पीएम मोदी को मिले स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी और उत्तराखंड की सांस्कृतिक चमक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश-विदेश के दौरों और विभिन्न आयोजनों के दौरान मिले उपहारों और स्मृति चिन्हों (Memorabilia) की बहुप्रतीक्षित ई-नीलामी एक बार फिर से शुरू हो चुकी है। राष्ट्रीय संस्कृति कोष और संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस खास नीलामी में इस बार देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध कला, संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़े 27 बेहद दुर्लभ और अनमोल तोहफे आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, साधु-संतों, स्थानीय कारीगरों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा प्रधानमंत्री को समय-समय पर भेंट किए गए ये स्मृति चिह्न न केवल राज्य की कलात्मक महारत को दर्शाते हैं, बल्कि देशवासियों के लिए देवभूमि की पावन विरासत को अपने घर का हिस्सा बनाने का एक सुनहरा अवसर भी प्रदान करते हैं।
केदारनाथ मंदिर की काष्ठ प्रतिकृति से लेकर पिछौड़ा तक—उत्तराखंड के कौन-कौन से 27 तोहफे हैं शामिल?
नीलामी सूची में शामिल उत्तराखंड के 27 स्मृति चिन्हों में राज्य की सदियों पुरानी परंपराओं, हस्तशिल्प और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इनमें मुख्य रूप से बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम की सुंदर लकड़ी से बनी अलंकृत प्रतिकृतियां (Wooden Replicas), कुमाऊं की प्रसिद्ध पारंपरिक हस्तकला 'ऐपण' (Aipan Art) से सजी पेंटिंग्स, और कुमाऊंनी महिलाओं का गौरव माने जाने वाला पारंपरिक 'रंगवाली पिछौड़ा' शामिल हैं। इसके अलावा, उत्तराखंड की प्रसिद्ध काष्ठ कला से तराशे गए प्रतीक चिह्न, पीतल व तांबे की धातु शिल्पकला से निर्मित बर्तन और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के लघु रूप भी इस नीलामी की शोभा बढ़ा रहे हैं। ये सभी वस्तुएं उत्तराखंड के लोक जीवन और वहां की कलात्मक गहराई को सीधे तौर पर प्रदर्शित करती हैं।
नीलामी की प्रक्रिया और आप कैसे घर ला सकते हैं देवभूमि की यह खास धरोहर?
यदि आप भी प्रधानमंत्री मोदी को मिले इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्मृति चिन्हों को खरीदने की इच्छा रखते हैं, तो इसके लिए एक बेहद पारदर्शी और आसान ऑनलाइन प्रक्रिया तय की गई है। संस्कृति मंत्रालय की आधिकारिक ई-ऑक्शन वेबसाइट (pmmementos.gov.in) पर जाकर कोई भी भारतीय नागरिक अपना पंजीकरण करा सकता है। वेबसाइट पर उत्तराखंड के सभी 27 तोहफों की विस्तृत फोटो, उनका आधार मूल्य (Base Price) और उनके सांस्कृतिक महत्व का विवरण उपलब्ध कराया गया है। प्रतिभागी अपनी पसंद के उपहार के लिए ऑनलाइन बोली (Bid) लगा सकते हैं। अधिकतम बोली लगाने वाले विजेता को वह स्मृति चिह्न सुरक्षित तरीके से उनके पते पर डिलीवर कर दिया जाएगा।
जनसेवा और 'नमामि गंगे' परियोजना में इस्तेमाल होगी नीलामी से मिलने वाली पूरी राशि
प्रधानमंत्री स्मृति चिन्हों की इस नीलामी की सबसे खास और सराहनीय बात यह है कि इससे मिलने वाली समस्त धनराशि का उपयोग किसी व्यक्तिगत कार्य के लिए नहीं, बल्कि देश की पवित्र नदी गंगा के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए समर्पित 'नमामि गंगे' (Namami Gange) फ्लैगशिप प्रोजेक्ट में किया जाएगा। यानी जब आप उत्तराखंड की इस अनमोल विरासत को अपने घर लाएंगे, तो आपकी बोली का एक-एक रुपया देश की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय जीवन रेखा गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के पावन कार्य में योगदान देगा। यही वजह है कि देश भर के कला प्रेमियों, श्रद्धालुओं और संग्रहकर्ताओं (Collectors) के बीच इस नीलामी को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।