अत्याचार से पीड़ित हर व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

अत्याचार से पीड़ित हर व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने न्याय व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर से अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता का कड़ा संदेश दिया है। राज्य की राजधानी देहरादून स्थित सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कहा कि समाज के किसी भी वर्ग या व्यक्ति के साथ होने वाले अत्याचार, अन्याय या उत्पीड़न को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम धामी ने पुलिस विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि राज्य के प्रत्येक पीड़ित नागरिक को बिना किसी देरी के समय पर न्याय, पुख्ता सुरक्षा और पूरा सम्मान मिलना सुनिश्चित किया जाए। सरकार का यह स्पष्ट विजन है कि देवभूमि की कानून व्यवस्था इतनी मजबूत और पारदर्शी होनी चाहिए कि अपराधियों के मन में कानून का खौफ हो और आम जनता, विशेषकर महिलाओं, गरीबों, दलितों और कमजोर वर्ग के लोगों में पूरी सुरक्षा की भावना बनी रहे। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों और मुख्यमंत्री के इस सख्त संदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में दूरगामी मायने निकाले जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कड़ा रुख और न्याय प्रणाली की पारदर्शिता पर जोर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से ही पुष्कर सिंह धामी ने हमेशा से 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति को अपनी प्रशासनिक कार्यप्रणाली का मुख्य आधार बनाया है। चाहे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हो या फिर महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों पर होने वाले अत्याचार के मामले, सीएम धामी हमेशा से त्वरित और सख्त कार्रवाई के पक्षधर रहे हैं। हाल ही में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) और राज्य के तमाम जिलाधिकारियों व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSPs) को निर्देश दिए कि थानों और तहसीलों स्तर पर आने वाली हर एक शिकायत की गंभीरता से सुनवाई होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या पीड़ित को टरकाने की कोशिश पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि न्याय मिलने में देरी होना भी एक तरह से अन्याय के समान है, इसलिए पुलिस और न्याय तंत्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर मामले में समयबद्ध तरीके से चार्जशीट दाखिल हो और दोषियों को सजा मिले।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे विशेष कदम

किसी भी सभ्य और प्रगतिशील समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहां महिलाएं और बच्चे कितने सुरक्षित और आत्मनिर्भर हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक के दौरान विशेष रूप से महिला सुरक्षा और बाल अपराधों से जुड़े मामलों की समीक्षा की। उन्होंने राज्य के सभी थानों में महिला सहायता प्रकोष्ठ (Women Help Desks) को और अधिक प्रभावी बनाने और साइबर अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। देवभूमि में बाहरी राज्यों से आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन (Verification Campaign) का जो अभियान सरकार ने चलाया है, उसकी सराहना करते हुए सीएम ने कहा कि इसे और अधिक सख्ती से आगे बढ़ाया जाए ताकि किसी भी असामाजिक तत्व को राज्य की शांति व्यवस्था को भंग करने का मौका न मिल सके। महिला उत्पीड़न से जुड़ी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के कामकाज की भी नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।

पीड़ित सहायता योजनाओं और कानूनी मदद का धरातल पर क्रियान्वयन

केवल अपराधियों को पकड़ना ही न्याय का हिस्सा नहीं है, बल्कि अत्याचार से पीड़ित व्यक्ति को सामाजिक और आर्थिक संबल प्रदान करना भी सरकार की उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश दिए हैं कि शासन स्तर से चलाई जाने वाली पीड़ित मुआवजा योजनाओं और कानूनी सहायता (Legal Aid) का लाभ बिना किसी कागजी अड़चन के सीधे पीड़ित तक पहुंचना चाहिए। कई बार गरीब और असहाय लोग जानकारी के अभाव में कानूनी लड़ाई लड़ने से पीछे हट जाते हैं, ऐसे में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे ऐसे लोगों की हरसंभव मदद करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार हर उस नागरिक के साथ चट्टान की तरह खड़ी है जो किसी भी प्रकार के अत्याचार या शोषण का शिकार हुआ है, और अपराधियों को कानून के दायरे में लाकर कठोरतम दंड दिलाना सरकार का मुख्य संकल्प है।

सुशासन, पारदर्शिता और जनता के भरोसे का प्रतीक बनती धामी सरकार

उत्तराखंड सरकार के इन कड़े और समयबद्ध प्रशासनिक फैसलों से राज्यभर में सकारात्मक संदेश गया है। आम जनता के बीच यह विश्वास मजबूत हो रहा है कि सरकार उनकी सुरक्षा और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह स्पष्ट संदेश कि "अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय मिले" न केवल प्रशासनिक मशीनरी को चुस्त-दुरुस्त करने का काम कर रहा है, बल्कि शासन प्रणाली को जनता के प्रति और अधिक उत्तरदायी भी बना रहा है। आने वाले समय में इन निर्देशों के धरातल पर उतरने से राज्य में अपराध दर में कमी आएगी और कानून का राज और अधिक मजबूत होगा, जिससे देवभूमि की शांति और सद्भाव की संस्कृति हमेशा के लिए सुरक्षित बनी रहेगी।