CM धामी ने 'नशामुक्त उत्तराखण्ड वॉकथॉन' को दिखाई हरी झंडी
देवभूमि उत्तराखंड को नशा मुक्त और स्वस्थ बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक और व्यापक जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित भव्य 'नशामुक्त उत्तराखण्ड वॉकथॉन' (Drug-Free Uttarakhand Walkathon) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस बड़े आयोजन में हजारों युवाओं, छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य के युवा वर्ग को एक बेहद प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का युवा केवल इस नशामुक्त अभियान का सहभागी भर न बने, बल्कि आगे बढ़कर इस सामाजिक बदलाव का सच्चा नेतृत्वकर्ता भी बने। सीएम धामी के इस ऊर्जावान संबोधन ने युवाओं के भीतर एक नया जोश और संकल्प भर दिया है।
वर्ष 2025 तक 'नशामुक्त देवभूमि' का संकल्प और सरकार का स्पष्ट विज़न
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने भाषण के दौरान राज्य सरकार के उस संकल्प को दोहराया जिसमें वर्ष 2025 तक उत्तराखंड को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम धामी ने कहा कि देवभूमि की पवित्रता, संस्कृति और गौरव को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि हमारी आने वाली पीढ़ी नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के दलदल से पूरी तरह दूर रहे। सरकार इस दिशा में बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तहत एक तरफ जहां नशीले पदार्थों के अवैध कारोबारियों और तस्करों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ युवाओं को खेलकूद, शिक्षा, स्वरोजगार और फिटनेस से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशीले पदार्थों का कारोबार करने वाले अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
युवाओं की भूमिका: सामाजिक परिवर्तन और जागरूकता के असली ध्वजवाहक
वॉकथॉन के दौरान एकत्रित भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज या राज्य में क्रांति लाने की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति में निहित होती है। यदि देश और प्रदेश का युवा ठान ले, तो किसी भी सामाजिक बुराई को जड़ से उखाड़कर फेंका जा सकता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने स्कूल, कॉलेज, मोहल्लों और गांवों में जाकर नशा विरोधी चौपालों और अभियानों का संचालन करें। यदि कोई साथी या मित्र नशे की चपेट में आता दिखता है, तो उसे डांटने या अलग-थलग करने के बजाय सहानुभूतिपूर्वक उसकी काउंसिलिंग कराएं और उसे पुनर्वसन केंद्रों की मदद से मुख्यधारा में वापस लाएं। युवाओं का यह सक्रिय नेतृत्व ही नशामुक्त उत्तराखंड के सपने को साकार करने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
कड़े कानून और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की प्रभावी कार्रवाई
राज्य में नशे के अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उत्तराखंड पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि अंतर्राज्यीय नशा तस्करों के प्रवेश पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। पुलिस प्रशासन द्वारा पिछले कुछ महीनों में कई बड़े नशा तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया है और करोड़ों रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसके साथ ही, सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर पुनर्वास केंद्रों (Rehabilitation Centers) की स्थिति में भी सुधार किया जा रहा है ताकि नशे के शिकार हुए युवाओं को बेहतर इलाज और सही मार्गदर्शन मिल सके। कानून का कड़ा शिकंजा और जन-सहभागिता का यह संगम उत्तराखंड को एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ओर ले जा रहा है।
वॉकथॉन में दिखा अभूतपूर्व उत्साह: देवभूमि ने लिया एक नया संकल्प
देहरादून की सड़कों पर आयोजित इस 'नशामुक्त उत्तराखण्ड वॉकथॉन' में चारों तरफ केवल देशभक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता का माहौल देखने को मिला। बैनर, तख्तियों और जोशीले नारों के साथ हजारों की संख्या में दौड़े युवाओं ने यह साबित कर दिया कि वे राज्य को नशा मुक्त बनाने के इस राष्ट्रीय अभियान में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, खिलाड़ियों और समाजसेवियों ने भी मुख्यमंत्री धामी की इस पहल की सराहना की और इसे जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। आने वाले दिनों में इस प्रकार की वॉकथॉन और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन राज्य के सभी 13 जिलों, तहसीलों और ब्लॉक स्तरों पर भी किया जाएगा, ताकि संदेश उत्तराखंड के दूर-दराज़ के पर्वतीय इलाकों तक स्पष्ट रूप से पहुंच सके।