मैं आत्मदाह करूंगा': हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश फफककर रोए
उत्तराखंड की राजनीति में इस वक्त एक बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। हल्द्वानी विधानसभा सीट से कांग्रेस के लोकप्रिय विधायक सुमित हृदयेश (Sumit Hridayesh) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अचानक फफककर रो पड़े और उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी और उनके परिवार की जान को भारी खतरा है। विधायक ने दावा किया कि कोई अज्ञात हैकिंग गिरोह उनके और वरिष्ठ पार्टी नेताओं के फोन लगातार टैप कर रहा है और उनकी हर निजी बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है। स्थिति इतनी दर्दनाक हो गई कि सुमित हृदयेश ने यहाँ तक चेतावनी दे डाली कि यदि इस गंभीर मामले में पुलिस और प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो वह आगामी गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान खुद को आग लगाकर आत्मदाह कर लेंगे। उनके इस भावुक और विस्फोटक बयान के बाद से उत्तराखंड की सुरक्षा व्यवस्था और नेताओं की निजता को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में छलके आंसू, बोले— मेरी पत्नी और 15 साल की बेटी की जान खतरे में
हल्द्वानी में मीडिया से मुखातिब हुए कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश अपना दर्द बयां करते हुए अचानक भावुक हो गए और रोने लगे। उन्होंने कहा कि पिछले काफी समय से उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है। सुमित हृदयेश ने रोते हुए कहा कि उन्हें अपनी पत्नी और 15 साल की मासूम बेटी की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता सता रही है। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने इस मामले को लेकर पहले भी पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस गंभीर आपराधिक षड्यंत्र पर कोई सुराग लगाने या कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। विधायक ने सवाल उठाया कि जब राज्य के एक चुने हुए जनप्रतिनिधि की निजता सुरक्षित नहीं है और उनके फोन खुलेआम टैप किए जा रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और गोपनीयता की गारंटी आखिर कौन देगा?
'यह आत्मदाह का प्रयास नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए सच्चा बलिदान होगा'
सुमित हृदयेश ने बहुत ही कड़े शब्दों में ऐलान किया कि उनका यह कदम कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र को बचाने की एक आखिरी कोशिश है। उन्होंने मीडिया के सामने दो टूक कहा, "मैं आत्मदाह का कोई नाटक नहीं करूंगा, बल्कि जरूरत पड़ी तो सचमुच आत्मदाह करूँगा। यह मैं अपने लिए नहीं, बल्कि देश और प्रदेश के लोकतंत्र को बचाने के लिए कर रहा हूँ।" हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि इस फोन टैपिंग और साजिश के पीछे किसका हाथ है, तो उन्होंने साफ किया कि वह सीधे तौर पर राज्य सरकार पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध ठीक हैं, लेकिन कोई ताकतवर गुप्त गिरोह इस काम को अंजाम दे रहा है जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी सुमित हृदयेश से संयम बरतने की अपील की है और सरकार से इस पूरे प्रकरण की त्वरित व निष्पक्ष जांच की मांग की है।