उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट पर सरकार की सफाई

उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट पर सरकार की सफाई

देवभूमि उत्तराखंड में आयोजित हुए 'ग्लोबल इन्वेस्टर समिट 2023' (Global Investors Summit) में आए निवेश प्रस्तावों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में छिड़ी बहस के बीच राज्य सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उत्तराखंड के उद्योग सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव विनय शंकर पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भ्रामक रिपोर्टों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने निवेश प्रस्तावों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए पारदर्शी तरीके से काम किया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि तीन 'ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी' के जरिए अब तक 1,01,000 करोड़ रुपये (1.01 लाख करोड़) से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स की ग्राउंडिंग पूरी हो चुकी है। सरकार ने साफ किया है कि निवेश से जुड़ा हर एक डेटा सरकारी पोर्टल पर पूरी तरह सार्वजनिक है जिसे कोई भी देख सकता है।

भ्रामक धारणाओं को खारिज करते हुए उद्योग सचिव ने क्या कहा?

अक्सर सार्वजनिक मंचों पर यह सवाल उठाए जा रहे थे कि समिट में केवल बड़े वादे किए गए और वास्तविक धरातल पर कुछ काम नहीं हुआ। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय ने कहा कि बिना तथ्यों की जांच किए भ्रामक धारणा बनाना पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सिर्फ बड़े कॉरपोरेट घरानों को आकर्षित करना नहीं है, बल्कि पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था (Ecology and Economy) के बीच संतुलन बनाकर छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी प्रोत्साहित करना है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी निवेश का महत्व सिर्फ उसकी धनराशि के आकार से नहीं, बल्कि उससे स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले रोजगार और आजीविका के अवसरों से तय होता है।

छोटे व्यापारियों और आटा चक्की के निवेश पर उठे सवालों का दिया करारा जवाब

विपक्ष और सोशल मीडिया पर छोटे उद्यमियों जैसे आटा मिलों, खाद की दुकानों और स्थानीय व्यापारियों को निवेश के आंकड़ों में शामिल करने पर सवाल उठाए गए थे। इस पर सरकार की तरफ से जवाब देते हुए सचिव ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने वाले छोटे व्यापारियों के योगदान को कम आंकना सही नहीं है। पहाड़ी राज्य की भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर लगने वाले छोटे-छोटे उद्योग ही वहां के युवाओं को पलायन रोकने और रोजगार देने का सबसे बड़ा साधन बनते हैं। राज्य सरकार हर उस निवेशक को बराबरी का दर्जा और सहयोग दे रही है जो उत्तराखंड की धरती पर अपना व्यवसाय शुरू कर स्थानीय युवाओं को नौकरी दे रहा है।

चौथे चरण में 24,000 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतरने को तैयार

उद्योग विभाग द्वारा दिए गए अपडेट के अनुसार, राज्य में निवेश को रफ्तार देने के लिए जल्द ही चौथी 'ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी' (Ground Breaking Ceremony) आयोजित की जाएगी। इसके तहत लगभग 24,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों, 'सिंगल विंडो सिस्टम' (Single Window System) और सुगम प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण देश-विदेश के निवेशक उत्तराखंड में लगातार अपनी इकाइयां स्थापित करने में रुचि दिखा रहे हैं। ऊर्जा, पर्यटन, वेलनेस, आयुष और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश की गति सबसे तेज देखी जा रही है।

पारदर्शिता और आधिकारिक डेटा पर ही भरोसा करने की अपील

अपने बयान के अंत में उद्योग सचिव ने मीडिया और आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों या आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष न निकालें। सरकार ने उद्योग मित्र पोर्टल और आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर सभी निवेश परियोजनाओं, कंपनी के नामों और उनकी स्थिति का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया है। सरकार का संकल्प है कि हर एक समझौता ज्ञापन (MoU) को वास्तविक औद्योगिक परियोजना में बदला जाए ताकि उत्तराखंड को देश का एक सशक्त, आत्मनिर्भर और अग्रणी औद्योगिक राज्य बनाया जा सके।