाकोट मां भगवती मंदिर में लगी भीषण आग

नवरात्र के पावन पर्व के बीच बागेश्वर के बदियाकोट मां भगवती मंदिर में लगी भीषण आग

उत्तराखंड की पावन देवभूमि के बागेश्वर जिले से एक बेहद दुखद और हृदयविदारक खबर सामने आ रही है। नवरात्र के पावन पर्व और धार्मिक आस्था के उल्लास के बीच कपकोट तहसील क्षेत्र के दूरस्थ बदियाकोट गांव में स्थित प्रसिद्ध मां भगवती मंदिर परिसर में अचानक भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में पारंपरिक पहाड़ी शैली और लकड़ी की नक्काशी से बना मुख्य मंदिर का ढांचा बुरी तरह झुलस गया और जलकर खाक हो गया। पवित्र नवरात्र के दिनों में घटित इस अप्रत्याशित घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और दूर-दराज से दर्शन के लिए पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं में भारी निराशा व्याप्त हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों, पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आइए एक स्वतंत्र ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि आखिर इस दुखद हादसे के पीछे की मुख्य वजह क्या रही और वर्तमान में जमीनी हालात क्या हैं।

पहाड़ी स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना था लकड़ी से बना ऐतिहासिक मां भगवती मंदिर

बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील का बदियाकोट गांव अपने प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व के लिए पूरे कुमाऊं क्षेत्र में जाना जाता है। यहां स्थापित मां भगवती का यह मंदिर स्थानीय लोगों की अपार आस्था का केंद्र है। मंदिर का मुख्य ढांचा देवदार और अन्य कीमती लकड़ियों की सुंदर नक्काशी से तैयार किया गया था, जो उत्तराखंड की प्राचीन 'काष्ठ कला' और पारंपरिक स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना माना जाता था। नवरात्र के पावन दिनों में मां भगवती के दर्शन और अखंड ज्योति प्रज्वलित करने के लिए यहां तड़के से ही भक्तों की लंबी कतारें लगती थीं। लेकिन इस अचानक हुए अग्निकांड ने उस सदियों पुरानी भव्यता और सांस्कृतिक धरोहर को एक ही झटके में भारी नुकसान पहुंचा दिया, जिससे हर कोई स्तब्ध है।

देर रात अचानक उठी आग की लपटें और ग्रामीणों में मची भारी अफरा-तफरी

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, घटना की शुरुआत देर रात हुई जब मंदिर परिसर के भीतर से अचानक धुएं का गुबार और आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठती दिखाई दीं। क्योंकि मंदिर का अधिकांश हिस्सा प्राचीन लकड़ी से निर्मित था, इसलिए सूखी लकड़ी ने आग को बहुत तेजी से पकड़ लिया। देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर चुकी आग ने पूरे मुख्य गर्भगृह और बाहरी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। आग की विकराल लपटें देखकर गांव में अफरा-तफरी मच गई और मंदिर की घंटियां बजाकर आसपास के ग्रामीणों को इकट्ठा किया गया। स्थानीय लोगों ने बिना अपनी जान की परवाह किए पानी, बाल्टियों और मिट्टी की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया और साथ ही तुरंत तहसील प्रशासन व फायर ब्रिगेड को सूचित किया।

दमकल विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन और आग लगने के संभावित कारणों की जांच

सूचना मिलते ही कपकोट से पुलिस बल, राजस्व विभाग की टीम और दमकल विभाग की गाड़ियां दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए बदियाकोट गांव पहुंचीं। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद तड़के जाकर आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका। हालांकि, तब तक मुख्य मंदिर का लकड़ी का ढांचा और परिसर में रखी कई धार्मिक सामग्रियां जलकर राख हो चुकी थीं। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी मानव जीवन की हानि या कोई घायल नहीं हुआ। आग लगने के प्राथमिक कारणों में मंदिर में नवरात्र के अवसर पर जल रही अखंड ज्योति, दीयों से उठी चिंगारी या फिर बिजली के शॉर्ट सर्किट को मुख्य वजह माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर तकनीकी जांच के आदेश दे दिए हैं।

नवरात्र के बीच श्रद्धालुओं में भारी निराशा, मंदिर पुनर्निर्माण की उठी पुरजोर मांग

पवित्र नवरात्र के दौरान घटे इस भीषण हादसे ने स्थानीय क्षेत्रवासियों और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को गहरे सदमे में डाल दिया है। मां भगवती के भक्त इस घटना से बेहद व्यथित हैं। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और प्रभावित स्थल का जायजा लिया। स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों ने सरकार तथा पर्यटन-संस्कृति विभाग से गुहार लगाई है कि प्राचीन पहाड़ी शैली को ध्यान में रखते हुए मां भगवती मंदिर के मुख्य ढांचे का अति शीघ्र भव्य पुनर्निर्माण कराया जाए। प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया है कि क्षति का पूरा आकलन कर मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए हर संभव सरकारी मदद और त्वरित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।