रामनगर के पुछड़ी गांव में वन विभाग की 15 हेक्टेयर जमीन पर चला धामी सरकार का गर्जना
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र स्थित पुछड़ी गांव में शनिवार सुबह तड़के प्रशासन और वन विभाग का बड़ा संयुक्त अभियान शुरू हो गया। लंबे समय से वन विभाग की आरक्षित 15 हेक्टेयर बहुमूल्य भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण और पक्के निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की टीम 14 से अधिक भारी-भरकम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंच गई। रामनगर के इस पुछड़ी क्षेत्र को कॉर्बेट नेशनल पार्क के मुहाने और संवेदनशील वन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। अवैध कब्जों को हटाने के लिए चलाए जा रहे इस महा-अभियान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना या स्थानीय विरोध की स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी (PAC) की टुकड़ियों और फायर ब्रिगेड की टीमों को तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार कोर्ट के सख्त निर्देशों और राज्य सरकार की भू-अतिक्रमण विरोधी नीति के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है।
पुछड़ी गांव में तड़के पहुंचे 14 बुलडोजर: हड़कंप के बीच शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
शनिवार सुबह सूर्योदय के साथ ही रामनगर तहसील प्रशासन, कुमाऊं वन प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस की संयुक्त टीम पुछड़ी गांव की सीमा पर दाखिल हो गई। अचानक एक साथ 14 बुलडोजरों और भारी मशीनरी के गड़गड़ाहट की आवाज से पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में हड़कंप मच गया। अतिक्रमणकारियों द्वारा वन विभाग की लगभग 15 हेक्टेयर जमीन पर बनाए गए अवैध पक्के मकानों, बाउंड्री वॉल, व्यावसायिक शेड और अन्य निर्माणों को एक-एक कर जमींदोज करने का काम शुरू किया गया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह जमीन कुमाऊं वन मंडल के आरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जिस पर लंबे समय से अवैध तरीके से कब्जा कर पक्के ढांचे खड़े कर लिए गए थे। तड़के हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और कई लोग खुद ही अपना सामान समेटते नजर आए।
भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती: सील किए गए रामनगर के पुछड़ी गांव के प्रवेश द्वार
अतिक्रमण हटाने की इस विशाल कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए बेहद पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नैनीताल के पुलिस अधीक्षक और उप जिलाधिकारी (SDM) के नेतृत्व में रामनगर, हल्द्वानी और आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया है। इसके अलावा महिला पुलिसकर्मियों और पीएसी की कई कंपनियों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। गांव के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और किसी भी बाहरी व्यक्ति या उपद्रवी तत्व के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्रोन कैमरों से पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी ने भी प्रशासनिक कार्य में बाधा डालने या शांति व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट का आदेश और भू-अतिक्रमण पर धामी सरकार का सख्त रुख
उत्तराखंड में सरकारी, वन और नजूल भूमि से अवैध कब्जे हटाने का अभियान पिछले कई महीनों से लगातार जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद पूरे राज्य में वन भूमि और सरकारी संपत्तियों पर बने अवैध अतिक्रमणों को चिन्हित कर ध्वस्त किया जा रहा है। नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा दिए गए कड़े दिशा-निर्देशों के अनुपालन में ही रामनगर के पुछड़ी गांव में इस 15 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि को खाली कराने की कार्रवाई की गई है। वन विभाग ने इस कार्रवाई से पूर्व संबंधित अतिक्रमणकारियों को बेदखली के नोटिस जारी किए थे और उन्हें स्वतः कब्जा हटाने का पर्याप्त समय दिया गया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद आखिरकार शनिवार को प्रशासन को सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर कार्रवाई का रास्ता चुनना पड़ा।
रामनगर और कॉर्बेट बफर जोन की सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई
रामनगर का पुछड़ी गांव केवल एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के बफर जोन और वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridor) से सटा हुआ संवेदनशील क्षेत्र है। इस 15 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध इंसानी बसावट के कारण न केवल जंगलों का विनाश हो रहा था, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही थीं। हाथियों और बाघों की प्राकृतिक आवाजाही के रास्ते में अवैध निर्माण होने से वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा था। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से आरक्षित वन भूमि पूरी तरह सुरक्षित होगी और कॉर्बेट क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने में बड़ी सफलता मिलेगी।