बद्रीनाथ हेलिकॉप्टर हादसा: बेंगलुरु के 5 दोस्तों की ट्रिप बनी मातम

बद्रीनाथ हेलिकॉप्टर हादसा: बेंगलुरु के 5 दोस्तों की ट्रिप बनी मातम

उत्तराखंड की सर्द पहाड़ियों और आध्यात्मिक वादियों के बीच एक ऐसा दिल दहला देने वाला हादसा हुआ जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। बद्रीनाथ धाम के पास हुए एक भीषण हेलीकॉप्टर क्रैश में जान गंवाने वाले पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके और उनके ग्रुप की यह कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है। देश की आर्थिक राजधानी बेंगलुरु से चारधाम यात्रा के सपने और जीवनभर की मीठी यादें समेटने निकले 5 पक्के दोस्तों का यह हंसता-खेलता समूह जब उत्तराखंड पहुंचा, तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह छुट्टी उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित होगी।जिसने इस पूरी त्रासदी को और अधिक मर्मस्पर्शी बना दिया है।

बेंगलुरु से शुरू हुई थी सपनों की वह यात्रा जो बीच रास्ते में ही थम गई

बेंगलुरु के रहने वाले पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके और उनके चार अन्य करीबी दोस्त पिछले कई महीनों से इस धार्मिक और पर्वतीय यात्रा की योजना बना रहे थे। कड़ी मेहनत और व्यस्त प्रशासनिक ड्युटियों से समय निकालकर इन पांचों दोस्तों ने एक साथ कुछ सुकून के पल बिताने और चारधाम के दर्शन करने का फैसला किया था। बेंगलुरु से फ्लाइट पकड़कर देहरादून और फिर वहां से केदारनाथ-बद्रीनाथ की हवाई यात्रा करने के लिए उन्होंने पैकेज बुक किया था। सफर के दौरान सभी दोस्त बेहद उत्साहित थे और लगातार अपने परिवार तथा सहयोगियों को अपनी खुशियों की तस्वीरें भेज रहे थे। कौन जानता था कि जिस आसमान की ऊंचाइयों को छूकर वे रोमांचित हो रहे थे, वही आसमान उनके लिए काल बन जाएगा और कुछ ही पलों में सब कुछ खाक हो जाएगा।

साथी का वह आखिरी कॉल: "हम बस पहुंचने वाले हैं" और फिर छा गया मातम

हादसे से बमुश्किल आधे घंटे पहले अरुण सालुंके के एक साथी ने बेंगलुरु में अपने परिवार के एक सदस्य को फोन किया था। उस आखिरी कॉल में उनके साथी की आवाज में भारी उत्साह और रोमांच झलकता उन्होंने कहा था, "हम मौसम का आनंद ले रहे हैं और बस कुछ ही देर में बद्रीनाथ धाम पहुंचने वाले हैं, दर्शन करके तुरंत फोन करेंगे।" उस आखिरी बातचीत में न तो किसी खतरे का अ अभास था और न ही मौसम की किसी खराबी की चिंता। लेकिन उस फोन कॉल के कुछ ही मिनटों बाद जब मीडिया और न्यूज चैनलों पर बद्रीनाथ मार्ग के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर फ्लैश हुई, तो बेंगलुरु में बैठे परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बार-बार उन नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उधर से केवल सन्नाटा और प्रशासनिक अधिकारियों की दुखद पुष्टि ही सामने आई।

सुरक्षा मानकों और पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर उड़ानों पर फिर उठे गंभीर सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में संचालित होने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय चश्मदीदों और विशेषज्ञों का मानना है कि बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्गों पर अचानक बदलने वाला मौसम, कोहरा और तेज हवाएं कई बार पायलटों के लिए विजिबिलिटी का बड़ा संकट पैदा कर देती हैं। डीजीसीए (DGCA) और राज्य प्रशासन ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि तकनीकी खराबी थी या फिर विजिबिलिटी कम होने के कारण यह क्रैश हुआ। हालांकि, कारणों की जांच जो भी हो, लेकिन इस दुर्घटना ने एक बार फिर से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक लचर रवैये को बेनकाब कर दिया है।

परिवारों में कोहराम और बेंगलुरु में शोक की लहर, हर आंख है नम

इस भयानक हादसे की खबर जैसे ही बेंगलुरु में इंस्पेक्टर अरुण सालुंके और उनके अन्य साथियों के घरों तक पहुंची, वहां कोहराम मच गया। दीपावली और त्योहारी सीजन के बीच आई इस मनहूस खबर ने परिवारों की खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया है। अरुण सालुंके के दफ्तर और उनके परिचितों के बीच भी यकीन करना मुश्किल हो रहा है कि हंसमुख और मिलनसार स्वभाव वाले अरुण अब इस दुनिया में नहीं रहे। उत्तराखंड प्रशासन की मदद से सभी शवों को उनके पैतृक आवास और बेंगलुरु भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दोस्तों की वह टोली जो हंसी-खुशी के साथ घर से निकली थी, अब केवल कुछ तस्वीरों और कभी न भरने वाले जख्मों के रूप में अपने पीछे यादें छोड़ गई है।